आधार बनीं लोगों की बड़ी समस्या, नेटर्वक फेल, भीड़ एवं अतिरिक्त वसूली जैसी उत्पन्न हो रहे हालत

गरीब जनता की परेशानी सुने कौन, जल्द ही शिविरों के माध्यम से दे ग़रीब असहाय आम नागरिकों को सुविधा
ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। जबलपुर जिले एवं ग्रामीण क्षेत्रों में आधार केंद्र चलाने वाले लोगों की मनमर्जी और ठेकेदारों की चांदी। आम जनता की बड़ी मुसीबत बनीं और परेशानी। मंगलवार को मीडिया प्रतिनिधियो द्वारा जिले से लेकर ग्रामीण तहसीलों तक संचालित किए जा रहे आधार केन्द्र में जाकर देखा तो वहां की स्थिति बड़ी ही विचित्र एवं आश्चर्य चकित देखने को मिली। एक ओर राज्य सरकार आधार कार्ड की प्राथमिकता को लेकर आम नागरिकों को सुविधा उपलब्ध कराने में लगा हुआ हैं। तो वहीं दूसरी तरफ जिन केंद्रों को आधार पंजीयन करने लगाया गया हैं। उनका तो सिस्टम ही फेल नज़र आ रहा हैं। जिस एक आधार की प्रक्रिया ऑनलाइन में 10 मिनट से भी कम समय में की जा सकती हैं। उसे कई घंटों के लिए आम जनता को इंतजार करना पड़ रहा हैं। अब सवाल उठता है ? कि आधार कार्ड पंजीयन केंद्र में नेटर्वक की समस्या अधिक होती हमेशा सर्वर डाउन के कारण कार्य नहीं हो पा रहे। या कंप्यूटर ऑपरेटर द्वारा उस को करने अधिक समय लगता है। या फिर बिना ट्रेनिंग प्रशिक्षण के ये कार्य कर रहे है। इतना ही नहीं जिस आधार कार्ड पंजीयन को रजिस्ट्रेशन करने के लिए जिला प्रशासन ने एक कम से कम राशि निर्धारित की गई हैं। उस आधार कार्ड के पंजीयन या फिर जाति नाम सुधार के लिए 200 रूपये से लेकर 700 रूपये तक आम नागरिक से लिया जा रहा हैं। क्यों?
सवाल ये नहीं कि पैसा कितना वसूला जा रहा हैं सवाल ये हैं कि एक छोटे सा बच्चे से लेकर उम्र दराज नागरिक का आधार कार्ड अपडेट करने के लिए सुबह से शाम तक आधार पंजीयन केंद्र में लाइन लगाकर अपने अधिकारों के लिए लड़ना और परेशान होना पड़ रहा हैं। इन विभिन्न छोटे छोटे बालक, बालिकाएं, महिलाओं सहित पुरुषों को रोजाना अपने कार्य को छोड़कर आधार कार्ड अपडेट कराने चक्कर काटने पड़ रहे हैं और जिला प्रशासन से लेकर मुख्यालय स्तर तक के उच्च अधिकारी कर्मचारी को इससे कोई लेना देना नहीं हैं। क्या आम जनता की परेशानी और वर्तमान परिस्थिति को लेकर कोई कार्य समय पर किया जा रहा। आगामी कुछ दिनों में स्कूल में बच्चों के दाखिला कराने ऑनलाइन या आफ लाइन के लिए कुछ दस्तावेज की जरूरत पड़ती है। लेकिन इन गरीबों को ये भी नहीं पता कि आज के समय में इनकी पूरी कुण्डली ऑनलाइन तैयार हैं। फिर भी कुछ जरूरत के लिए ये इन केंद्रों में चक्कर काट रहें और परेशान हो रहे हैं।
नाम न प्रकाशित करते हुए पीड़ित महिला ने बताया कि मैं पिछले एक माह से अधिक समय से आधार कार्ड बनाने के लिए परेशान हो रहीं हूँ। वहीं कटनी जिले की एक महिला ने बताया कि मेरी बेटी का आधार कार्ड बना तो हैं पर जाति सुधार के लिए भटक रहीं हूँ। ये तो वे लोग हैं जो समय लेकर आधार पंजीयन केंद्र में आ कर खड़े हुए हैं। पर इससे भी भयानक तो वे बुजुर्ग एवं बीमारी से पीड़ित अस्पताल और घरों में जीवन से संघर्ष कर रहे हैं।
जिला प्रशासन से की मांग – आम नागरिकों के अधिकार को देखते हुए जिले से लेकर तहसील व ग्रामीण क्षेत्रों में प्रत्येक वार्डों में शिविरों के माध्यम से इन गरीबों और बीमार बुजुर्गों के आधार कार्ड पंजीयन और सुधार कार्य किया जा सकता है। जिससे 20 किलोमीटर दूरी से अधिक दूरी तय कर आधार कार्ड पंजीयन केन्द्र बनवाने आने से इन सभी आम जनता को सुविधाएं प्राप्त हो सकें।



