जब पूरा हुआ ‘पाक ख्वाब तो भीगी पलकें, नेकी की हसरत के साथ शुरू हुआ हाजियों की वापसी का सिलसिला
सिलवानी। कोराना के दो साल बाद देश से हज पर गए जायरीन की इस मुकद्दस सफर से वापसी का सिलसिला शुरू हो गया है। सिलवानी से हज करने गए रियाज भाई (ठेकेदार) एवं उनके परिवार वालों ने बताया कि हज करना दुनिया के हर मुसलमान का एक पाक ख्वाब होता है। जिंदगी रहते हर एक मुसलमान हज करने की ख्वाहिश रखता है। वो खुशनसीब होते हैं, जो हज का सफर मुक्कमल कर पाते हैं। कहा जाता है कि हज से पहले हक अदा करने वालों को ही ये पाक सफर नसीब हो पाता है, इसलिए पहले लोगों को अपने सभी हक अदा करने चाहिए। इसके बाद हज से वापस आकर हज की हिफाजत की फिक्र में अपनी बाकि की जिंदगी बितानी चाहिए। जानकार मानते हैं कि हदीस में मां-बाप को मोहब्बत की नजर से देखने वालों को हर नजर के बदले हज-ए-मकबूल का सवाव नसीब मिलता है। तभी कहते हैं कि एक निगाह मोहब्बत से देखिए एक हज ए मकबूल का सवाब और यही हसरत आज हज से वापस आने वाले हाजियों के आंखों में दिखी। सभी ने अपनी जिंदगी में इस नेक अमल की सीख को खुद की जिंदगी में उतारने की हामी भरी।



