सत्येन्द्र जैन, स्वतंत्र पत्रकार
कुछ दिनों पूर्व राहुल गांधी इंग्लैंड यात्रा पर थे।वहां की धरती से भारत में लोकतंत्र समाप्ति का आरोप लगाया और अमेरिका एवं यूरोप के देशों से लोकतंत्र स्थापित करने के लिए हस्तक्षेप की याचना की है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की भी तुलना आतंकवादी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से की है। साथ ही सरकारी संस्थानों पर राष्ट्रीय स्वंय सेवक संघ का आधिपत्य बताया। भारत के संविधान में प्रदत्त अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार को राहुल गांधी एवं अन्य सभी नागरिकों को उपयोग करना चाहिए। भारतीय जनता पार्टी और नरेंद्र मोदी का विरोध करना चाहिए । किंतु आलोचना करते करते भारत विरोध से बचना चाहिए। जिस भारत राष्ट्र से उनकी भारतीयता की पहचान होती है उसी भारत के संविधान की आलोचना को किसी भी दृष्टिकोण से उचित नहीं ठहराया जा सकता है।दूसरे देशों से भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की मांग करना भी भारत की सम्प्रभुता पर आघात है। राहुल गाँधी लोकसभा सांसद हैं। लोकतंत्र के चार स्तंभ में एक स्तंभ विधायिका के अंश हैं ,भाग हैं। ऐंसा प्रतीत हो रहा है कि जिन अंग्रेजों ने भारत पर दो सौ वर्ष से अधिक शासन किया उनके देश इंग्लैंड से राहुल गांधी ने सुनियोजित ढंग से भारत के लोकतंत्र की आलोचना की है।उनका यह दांव सेल्फ गोल में पलट गया है। देश के लगभग एक सौ चालीस करोड़ लोगों को आलोचना का अवसर स्वमेव दिया है। कांग्रेस की स्थापना भी अंग्रेज ने की थी एवं वर्ष 1911 तक अंग्रेज कांग्रेस के अध्यक्ष भी रहे हैं। राहुल गांधी को तो सन 1977 में उनकी दादी और भारत की पूर्व प्रधानमंत्री श्रीमती इंदिरा गांधी की विदेश यात्रा से ही प्रेरणा लेनी चाहिए थी। जब वह इंग्लैंड यात्रा पर थी । उनसे पत्रकारों ने प्रश्न किया कि आपको जेल में बहुत कष्ट दिए गए।तब उन्होंने कहा था कि यह विषय उनके देश का आंतरिक मामला है।यह उचित मंच नहीं है। राहुल गांधी के पहले भी उनकी पार्टी के अनेक नेताओं ने भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हटाने के लिए विदेशों से सहायता की याचना की है। मणिशंकर अय्यर ने भी पाकिस्तान से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपदस्थ करने के लिए सहायता मांगी थी। सलमान खुर्शीद ने भी नरेंद्र मोदी को हटाने के लिए विदेशी सहायता की याचना की थी। इन सब घटनाओं से यह प्रतीत होता है कि विदेशी सहायता लेना कांग्रेस पार्टी का उद्देश्य है। कांग्रेसी नेताओं की व्यक्तिगत सोच नहीं है। एक और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा के समय भारत G-20 समूह की अध्यक्षता कर रहा है।वसुधैव कुटुम्बकम के मंत्र को विश्व गुरु की भूमिका में प्रतिपादित कर रहा है। अमेरिका, जर्मनी, जापान, आस्ट्रेलिया, इटली आदि अनेक देशों के प्रमुख विश्व में भारत की महत्ता की मुक्त कंठ से प्रशस्ति कर रहे हैं। वहीं दूसरी ओर राहुल गांधी और कांग्रेस अंग्रेजों की धरती से भारत के लोकतंत्र की,संविधान की आलोचना कर रहे हैं।वह स्वतंत्रता के पश्चात का इतिहास भी भूल जाते हैं जब कांग्रेस की इंदिरा गांधी की सरकार ने ही लोकतंत्र को समाप्त कर आपातकाल आरोपित किया था।देश भर में लगभग डेढ़ लाख लोगों को कारागार में डाल दिया था। पत्रकारिता के सौ से अधिक संस्थानों पर ताला लगा दिया था।
यह भी आश्चर्य है कि राहुल गांधी ने चीन को शांति पसंद राष्ट्र बताया है।जिसने दुनिया को कोरोना की विभीषिका में झोंक दिया है। चीन के कारण गलवान में हमारे वीर सैनिकों को मातृभूमि की रक्षा हेतु अपने प्राणों का उत्सर्ग करना पड़ा। जीवन बलिदान करना पड़ा। उन बलिदानी सैनिको को चीन से पीटा हुआ बता कर उनके अप्रतिम शौर्य का अपमान किया, भारतीय सेना के अतुलित पराक्रम का अपमान किया।
यह आश्चर्य ही है कि राहुल गांधी और भारत विरोधी जार्ज सोरोस की भाषा एक है।चीन और कांग्रेस की भाषा में समानता है। पाकिस्तान और कांग्रेस की भाषा एक है। देश विरोधियों और कांग्रेस नेताओं की भाषा एक जैसी है।
इसी प्रकार राहुल गांधी ने विश्व के सबसे बड़े सामाजिक संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना आतंकवादी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड से कर दी। जो सर्वथा अनुचित ही है।पूर्वाग्रह से ग्रसित कांग्रेस एवं अन्य राजनीतिक दलों के नेताओं द्वारा समय-समय पर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रति टिप्पणियां बयान आते रहते हैं ।जो बहुत आपत्तिजनक होते हैं । कभी बोको हरम, तो उग्रवादी संगठन पीएफआई से तुलना करते हैं। समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान द्वारा भी भाजपा नेत्री जयाप्रदा के अंतरंग वस्त्रों को , संघ के खाकी रंग से जोड़ा गया है । यह भी घोर महिला विरोधी एवं आपत्तिजनक है।वास्तविकता में यह सभी आरोप सत्यता से परे है। संघ के बारे में थोड़ा जानने वाले लोग भी आसानी से कह सकते हैं कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ, अखिल विश्व में भारतीय मूल्य, भारतीय दर्शन और भारतीय ज्ञान परंपरा को बढ़ाने वाला, सांस्कृतिक राष्ट्रवाद एवं राष्ट्रीय एकात्मता का पोषक है। समाज सेवा के क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा संगठन है । जिसमें एक करोड़ से अधिक स्वयंसेवक हैं। लगभग 50 से अधिक आनुषंगिक संगठन हैं । विश्व के पचास देशों में शाखाएं हैं। भारत देश में प्रतिदिन लगभग 68 हज़ार से अधिक शाखाएँ लगती हैं। भारतीय विचार -“अयं निजः परो वेति गणना लघु चेतसाम् | उदारचरितानां तु वसुधैव कुटुम्बकम् | ”अर्थात् :यह मेरा है यह उसका है । ऐसी सोच संकुचित चित्त वाले व्यक्तियों की होती है। इसके विपरीत उदारचरित वाले लोगों के लिए तो यह सम्पूर्ण धरती ही एक परिवार जैसी होती है | संघ इस भावना को अविरलता से प्रस्फुटित कर रहा है। विश्व बंधुत्व की भावना को समृद्ध कर रहा है। यही भाव कालांतर में भारत को विश्वगुरु के रूप में स्थापित करेगा। जबकि मुस्लिम ब्रदरहुड मिस्र का आतंकी संगठन है। अनेक देशों में प्रतिबंधित है एवं ISIS से संबंधित है। आतंकवादी ओसामा बिन लादेन भी मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य रहा है। इसके विपरीत मानवता की सेवा को समर्पित आर एस एस विश्व के 50 देशों में सामाजिक उत्थान के लिए कार्यरत है।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ सामाजिक समरसता का उन्नायक है। “सर्वजन हिताय,सर्वजन सुखाय” के मंत्र का पोषक है। अनेक जैन आचार्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की कार्य पद्धति की प्रशंसा करते हैं। संघ के प्रति श्रद्धा भाव, समाज के समक्ष प्रस्तुत करते रहते हैं। महान संत मेडिटेशन गुरु, उपाध्याय श्री 108 विहसंत सागर महाराज राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारकों को ऋषि तुल्य मानते हैं ।क्योंकि प्रचारक अविवाहित रहते हैं। ब्रह्मचर्य का पालन करते हैं। राष्ट्र की उन्नति के लिए जीवन समर्पित कर देते हैं। संघ के आनुषंगिक संगठन विद्या भारती के विद्यालयों में देश भर में लाखों बच्चे जो मुस्लिम पंथ, ईसाई पंथ , सिख पंथ, जैन पंथ को मानने वाले हैं, वह भी विद्यार्जन कर रहे हैं । अनेक अवसरों पर संघ के स्वयंसेवकों ने मानवता की सेवा की है । 2014 में जम्मू कश्मीर में आई बाढ़ में कश्मीर में मुस्लिम बंधुओं की भी पूर्ण मनोयोग से सेवा की।जीवन रक्षा की है।मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के माध्यम से भी देशभर में लाखों स्वयंसेवक भारत निर्माण में अपना योगदान दे रहे हैं।




