फर्जी हाजरी लगाने से किया मना तो निकाल दिया काम से
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । जहां सरकार के द्वारा महिलाओ को लेकर तरह- तरह के वादे किए जाते है वही एक मामला जनपद ढीमरखेड़ा के ग्राम पंचायत सनकुई से कुछ और निकल के आ रहा हैं। सरपंच पति कढोरी पटैल की तानाशाही कुछ और बयां कर रही हैं। सूत्रों के द्वारा बताया गया कि कढोरी पटैल का रवैया महिलाओ से बात करने का अच्छा नहीं हैं अभद्रता पूर्वक व्यवहार किया जाता है।अगर महिलाओ को कोई काम करवाने पंचायत जाना पड़ा तो सरपंच पति कढोरी पटैल के द्वारा कहां जाता है कि कुर्सी अंदर रख दो मेरी पंचायत में महिलाओ को कुर्सी बैठने को नहीं दी जाती अब सोचा जा सकता हैं कि जब इनकी पत्नी सरपंच हैं तो ये पंचायत में रौब झाड़ते हुए नजर क्यूं आ रहे हैं। जहां सरकार महिलाओं को हर क्षेत्र में अव्वल करना चाहती हैं वही पंचायत में सरपंच पति का रवैया सबको आश्चर्य में डाल दिया है। जो कि चुनावी नियमानुसार अगर पत्नी सरपंच है तो सारे कार्य पत्नी ही करेगी पति को पद से संबंधित कोई भी कार्य करने की जिम्मेदारी नहीं होगी। लेकिन नियमों को धत्ता बताते हुए सनकुई में सरपंच माया बाई लोधी की जगह पर उनके पति कढोरी पटैल पंचायत के कार्यो में बहुत हावी दिखाई दे रहे हैं।
ईमानदारी के कारण सरपंच पति ने निकाला काम से
महिला मेट सुनीता विश्वकर्मा के द्वारा बताया गया कि मेरी ईमानदारी के कारण मेरे जीवनयापन का रोजगार बलिदान चढ़ गया। सुनीता विश्वकर्मा को सभी कार्यों में दक्षता पूर्वक कार्य करने के कारण प्रशस्ति पत्र जिला पंचायत से दिया गया था। कई बार जिला से भी सम्मानित हो चुकी है। ऐसे अव्वल लोगों को कार्य से निकालने का मतलब हैं सरपंच पति की मनमानी या फिर ये कहे कि सुनीता विश्वकर्मा के रहते हुए इनको भ्रष्टाचार करने को नहीं मिल रहा था जो कि काम से निकालने के बाद सरपंच पति कढोरी पटैल के द्वारा जमकर भ्रष्टाचार किया जाएगा।
*बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ योजना की शुरुआत 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत में की थी। बेटी को पढाया तो जा सकता हैं पर जब रोजगार की बात आती हैं तो सरपंच पति कढोरी पटैल जैसे लोगों की बलि सुनीता विश्वकर्मा की चढ़ाई जाती है। महिलाओं को पुरुषों के बराबर दर्जा देने की बात सरकार के द्वारा की जाने वाली बाते सतह पर फीकी समझ में आ रही हैं, इसलिए पंचायतों में दलालों एवं बिचौलियों की तानाशाही चरम पर है।
मनरेगा में घोटालेबाजी की जड़ें मजबूत
मनरेगा में घोटालेबाजी की जड़ें इतनी मजबूत हो गई हैं कि किसी भी ग्रामीण में इतनी हिम्मत नहीं कि वह इसका विरोध कर सके। मनरेगा लोगों को रोजगार से जोड़ने की योजना है, चूँकि लोगों के लिए रोजगार तैयार करना है, इसीलिए पंचायत में तरह- तरह के कार्य किये जाते हैं। लेकिन लोगों ने रोजगार मुहैया कराने वाली योजना को अपने तरीके पर ढाल लिया है। स्थल पर योजना का प्राथमिक मकसद रोजगार देने के बजाय पैसों का गबन करना बन गया है। इसलिए जॉब कार्ड बनने के बावजूद लोगों को पता नहीं कि उनके खाते में कौन सा पैसा आता है, जो कि सचिव की मिलीभगत से निकाल लिया जाता है। अब देखना यह है कि भोली भाली जनता यूँ ही घोटालेबाजों की चक्की में पिसती रहेगी या फिर अधिकारी ग्राम पंचायत सनकुई के मनरेगा के वास्तविक उद्देश्य को जमीन पर उतारेंगे।



