मझौली बीएमओ डॉ पारस ठाकुर अपने अधीनस्थ कर्मचारियों को लामबंद कर अपने पद का किया दुरुपयोग
रिपोर्टर : ओमप्रकाश साहू
मझौली।डॉ पारस ट्रूकॉलर ने तीन साल में लगभग 30 लाख रुपए मिशन के फंड से गबन किया है।
चंद्रा के खिलाफ बुराकाकर से झूठ करके भोपाल भिजवाई
मिशन ऑपरेटर ने भी डाॅ पारस ठाकुर का साथ देते हुए बिना सच्चाई के जांच किए दंड संदर्भ अमिता का आरोप मझौली से तेदूखेड़ा दमोह कर दिया ताकि लोकायुक्त जांच को प्रभावित किया जा सके।
अवैध तरीके से किए गए वोटिंग आर्डर को सर्वोच्च न्यायालय जबलपुर चुनौती दे दी गई।
याचिकाकर्ता के वकील अरविंद श्रीवास्तव ने कोर्ट को बताया कि वोटिंग आर्डर दुर्भावना का नियम से किया गया है और लेखा न्याय के विपरीत है इसलिए स्टेंड आर्डर दिया गया।
कोर्ट ने याचिकाओं को सही मानते हुए स्टे आर्डर जारी कर दिया।
लोकायुक्त में 30 लाख रुपए के गबन की शिकायत की तो शिकायतकर्ता का दुर्भावना की नीयत से मिशन ऑपरेटर ने वोट दिया।
उच्च न्यायालय ने दिया स्टे और नोटिस WP No.4018/23 दिनांक 22 फरवरी 22 को रद्द करें उच्चतम न्यायालय के न्याय संजय द्विवेदी की अदालत ने अमित चंद्रा, ब्लाक कार्यक्रम प्रबंधक मझौली की याचिका मे स्टेट अर्डरेयरिंग नेशनल हेल्थ म मिशन प्र के मिशन कार्यकर्ता सहित 7 रिस्पाडेंट्स नोटिस जारी होंगे। इसमें डाॅ पारस कर्मी बीमी मझौली को व्यक्तिगत रूप से पार्टी बनाया गया है।
ज्ञातव्य हो कि सितंबर 2021 मे अमित चंद्रा ब्लॉक प्रोग्राम मैनेजर 12 साल की नौकरी करने के बाद नरसिंहपुर सालीचौका से तय करें मझौली समुदाय स्वास्थ्य केंद्र मे आए थे। अक्टूबर महीने में उनके पास चौरसिया ट्रेवल सिहोरा का 25 हजार का बिल भुगतान करने के लिए पोर्टल पर रिकमंड करने आया
चंद्रा ने पाया कि महीने भर से कोई गाड़ी बीमी के लिए नहीं आई तो बिल कैसे आया बिल मे गाडी नंबर भी नहीं था। चौरसिया ट्रेवल कांट्रेक्ट भी नहीं है। इनक्वायरी करने पर पता चला कि अप्रैल 2019 से ऐसा ही पे डॉ पारस ठाकुर द्वारा बहिष्कार किया जा रहा है। क्योंकि बिल फर्जी ने चंद्रा ने उसे रिजेक्ट कर दिया था।
इसके बाद कुछ लोगों ने उन्हें परेशान किया और उनकी फाइल रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को परेशान करने लगी ताकि बीपीएम को मझौली से हटा दिया जाए। मार्च 2022 मे फिर दो लाख रुपये के फर्जी बिल डॉक्टर पारस ठाकुर ने पोर्टल पर अपलोड करें। चंद्रा के द्वारा उन बिलों को भी नाट रिकमंड कर दिया जिसके बदले मे डॉ पारस ठाकुर ने अपने मार्च का अधिकार अजीबोगरीब रोक दिया
अमित की अत्यधिक रिपोर्ट में जाने पर चंद्रा ने फंड के खर्च की खोजबीन की तो पता चला कि डॉ पारस ठाकुर ने तीन साल में लगभग 30 लाख रुपये के मिशन के फंड से गबन किया है।
चंद्रा ने गबन की शिकायत मिशन डायरेक्टर और लोकायुक्त भोपाल को कर दी। मिशन संचालक के अधिकारी ने शिकायत को दबा दिया लेकिन लोकायुक्त भोपाल ने डॉ पारस ठाकुर के खिलाफ प्रकरण पंजीकृत कर स्वास्थ्य विभाग को जांच करने के निर्देश दिए।
सीएम ऑफिस को मामले को एक महीने से भी अधिक दबा दिया गया और डॉ पारस को जानकारी लीक कर दी गई।



