मध्य प्रदेश

मेडिटेशन से डिलीट होगी माइंड की बैड मेमोरी : अध्यक्ष अंकलेश्वर दुबे

ब्रह्माकुमारीज सागर सेवा केंद्र के न्यायविद प्रभाग द्वारा एक दिवसीय अधिवक्ताओं का सेमिनार आयोजित
स्वर्णिम भारत की स्थापना में न्यायविदों की भूमिका विषय पर किया गया आयोजन
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी

सागर । ब्रह्माकुमारीज संस्थान के सागर सेवा केंद्र द्वारा रविवार को न्यायविद प्रभाग के तहत एक दिवसीय अधिवक्ताओं का सेमिनार आयोजित किया गया। जिसमें शहर के जाने-माने अधिवक्ताओं ने भाग लिया।
सेमिनार में मुख्य अतिथि सागर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अंकलेश्वर दुबे ने कहा कि हम अधिवक्तागण रोज ऐसे माहौल में रहते हैं जहां तनाव और व्यर्थ की निगेटिविटी से दिमाग भरा रहता है। जैसे मोबाइल की मेमोरी ज्यादा भर जाती है तो उसको डिलीट करना पड़ता है तो दिमाग और मन, जो निगेटिविटी से भरा हुआ है उसे खाली करने का एकमात्र उपाय है मेडिटेशन। जो यह ब्रह्माकुमारी बहने सिखा रही हैं। मैंने भी राजयोग मेडिटेशन का अभ्यास किया है। मेरा मानना है कि यहां जो ज्ञान दिया जा रहा है, इससे बढ़कर कुछ हो नहीं सकता है। परमात्मा एक हैं और निराकार हैं।
उन्होंने कहा कि मैं 1995 से इस संस्था के संपर्क में रहा हूं। मुझे संस्थान के अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय माउंट आबू जाने का मौका मिला। माउंट आबू की पावन धरा, धरती का स्वर्ग है। सभी को जीवन में एक बार इस पवित्र, पावन धरा की महसूसता करने जरूर जाना चाहिए। वहाँ कि जितनी तारीफ की जाए कम है।
आप परमात्मा के बैरिस्टर बच्चे हैं-
सेवा केंद्र संचालिका ब्रम्हाकुमारी छाया दीदी ने कहा कि हम सभी परमात्मा के बच्चे हैं। आप भी भगवान के बैरिस्टर बच्चे हैं। आज परमात्मा की नजर आप सब पर पड़ी तभी इस आयोजन का शुभारंभ हुआ। उन्होंने सभी को श्रेष्ठ बनने और सदा श्रेष्ठ विचारों से मन को सुंदर बनाने के लिए सभी का उमंग उत्साह बढ़ाया।
ब्रह्माकुमारी नीलम बहन ने उपरोक्त विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि परमात्मा का न्याय संसार में सर्वश्रेष्ठ और अति सुंदर होता है। परमात्मा की शिक्षाएं और निष्पक्ष रुप से निर्णय करने का सही तरीका हमें भागवत गीता के ज्ञान से मिलता है। क्योंकि गीता ही एकमात्र ऐसा शास्त्र है जिसमें स्वयं परमात्मा के द्वारा दिया गया ज्ञान समाया हुआ है। इसलिए अदालत में भी गीता पर हाथ रखकर शपथ दिलाई जाती है। हम यदि अपनी दिनचर्या में परमात्मा की दी हुई शिक्षाओ को शामिल कर लेते हैं तो वह कदम-कदम पर हमारी मदद करता है, हमारा ध्यान रखता है। परमात्मा की शिक्षाएं और कानून की धाराएं जब दोनों का सामंजस्य होता है, तब हमारी भूमिका अहम होती है। एक दुनिया ऐसी थी जिसे सोने की दुनिया अर्थात स्वर्णिम भारत कहा जाता था जहां सभी श्रेष्ठ कर्म करने वाले थे और आज फिर परमात्मा ऐसी ही दुनिया बनाना चाहते हैं और ब्रम्हाकुमारी बहनों और भाइयों द्वारा वह ऐसी दुनिया बनाने का पावन कर्तव्य भी कर रहे हैं। राजयोग मेडिटेशन का नित्य अभ्यास ही हमें हमारे पाप कर्मों विक्रमो से मुक्ति दिलाता है।
ब्रम्हाकुमारी संध्या बहन ने राजयोग मेडिटेशन का आधार स्वयं की पहचान और स्वयंभू परमात्मा की पहचान देते हुए कहा कि हम सभी शरीर नहीं हैं बल्कि शरीर को चलाने वाली एक चेतन शक्ति आत्मा हैं। परमात्मा की संतान हैं। परमात्मा हम सभी मनुष्य आत्माओं के परमपिता हैं जो एक प्रकाश स्वरूप हैं ज्योति स्वरूप हैं।
माउंट आबू मुख्यालय से आए ब्रह्माकुमार कृष्णा भाई ने मुख्यालय के बारे में बताया कि वह ऐसी पावन भूमि है जहां कोई भी जाए तो उसे एक दिव्य शक्ति का अनुभव होता है उस पावन स्थान पर पहुंचकर हर कोई अपने आप को बहुत सौभाग्यशाली अनुभव करता है सहज परमात्मा का अनुभव कराने वाला विश्व में एकमात्र स्थान है जिसे हम लोग मधुबन भी कहते हैं। वरिष्ठ पत्रकार ब्रह्माकुमार पुष्पेंद्र भाई ने संस्था का परिचय दिया तथा संस्था में होने वाली गतिविधियों के बारे में बताया।
ब्रम्हाकुमारी लक्ष्मी बहन ने मंच संचालन करते हुए कहा कि जैसे आप कानून के विद्वान हैं वैसे अब परमात्म ज्ञान को जीवन में अपनाकर आत्मिक ज्ञान के विद्वान बनने की और कदम बढ़ाएं।
सेमिनार में बार एसोसिएशन के सचिव राजू सराफ, मेजर गजराज सिंह, संजय पांडे, ब्रम्हाकुमारी सीता बहन सहित अन्य वरिष्ठ नागरिक गण शामिल रहे।

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