Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 26 जुलाई 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 26 जुलाई 2023
26 जुलाई 2023 दिन बुधवार को अधिक श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि है। आज बहुत ही सुन्दर संयोग बन रहा है। क्योंकि आज बुधवार की अष्टमी अर्थात बुधाष्टमी है। आज स्नान-दानादी का फल सूर्यग्रहण के समान पुण्य होता है। आप सभी सनातनी बंधुओं को बुधाष्टमी पर्व की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – श्रावण मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – श्रावण मास शुक्ल पक्ष अष्टमी तिथि 03:52 PM तक उपरांत नवमी
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी तिथि के देवता हैं रुद्र।इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति 01:10 AM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र के स्वामी राहु है। तथा स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।
📢 योग : साध्य योग 02:39 PM तक, उसके बाद शुभ योग
⚡ प्रथम करण : बव – 03:52 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 03:56 ए एम, जुलाई 27 तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:21:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:40:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:16 ए एम से 04:57 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:37 ए एम से 05:39 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:44 पी एम से 03:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:16 पी एम से 07:37 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 07:16 पी एम से 08:18 पी एम
💧 अमृत काल : 03:58 पी एम से 05:38 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:07 ए एम, जुलाई 27 से 12:49 ए एम, जुलाई 27
❄️ रवि योग : 01:10 ए एम, जुलाई 27 से 05:39 ए एम, जुलाई 27
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
💁🏻♀️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र भेंट करें।
🌲 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवियोग/ दुर्गा अष्टमी/ करगिल विजय दिवस, स्वेज़ नहर का राष्ट्रीयकरण दिवस, सत्य नारायण सिन्हा स्मृति दिवस, भारतीय योगाचार्य कृष्ण पट्टाभि जोइस जयन्ती, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी मालती चौधरी जन्म दिवस, लाइबेरिया स्वतंत्रता दिवस, मालदीव स्वतंत्रता दिवस, नीदरलैंड स्वतंत्रता दिवस, क्रिकेटर गुलाबराई रामचंद जन्म दिवस, भारत के प्रमुख शिक्षाविद् गुरुदास बनर्जी जन्म दिवस
✍🏼 विशेष:- अष्टमी तिथि को नारियल त्याज्य बताया गया है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इसका मतलब कोई भी विकट कार्य आज आप कर-करवा सकते हैं। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। इसका मतलब आज आप कोई भी भयंकर रोगों के इलाज का प्रयत्न भगवान के नाम के साथ करेंगे-करवाएंगे तो निश्चित लाभ होगा। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu Tips 🛕
वास्तु शास्त्र में आज हम आपको ऑफिस में कुछ जरूरी चीजों के बारे में बताएंगे। वास्तु के अनुसार ऑफिस में अकाउंटस विभाग के लिए उत्तर दिशा का चुनाव करना अच्छा रहता है यह दिशा आपके कारोबार के लिए शुभ फलदायक रहेगी। यहां पर आप अपने सभी जरूरी कागज संभाल कर रख सकते हैं। बरकत और सुख-शांति के लिए दुकान में एक मंदिर होना भी जरूरी है और दुकान में मंदिर के लिए ईशान कोण सबसे अच्छी जगह है।
मंदिर के अलावा भी अगर आप अन्य जगहों पर भी देवी-देवताओं की तस्वीर लगाना चाहते हैं तो ध्यान रहे कि नैत्रत्य कोण, यानी दक्षिण-पश्चिम दिशा को छोड़कर आप किसी भी जगह का चुनाव कर सकते हैं। इसके अलावा ऑफिस में भोजन गर्म करने का ओवन रखने के लिए दक्षिण-पूर्वी कोने का चुनाव करना चाहिए, जबकि पानी की व्यवस्था के लिए उत्तर दिशा ही ठीक रहती है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
कुछ बातें ऐसी होती हैं जिन्हें हम सीधा -सीधा नहीं बता सकते ।उन्हें घुमा फिरा कर कहना पड़ता है। ऐसे ही हिंदी के महान कवि तुलसीदास जी ने स्त्रियों के बारे में दो गोपनीय बातें कहीं हैं।
कभी भी एक मनुष्य को सुंदर स्त्री को देखकर मूर्ख नहीं बनना चाहिए ।उसे अपने विवेक से काम लेना चाहिए।
मां और अपनी स्त्री को छोड़करअन्य सभी महिलाओं को बहन के बराबर समझना चाहिए।
🫒 आरोग्य संजीवनी 🍓
कौन सी एक्सरसाइज डबल चिन को कम कर सकती है? पाउट करते हुए आपने कई बार फोटो क्लिक करवाई होगी लेकिन अगर आप डबल चिन की समस्या से परेशान हैं तो पाउट करने से ये समस्या कम हो सकती है। इसके लिए चेहरे को सीधा रखते हुए होंठों को स्ट्रेच करते हुए बाहर की तरफ निकालें। पाउट की पोजिशन में 7 से 8 सेकेंड के लिए रहें। दिन में कम से कम ऐसा 5 से 10 बार करें।
जबड़े की एक्सरसाइज डबल चिन खत्म करने के लिए आप जबड़े की एक्सरसाइज करें। इसे करने के लिए सिर को दाईं ओर मोड़ें और अपने निचले जबड़े को आगे की ओर करते हुए इस अवस्था में 5-10 सेकंड के लिए रुकें, फिर बाईं ओर यही दोहराएं। ऐसा दिन में कम से कम 5 बार जरूर करें।
टंग स्ट्रेच करें इसे करने के लिए आप अपने चेहरे को सीधा रखते हुए जीभ को बाहर खींचें और नाक की तरफ ऊपर करने की कोशिश करें। ऐसा करने से मांसपेशियों में खिंचाव आएगा, जिससे फैट लॉस होगा। 15 दिन में रिजल्ट पाने के लिए इस एक्सरसाइट को एक दिन में कम से कम 7 से 10 बार दोहराएं।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
बुधाष्टमी व्रत कथा-
मिथिला नाम की एक नगरी में निमि नाम का एक राजा रहते थे । वह एक लड़ाई में मारे गये। उनकी पत्नी जिनका नाम उर्मिला था अपने पति के बिना राज्य से निराश्रित हो इधर उधर भटकने लगी , तब अपने दो बच्चो को लेकर वह अवन्ति देश चली गई और वहाँ एक ब्राह्मण के घर में में गेहू पीसने का काम करती थी और गेहु पिसते समय वह थोड़े से गेहु चुराकर रख लेती और उसे से अपने भूखे बच्चो का पालन करती थी । कुछ समय बाद उर्मिला का निधन हो गया पर उसके बच्चे बड़े हो चुके थे। उसका पुत्र बड़ा होकर, मिथिला आया और पिता के राज्य को वापिस प्राप्त कर शासन करने लगा। उसकी बहन श्यामला भी विवाह योग्य हो गई थी। वह अत्यंत रूपवती थी व उसका विवाह अवन्ति देश के राजा धर्मराज से हो गया।
एक दिन धर्मराज ने अपनी पत्नी से श्यामला से कहा – ” हे प्रिये ! तुम सभी काम करना , परन्तु ये सात स्थानों जिनमे तालें बंद हैं , इनमे तुम कभी मत जाना. ” श्यामला ने ‘ बहुत अच्छा ‘ कह कर पति की बात मान ली , उसके मन में उत्सुकता बनी रहे।
एक दिन जब धर्मराज अपने किसी कार्य में व्यस्त थे , तब श्यामला ने एक मकान का ताला खोलकर वहां देखा कि उसकी माता उर्मिला को अति भयंकर यमदूत बांध कर तप्त तेल के कडाह में बार – बार डाल रहे हैं. लज्जित होकर श्यामला ने वह कमरा बंध कर दिया , फिर दुसरा कमरा खोला तो देखा कि वहाँ भी उसकी माता को यमदूत शिला के ऊपर रखकर पिस रहें हैं और माता चिल्ला रही हैं इसी प्रकार तीसरा कमरा खोला देखा की यमदूत उसकी माता के मस्तक में किले ठोक रहे हैं ,इसी तरह चौथे में अति भयंकर श्रवान उसका भक्षण कर रहें हैं , पांचवे में लोहे के स्न्दंश उसे पीड़ित कर रहे हैं. छठे में कोल्हू के बिच ईख के समान पेरी जा रही हैं और सातवे को खोलकर देखा तो वहाँ भी उसकी माता को हजारो कृमि भक्षण कर रहे हैं और वह रुधिर आदि से लथपथ हो रही हैं.
यह देख कर श्यामला ने विचार किया कि मेरी माता ने ऐसा कौन – सा पाप किया , जिससे वह इस दुर्गति को प्राप्त हुई. वह सोचकर उसने सारा वृतांत अपने पति धर्मराज को बताया.
धर्मराज बोले – प्रिये मैंने इसलिए कहा था की ये सात ताले कभी न खोलना , नही तो तुम्हे वहां पश्चाताप होगा.तुम्हारी माता ने सन्तान के स्नेह से ब्राह्मण के खेत से गेहु चुराये थे , क्या तुम इस बात को नही जानती जों तुम इस बात को मुझसे पूछ रही हो ? यह सब उसी कर्म का फल हैं. ब्राह्मण का धन स्नेह से भी भक्षण करे तो भो सात कुल अधोगति को प्राप्त होते हैं और चुराकर खाए तो जब तक सूर्य और चन्द्रमा और तारें हैं , तबतक नरक से उद्धार नही होता. जों गेहु इसने चुराये थे , वे ही कृमि बनकर इसका भक्षण कर रहे हैं.
श्यामला ने कहा – महाराज ! मेरी माता ने जों कुछ भी पहले किया वह सब मैं जानती हूँ फिर भी अब आप कोई ऐसा उपाय बतलाये , जिससे मेरी माता का नरक से उद्दार हो जाय. इस पर धर्मराज ने कुछ समय विचार किया और कहने लगे — प्रिये ! आज से सात जन्म पूर्व ब्राह्मणी थी. उस समय तुमने अपनी सखियों के साथ जों बुधाष्टमी का व्रत किया था , यदि उसका फल तुम संकल्प पूर्वक अपनी माता को दे दो तो इस संकट से उसके मुक्ति हो जायेगी. यह सुनते ही श्यामला सी स्नानकर अपने व्रत का पुण्य फल संकल्प पूर्वक माता के लिए दान कर दिया. व्रत के फल के प्रभाव से उसकी माता भी उसी क्षण दिव्य देह धारण कर विमान में बैठकर अपने पति सहित स्वर्ग लोक की चली गई और बुध ग्रह के समीप हो गई.यह व्रत अपनी सन्तान को अपनी माता के लिए रखना चाहिये. इस व्रत को रखने से धन , धान्य , पुत्र , पौत्र , दीर्घ आयु और एश्वर्य मिलता हैं.
🪐 बुधअष्टमी की दूसरी कथा
भविष्यपुराण की एक कथा के अनुसार इल नाम के राजा रहा करते थे। एक बार वह हिरण का पीछा करते हुए, उस वन में जा पहुंचे जहां भगवान शिव और पार्वती जी भ्रमण कर रहे थे। उस समय शिव जी का आदेश था कि वन में पुरुष प्रवेश करते ही स्त्री में बदल जाए।
इसलिए जैसे ही राजा इल ने वन में प्रवेश किया वह स्त्री बन गए। इल के उत्तम स्वरूप को देख बुध देव उन पर मोहित हो गए तथा उनसे विवाह कर लिया। जिस दिन इल और बुध का विवाह हुआ उस दिन अष्टमी तिथि थी, तभी से बुधाष्टमी का पर्व मनाया जाने लगा।
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⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।


