धार्मिक

पहाड़ो को बीच प्रकट हुई माँ कंकाली माई, पालने में विराजमान है माँ कंकाली माई,

दर्शन करने लगीं भक्तो की कतार, लखा पतेरी धाम है माई का स्थान
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
कटनी! मध्यप्रदेश राज्य की है बड़ी ही अदभुत कहानी पहाड़ो में विराजमान है माँ भवानी ! भक्ति की आस्था ने बनाया पवित्र धाम, माँ कंकाली माई मढ़िया है जिनका धाम ! जी हा जब बात सत्य और शक्ति और भक्ति की हो तो माँ की शक्ति अपरम पार है ! मध्यप्रदेश के विभिन्न जिलों में विराजमान माँ शारदा देवी, माँ त्रिपुर सुंदरी, माँ कंकाली माई के साथ विभिन्न स्वरूपों में आज भी माँ की शक्ति और भक्ति दोनों प्रत्यक्ष रूप में नजर आज रहीं है ! इसी प्रकार से कटनी जिले की सीमा पर ग्राम पंचायत लखा पतेरी झूलने में विराजमान माँ कंकाली माई मढ़िया आज भी अपने भक्तो को श्रद्धा भक्ति के साथ आशीर्वाद प्रदान करती चली आ रहीं है। वर्ष 1985 से विराजित माँ कंकाली माई की लीला है अपरंपार चाहे हो निर्धन, चाहो हो भिखारी माता के द्वार सदा ही खुले है!
माँ कंकाली माई मढ़िया धाम – चैत्र नवरात्रि की सतमी को माँ कंकाली माई धाम लखा पतेरी में भक्तो की लगीं कतार माता की शक्ति और श्रदालुओं की भक्ति ने दिव्य दरबार का बखान नहीं कर सकते है! इस दरबार में जिसने जो भी मांगा या चाहा माँ ने सभी की मनोकामनाएं पूर्ण की है!
माँ की शक्ति और भावना की भक्ति के पर्व चैत्र नवरात्रि को लेकर हमारी टीम ने माँ जगदम्बा के दर्शन किये और फिर मढ़िया के पंडा दयाराम बर्मन और पुजारी राकेश बर्मन से दिव्य दरबार की चर्चा की
पंडा दयाराम बर्मन – जानकारी देते हुये बताया कि माँ कंकाली माई की भव्य मूर्ति कटनी जिले के बिलहरी के पास पथरों के बीच में प्रकट हुई थीं! जिनकी स्थापना वर्ष 1985 से ग्राम पंचायत लखा पतेरी में माँ कंकाली माई मढ़िया के नाम से विख्यात है! 40 वर्षों से मैं नियंत्रर माँ की सेवा भक्ति करते चला आ रहा हूँ और स्थानीय लोगों से लेकर कई राज्यों के भक्तो का आना जाना माता के दरबार में हमेशा लगा रहता है! माँ कंकाली माई की कृपा से सभी भक्तों की मनोकामनाएं पूरी करती चली आ रहीं है! चैत्र नवरात्रि पर्व को माता के स्थान मढ़िया में ज्वारे व घट स्थापना की जाती है और नौवीं को ज्वारे विषर्जन लखा पतेरी बड़े तालाब में झूमते गाते हुई सभी गाँव वासी विषर्जन के लिये साथ जाते है! हमारा पूरा परिवार माता की सेवा में लगा रहता है! 51 कलश से लेकर अनगिनत तक ज्वार्रे हो जाते है ये महिमा माँ की अपरंपार है! निसंतानो की झोली कभी नहीं गई खाली ऐसी है माई माँ कंकाली
स्थानीय लोगों ने की मांग – माँ कंकाली माई की मढ़िया का जीर्णदार होना चाहिये क्योंकि माँ के दरबार में अधिक मात्र में भक्तो का आना जा लगा रहता है।

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