मध्य प्रदेश

पोला पर्व पर बिकने आए मिट्टी के बैल-घोड़े, पोला अमावस्या पर हुई पूजन

सिलवानी । सनातनी परंपरा में प्रकृति से जुड़े पेड़ पौधे से लेकर नदी, सूरज, चांद आदि की पूजा की जाती है। वहीं जो जानवर मानव के सहयोगी हैं, सनातनी समाज उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हुए उनको भी पूजते हैं। इसी कड़ी में प्रति वर्ष भादों की अमावस्या को कृषि क्षेत्र में सहयोगी बैल घोड़े की पूजा करते हैं। इस पर्व को पोला कहा जाता है। गुरुवार को यह पर्व मनाया गया। जिसमें घरों में मीठे खुरमा और बेसन की बतियां बनाकर मिट्टी के घोड़े-बैल को पटा पर बिठाया जाता है। इनके साथ लकड़ी के घोड़ों को भी रखा जाता है और रात को पूजा की गई। बाजार में इनकी दुकानें लगी रही। इनमें मिट्टी के साथ पीओपी से बने रंग बिरंगे बैल घोड़े बेचे जा रहे थे। बीस रुपए जोड़ से लेकर पचास रुपए प्रति जोड़ तक कीमत के बैल घोड़े बिक रहे थे।

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