बारना बाँध का उपयोग करेगी सरकार पेयजल में, किसानों को अभी से चिंता सताने लगी
दो ठेकेदार को दिए 1300 सो करोड़ अधिक के ठेके।
अल्पवर्षा के चलते सूख जाता हैं जलाशय।
कंठ गीले होगें तो खेत सूखे नजर आयेंगे।
रिपोर्टर : विनोद साहू
बाड़ी । सत्तर के दशक में तत्कालीन केन्द्रीय सरकार और राज्य सरकार ने देश में हरित क्रांति के लिए किसानों को पानी की व्यवस्था करने के लिए विंध्याचल पर्वत पर देश के प्रसिद्ध इंजीनियर एम विश्वेश्वरैया की देखरेख में 1975 को बनकर तैयार हुआँ और हर साल राज्य सरकार क्षेत्र किसानों की उन्नति के लिए सिंचाई का रकवा बढ़ा रही हैं इसके लिए नहरों का उन्नयन करण के तहत सभी नहरों सब माइनरों का सीसी करण किया गया नतीजतन आज क्षैत्र में लगभग अस्सी हजार हेक्टेयर से अधिक में रवि व खरीफ की फसलों को बारना बाँध के पानी से पल्लवित कर किसानों के लिए बरदान साबित हुआँ।
तीन फसलों से खुशहाल हुआँ क्षेत्र।
बारना बाँध बनने से पूर्व क्षेत्र में किसान उतनी ही किसानी हल बैल से करता था जितने में उसके परिवार का गुजारा हो पाता था , लेकिन बारना बाँध बनने के बाद आज क्षेत्र का किसान तीन फसलें ले रहा जिससे उसका जीवन स्तर तो सुधरा ही साथ ही में आज क्षेत्र की बासमती धान को जीआई टेंग मिल सका ।
यह क्षेत्र के लोगों के कंठ होगें गीले।
मध्यप्रदेश सरकार ने रायसेन जिले के औबेदुल्लागंज, सिलवानी, बेगमगंज क्षेत्र में लिप्ट ऐरिकेशन के जरिए इन क्षेत्रों सहित ग्रामीण इलाकों में पेयजल पहुँचाने की कबायत की कागजी कार्यवाही पूर्ण होकर ठेका भी हो चुका ..इसकी लागत लगभग तेरहसों करोड़ बताई गई हैं । जैसे ही इस योजना की जानकारी किसानों को उनके माथे पर भविष्य में आनेवाले खतरें की चिंताएं उभर आई । क्योंकि वर्तमान समय में महँगाई आसमान छू रही और बिजली के बिल बिजली आने से पहले ही करंट मारते हैं ऐसे में अगर यह योजना को मूर्तरूप दिया गया तो यकीनन लोगों के कंठ गीले हो या न हो लेकिन किसान के खेत सूखे नजर जरूर आयेंगे।
बारना बाँध की भराव क्षमता हुई कम ।
बारना बाँध बने हुए आज छयालीस साल हो चुके इस बीच सरकार ने बारना बाँध को जीवित रखने के लिए हजारों करोड़ खर्च कर चुकी लेकिन जल भराव क्षेत्र इस लंबे वक्त में डेम का जलस्तर फैलाव दिखाई देता हैं लेकिन पुरने से जल स्तर जरा में फुल और जरा में खाली हो जाता हैं ।
जलावर्धन योजना में भी ग्रीष्मकाल में हो जाता संकट।
बाड़ी शहर में जलावर्धन योजना के तहत शटल डेम पर इंटकवेल बनाकर शहर को पेयजल आपूर्ति के लिए सरकार ने तेरह करोड़ से अधिक राशि बरबाद करने के बाद भी ग्रीष्मकाल में जहाँ पानी की आवश्यकता होती हैं बहाँ पेयजल की नगर परिषद आपूर्ति नहीं कर पाती, ऐसे में यह जिले भर में पेयजल आपूर्ति पहुँचाना समझ से परे हैं ।
योजना नहीं रुकी तो होगा आंदोलन ।
इस बिकराल अघोषित महामारी अगर सरकार ने लागू की तो क्षेत्र के किसान क्रमबद्ध तरीके से आदोंलन करने को बाध्य होगें।




