धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 29 अगस्त 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 29 अगस्त 2025
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌧️ मास – भाद्रपद मास
🌒 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शुक्रवार भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष षष्ठी तिथि 08:22 PM तक उपरांत सप्तमी
🖍️ तिथी स्वामी – षष्ठी के देता हैं कार्तिकेय। इस तिथि में कार्तिकेय की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र स्वाति 11:38 AM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी – स्वाति नक्षत्र का स्वामी ग्रह राहु है। स्वाति नक्षत्र के देवता वायु देव (पवन के देवता) हैं, जिन्हें हवा और गति का प्रतीक माना जाता है।
⚜️ योग – ब्रह्म योग 02:12 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग
प्रथम करण : कौलव – 07:08 ए एम तक
द्वितीय करण : तैतिल – 08:21 पी एम तक गर
🔥 गुलिक काल : – शुक्रवार को शुभ गुलिक प्रात: 7:30 से 9:00 तक ।
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दही में चीनी या मिश्री डालकर उसे खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -दिन – 11:13 से 12:35 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय प्रातः : 05:58.00 ए एम
🌅 सूर्यास्त शाम : 06:46.00 पी एम
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:28 ए एम से 05:13 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:51 ए एम से 05:58 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:47 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:21 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:46 पी एम से 07:08 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:46 पी एम से 07:53 पी एम
💧 अमृत काल : 04:44 ए एम, अगस्त 30 से 06:31 ए एम, अगस्त 30
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:44 ए एम, अगस्त 30
❄️ रवि योग : 05:58 ए एम से 11:38 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में मखाने की खीर चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ श्रीबलदेव छठ/सूर्यषष्ठी/ सोमनाथ व्रत (उड़ीसा)/ महान खिलाड़ी मेजर ध्यानचंद जयन्ती/ राष्ट्रीय खेल दिवस, जजमेंट डे, राष्ट्रीय चॉप सुई दिवस, भारतीय वैज्ञानिक के. राधाकृष्णन जन्म दिवस, भारतीय लोकदल पार्टी स्थापना दिवस, कर्नाटक के भूतपूर्व मुख्यमंत्री रामकृष्‍ण हेगड़े जन्म दिवस, हरियाणा के भूतपूर्व मुख्यमंत्री बनारसी दास गुप्ता स्मृति दिवस, भारतीय स्वतंत्रता सेनानी माधव श्रीहरि अने जयन्ती, तेलुगू भाषा दिवस, परमाणु परीक्षण विरोधी अंतरराष्ट्रीय दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – षष्ठी तिथि को तैल कर्म अर्थात शरीर में तेल मालिश करना या करवाना एवं सप्तमी तिथि को आँवला खाना तथा दान करना भी वर्ज्य बताया गया है। इस षष्ठी तिथि के स्वामी भगवान शिव के पुत्र स्वामी कार्तिकेय जी को बताया गया हैं। यह षष्ठी तिथि नन्दा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह षष्ठी तिथि शुक्ल एवं कृष्ण दोनों पक्षों में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस तिथि में स्वामी कार्तिकेय जी के पूजन से सभी कामनाओं की पूर्ति होती है। विशेषकर वीरता, सम्पन्नता, शक्ति, यश और प्रतिष्ठा कि अकल्पनीय वृद्धि होती है।
🗼 Vastu tips 🏜️
घर में कूड़ा-करकट जमा करना आपका घर जितना अव्यवस्थित और कूड़ा-करकट से भरा होगा उतना ही राहु के प्रतिकूल प्रभावों का सामना आपको करना पड़ सकता है। इसलिए गलती से भी आपको कभी घर में कूड़ा-करकट जमा करके नहीं रखना चाहिए। खासकर पूजा-स्थल, किचन और सोने के कमरे में गंदगी जमा करने से आपको बचना चाहिए।
घर के अंदर कांटेदार पौधे आपके घर के अंदर कभी भी कांटेदार पौधे नहीं रखने चाहिए। इसके कारण भी राहु का प्रभाव बढ़ने लगता है। ऐसा करने से घर के लोगों पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ता है और करियर के क्षेत्र में भी आपको परेशानियां आ सकती हैं। कांटेदार पौधे अगर रखने ही हैं तो आपको घर से बाहर किसी खुली जगह पर इन्हें रख सकते हैं, लेकिन घर के अंदर इन्हें कभी भी नहीं रखना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
किसी के शरीर में खून की कमी है तो क्या करना चाहिए खून की कमी को पूरा करने के लिए दालें जैसे मूंग, तूर, राजमा, चना, उड़द आदि को भई अपनी डाइट में शामिल करना चाहिए। इनमें अच्छी मात्रा में प्रोटीन पाया जाता है, जो आयरन को एब्जॉर्ब करने में मदद करता है और दिनभर एनर्जी बनाए रखता है।
ड्राई फ्रूट्स जैसे किशमिश, खजूर, बादाम, अखरोट, पिस्ता, कद्दू के बीज, सूरजमुखी के बीज और अंजीर आयरन व मैग्नीशियम के अच्छे सोर्स होते हैं। इसके सेवन से खून की कमी को दूर किया जा सकता है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
कफ में है मददगार: कफ और कंजेशन में अमरूद को भूनकर खाना, कुछ सबसे पुराने नुस्खों में से एक है। ये कफ को पिघलाने और कंजेशन को कम करने में मददगार है। इसके अलावा जिन लोगों एसनोफिल्स बढ़ जाते हैं उनके लिए भी अमरूद खाना फायदेमंद है। ये इस समस्या को तेजी से कम करने में मददगार है।
ब्लोटिंग में फायदेमंद: ब्लोटिंग की समस्या, महिलाओं और छोटे बच्चों को सबसे ज्यादा परेशान करती है। ऐसे में अमरूद को भूनकर खाना आपके पेट के लिए कई प्रकार से फायदेमंद हो सकता है। दरअसल, इससे निकलने वाला अर्क पेट में एसिडिक पीएच को कम कर देता है जिससे ब्लोटिंग की समस्या कम हो जाती है। साथ ही इससे बच्चों में पेट फूलने के साथ होने वाला दर्द भी कम होने लगता है।
सर्दी-जुकाम से होगा बचाव- अमरूद को भूनकर खाने से सर्दी-जुकाम की समस्या नहीं होती है। दरअसल, पुराने समय में ये माना जाता था कि भूने हुए अमरूद को खाने से शरीर में संक्रामक बीमारी से छुटकारा मिलता है।
📚 गुरु भक्ति योग_ 🕯️
लंकापति रावण के वध के बाद जब अयोध्यापति प्रभु श्री राम की कीर्ति दूर-दूर तक फैल गयी थी..तब एक दिन महादेव शिव जी की इच्छा भी मर्यादा पुरूषोतम प्रभु श्रीराम से मिलने की हुई..पार्वती जी को संग लेकर महादेव जी कैलाश पर्वत से उतर कर अयोध्या नगरी के रास्ते पर चल पड़े….
भगवान शिव और मां पार्वती को अयोध्या आया देखकर श्री सीताराम जी बहुत खुश हुए..माता जानकी ने उनका उचित आदर सत्कार किया और स्वयं भोजन बनाने के लिए रसोई में चली गई इस बीच भगवान शिव ने श्री राम जी से पूछाः-“आपके सेवक हनुमानजी दिखाई नहीं पड़ रहे हैं।”
श्री राम बोलेः- “वे बगीचे में हैं।” शिवजी ने श्रीराम जी से बगीचे में जाने की अनुमति मांगी और पार्वती जी का हाथ थाम कर बगीचे में आ गए।बगीचे की खूबसूरती देख कर उनका मन मोहित हो गया।आम के एक घने वृक्ष के नीचे हनुमान जी दीन-दुनियां से बेखबर गहरी नींद में सोए थे और एक लय में खर्राटों से राम नाम की ध्वनि उठ रही थी…..
चकित होकर शिव जी और माता पार्वती एक दूसरे की ओर देखने लगे।माता पार्वती मुस्करा उठी और वृक्ष की डालियों की ओर इशारा किया।राम नाम सुनकर पेड़ की डालियां भी झूमने लगी थी और इनके बीच से भी राम नाम उच्चारित हो रहा था……
शिव जी इस राम नाम की धुन में मस्त मगन होकर खुद भी राम राम कहकर नाचने लगे।माता पार्वती जी ने भी अपने पति का अनुसरण किया और अपने कोमल पांव थिरकाने लगी।शिव जी और पार्वती जी के नृत्य से ऐसी झनकार उठी कि स्वर्गलोक के देवतागण भी आकर्षित होकर बगीचे में आ गए और राम नाम की धुन में सभी मस्त हो गए……
माता जानकी भोजन तैयार करके प्रतिक्षारत थीं परंतु संध्या घिरने तक भी अतिथि नहीं पधारे तब अपने देवर लक्ष्मण जी को बगीचे में भेजा। लक्ष्मण जी तो स्वयं को श्री राम का सेवक ही मानते थे,अतः बगीचे में आकर जब उन्होंने धरती पर स्वर्ग का नजारा देखा तो खुद भी राम नाम की धुन में झुम उठे…..
महल में माता जानकी परेशान हो रही थी की अभी तक भोजन ग्रहण करने कोई भी क्यों नहीं आया। उन्होंने श्री राम जी से कहा भोजन ठंडा हो रहा है चलिये हम ही जाकर बगीचे में से सभी को ले लाएं…
जब सीताराम जी बगीचे में गए तो वहां राम नाम की धूम मची हुई थी। हुनमान जी गहरी नींद में सोए हुए थे और उनके खर्राटों से अभी तक राम नाम निकल रहा था।……
श्रीसियाराम भाव विहल हो उठे,राम जी ने हनुमान जी को नींद से जगाया और प्रेम से उनकी तरफ निहारने लगे….हनुमान जी प्रभु को आया देख शीघ्रता से उठ खड़े हुए,नृत्य का समा भंग हो गया।शिव जी खुले कंठ से हनुमान जी की राम भक्ति की सराहना करने लगे।हनुमान जी संकुचाए लेकिन मन ही मन खुश हो रहे थे।श्री सियाराम ने भोजन करने का आग्रह भगवान शिव जी से किया।………सभी लोग महल में भोजन करने के लिए चल पड़े माता जानकी भोजन परोसने लगी। हनुमान जी को भी श्री राम जी ने पंक्ति में बैठने का आदेश दिया। हनुमान जी बैठ तो गए पंरतु आदत ऐसी थी की राम जी के भोजन करने के उपरांत ही सभी लोग भोजन करते थे…..
आज श्री राम जी के आदेश से पहले भोजन करना पड़ रहा था माता जानकी हनुमान जी को भोजन परोसती जा रही थी पर हनुमान जी का पेट ही नहीं भर रहा था।सीता जी कुछ समय तक तो उन्हें भोजन परोसती रही फिर समझ गई इस तरह से तो हनुमान जी का पेट नहीं भरेगा……
उन्होंने तुलसी के एक पत्ते पर राम नाम लिखा और भोजन के साथ हनुमान जी को परोस दिया।तुलसी पत्र खाते ही हनुमान जी को संतुष्टी मिली और वह भोजन खा कर उठ खड़े हुए……
भगवान शिव ने प्रसन्न होकर हनुमान जी को आशीर्वाद दिया कि आप की राम भक्ति युगों-युगों तक याद की जाएगी और आप संकट मोचन कहलाएंगे……. कलयुग में जो भी व्यक्ति तुम्हारी सच्चे मन से भक्ति करेगा वह सभी संकटों से मुक्त हो जाएगा……
संकट हरै मिटै सब पीरा,जो सुमिरै हनुमत बलबीरा…..👏🏻👏🏻🚩🚩🕉️🕉️
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⚜️ षष्ठी तिथि आपके उपर यदि मंगल कि दशा चल रही हो और आप किसी प्रकार के मुकदमे में फंस गये हों तो षष्ठी तिथि को भगवान कार्तिकेय स्वामी का पूजन करें। मुकदमे में अथवा राजकार्य से सम्बन्धित किसी भी कार्य में सफलता प्राप्ति के लिये षष्ठी तिथि को सायंकाल के समय में किसी भी शिवमन्दिर में षण्मुख के नाम से छः दीप दान करें। कहा जाता है, कि स्वामी कार्तिकेय को एक नीला रेशमी धागा चढ़ाकर उसे अपने भुजा पर बाँधने से शत्रु परास्त हो जाते हैं। साथ ही सर्वत्र विजय कि प्राप्ति होती है।।

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