आज का पंचाग गुरुवार 08 सितम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 08 सितम्बर 2022
मंगल श्री विष्णु मंत्र
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
🔱 08 सितम्बर 2022 दिन गुरुवार को प्रदोष व्रत है। आज पौराणिकअगस्त्योदय भी है। आज दक्षिण भारत में थिरु ओनमदिन का महान पर्व मनाया जाता है। आप सभी सनातनियों को प्रदोष व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति) गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए । गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – भाद्रपद माह
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथिः- त्रयोदशी तिथि 21:03:00 तक तदोपरान्त चतुर्दशी तिथि
✏️ तिथि स्वामीः- त्रयोदशी तिथि के स्वामी कामदेव हैं तथा चतुर्दशी तिथि के स्वामी भगवान शिव जी हैं।
💫 नक्षत्रः- श्रवण नक्षत्र 13:46:00 तक तदोपरान्त घनिष्ठा नक्षत्र
🪐 नक्षत्र स्वामीः- श्रवण नक्षत्र के स्वामी चन्द्र देव हैं तथा घनिष्ठा नक्षत्र के स्वामी मंगल देव हैं।
🔊 योगः- व्यतिपात 15:41:12 तक तदोपरान्त सुकर्म
⚡ प्रथम करण : कौलव – 10:33 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : तैतिल – 09:02 पी एम तक गर
🔥 गुलिक कालः- शुभ गुलिक काल 10:44:00 A.M से 12:19:00 P.M तक
⚜️ दिशाशूलः- गुरूवार को दक्षिण दिशा में यात्रा नहीं करनी चाहिए। यदि ज्यादा आवश्यक हो तो घर से सरसों के दाने या जीरा खाकर निकलें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 12:19:00 से 01:53:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 05:36:46
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:02:19
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:31 ए एम से 05:17 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:54 ए एम से 06:02 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:54 ए एम से 12:44 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:24 पी एम से 03:14 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:22 पी एम से 06:46 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:35 पी एम से 07:44 पी एम
💧 अमृत काल : 02:08 ए एम, सितम्बर 09 से 03:35 ए एम, सितम्बर 09
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:56 पी एम से 12:42 ए एम, सितम्बर 09
❄️ रवि योग : 01:46 पी एम से 06:03 ए एम, सितम्बर 09
🌧️ श्रवण नक्षत्र – आज दोपहर 1 बजकर 46 मिनट तक
⛄ आज रात 12 बजकर 31 मिनट से पंचक शुरू
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-शिवजी का हरिद्रामिश्रित जल से अभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – प्रदोष व्रत, गो त्रिरात्र व्रतारम्भ, दुग्ध व्रत, रत्नत्रय व्रतारम्भ जैन, गुरु श्री रामदास जी गुरयाई दिवस, ओणमोत्सव केरल, स्वामी शिवानंद सरस्वती जी जयन्ती, विश्व साक्षरता दिवस, विश्व भौतिक चिकित्सा दिवस, पंचक प्रारम्भ
✍🏽 विशेष:- त्रयोदशी तिथि को बैंगन त्याज्य होता है। अर्थात आज त्रयोदशी तिथि में भूलकर भी बैंगन की सब्जी या भर्ता नहीं खाना चाहिए। त्रयोदशी तिथि जयकारी अर्थात विजय दिलवाने वाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों क्षेत्रों में सिद्धियों को देनेवाली तिथि मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह त्रयोदशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ और कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी होती है।
🌷 Vastu tips 🌸
वास्तु और शास्त्र के अनुसार हर दिन तुलसी के पौधे की पूजा करना व उसमें रोजाना जल चढ़ाना बेहद ही शुभ होता है पर कुछ ऐसे दिन होते हैं जिनमें तुलसी के पौधे को पानी अर्पित करना शुभ नहीं माना जाता है इस दिन तुलसी के पौधे को जल चढ़ाने से धन हानि की समस्या होती है और घर में नकारात्मकता का भी वास बना रहता है जिससे परिवार के लोगों पर इसका बुरा असर होता है। ज्योतिष अनुसार रविवार के दिन तुलसी के पौधे में जल नहीं अर्पित करना चाहिए और न ही इसकी पत्तियों को तोड़ना चाहिए इससे शुभ नहीं माना जाता है।
तुलसी के पौधे में अधिक जल चढ़ाने की बजाए उचित मात्रा मे जल चढ़ाना चाहिए आपको बता दें कि एकादशी, सूर्य ग्रहण और चंद्र ग्रहण के समय कभी भी तुलसी पर जल नहीं अर्पित करना चाहिए और न ही इसकी पत्तियों को तोड़ना चाहिए इसे अच्छा नहीं माना जाता है। तुलसी की शुभता पाने के लिए इस पौधे को हमेशा ही घर की उत्तर या उत्तर पूर्व दिशा में ही लगाना चाहिए इसे कभी भी पूर्व दिशा में नहीं लगाना चाहिए ऐसा करने से धन से जुड़ी कई परेशानियों का घर के लोगों को सामना करना पड़ता है।
👀 जीवनोपयोगी कुंजियां 🫂
👉🏼 आकर्षण शंक्ति कैसे बढाएं
अगर पति या प्रेमी का अपनी पत्नी या प्रेमिका के प्रति प्यार कम हो गया हो तो स्त्री भगवान श्री कृष्ण का स्मरण कर अपने प्रेम सम्बन्ध की प्रगाड़ता की प्रार्थना करते हुए तीन इलायची अपने बदन से स्पर्श करती हुई शुक्रवार के दिन छुपा कर रखें।
जैसे अगर साड़ी पहनतीं हैं तो अपने पल्लू में बांध कर या इसे रूमाल में बांध कर रखे, शनिवार की सुबह वह इलायची पीस कर किसी भी व्यंजन में मिलाकर पति या प्रेमी को खिला दें। अति शीघ्र संबंधों में पुन: प्रगाड़ता आ जाएगी।यह क्रिया पाँच शुक्रवार तक अवश्य करें ।
कही भी जाते समय मोर की कलगी पीले रेशमी वस्त्र में बाँधकर अपने साथ रख लें. इससे आकर्षण शक्ति, बढ़ती है।
श्वेत अपामार्ग की जड़ को घिसकर माथे पर तिलक लगायें. इससे व्यक्ति की आतंरिक प्रभाव, आकर्षण शक्ति, शक्ति में निरन्तर वृद्धि होती है|
एक केले में गोरोचन मिलाकर लेप बनाएं। इस लेप को रात के वक्त सिर पर लगाएं। ऐसा करने से व्यक्ति में आकर्षण शक्ति,आ जाती है।
नारियल, धतूरे के बीज, कपूर को पीस लें। इसमें शहद मिलाएं। नियमित इसका तिलक करने से जिसे आप प्यार करते हैं वह आपको कभी छोड़कर नहीं जाएगा।
केसर, सिंदूर और गोरोचन को आवंले के साथ पीसकर तिलक लगाने से आपका प्यार कभी भी आपका अनदेखा नहीं कर सकता है।
🧉 आरोग्य संजीवनी_ 🫘
सहजन की सब्जी खाने से गुर्दे की पथरी टूटकर बाहर निकल जाती है। आम के पत्ते छांव में सुखाकर बहुत बारीक पीस लें और आठ ग्राम रोज पानी के साथ लीजिए, फायदा होगा।
पथरी की समस्या से निपटने के लिए केला जरूर खाना चाहिए क्योंकि इसमें विटामिन बी 6 होता है। विटामिन बी 6 ऑक्जेलेट क्रिस्टल को बनने से रोकता और तोड़ता भी है। विटामिन बी-6, विटामिन बी के अन्य विटामिन के साथ सेवन करना किडनी में स्टोन के इलाज में काफी मददगार माना जाता है ।
मिश्री, सौंफ, सूखा धनिया लेकर 50-50 ग्राम मात्रा में लेकर डेढ लीटर पानी में रात को भिगोकर रख दीजिए। अगली शाम को इनको पानी से छानकर पीस लीजिए और फिर पानी में मिलाकर इसका घोल बना लीजिए, इस घोल को पीजिए।ऐसा नियमित रूप से करें शीघ्र ही पथरी निकल जाएगी।
चाय, कॉफी व अन्य पेय पदार्थ जिसमें कैफीन पाया जाता है, उन पेय पदार्थों का सेवन बिलकुल मत कीजिए। हो सके कोल्ड्रिंक ज्यादा मात्रा में पीजिए।
शुद्ध तुलसी का रस लेने से भी पथरी को यूरीन के रास्ते निकलने में मदद मिलती है। कम से कम एक महीना तुलसी के पतों के रस के साथ शहद लेने से बहुत लाभ मिलता है। तुलसी के कुछ ताजे पत्तों को भी रोजाना चबाना चाहिए ।
जीरे को मिश्री की चासनी अथवा शहद के साथ लेने पर पथरी घुलकर पेशाब के साथ निकल जाती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
नवविधा भक्ति
श्रीमद भागवत में भक्ति का ९ रूपों में वर्णन किया गया है। (श्रीमद भागवत – ७.५.२३)
श्रवणं – भगवन के नाम और महिमा सुनना।
कीर्तनं – भगवान के स्तुतियों का गायन।
स्मरणं – भगवान को याद करना।
पाद सेवनं – भगवान के कमल रूपी पैरों की सेवा करना।
अर्चनं – भगवान की पूजा करना।
वन्दनं – भगवान की प्राथना करना
दास्यं – भगवान स्वामी मानना और उनकी सेवा दास भाव से करना।
सख्यं – मित्र भाव से भगवान की सेवा करना।
आत्म निवेदनं – भगवान को पूरा समर्पित होना।
भक्ति – समर्पण, श्रद्धा का पथ।
एक भक्त ही भय व चिंता से सम्पूर्ण मुक्ति महसूस कर सकता है। एक भक्त ही भौतिक जगत के दुःखों व मुश्किलों से परे जा सकता है।
एक सच्चे भक्त की अपनी कोई व्यक्तिगत इच्छा नहीं होती है, मोक्ष प्राप्त करने की भी नहीं। एक भक्त के हृदय में भक्ति की ज्योत उसपर गुरु कृपा से, सत्संग व अन्य भक्तों की संगति के कारण और भक्तों और साधकों की बातें, किस्से श्रवण करने से सदैव प्रज्वलित रहती है।
जब नदिया का सागर से मिलन होता है, तब नदी को यह पता चलता है की वो चिरकाल से सागर ही थी ! इसी प्रकार जिस क्षण एक भक्त श्रद्धा भाव से ईश्वर के प्रति समर्पित हो जाता है, वोह तत्क्षण ईश्वर हो जाता है।
श्री श्री आचार्य गोपी राम
★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●
⚜️ त्रयोदशी तिथि के देवता मदन (कामदेव) हैं। शास्त्रानुसार भगवान कृष्ण और रुक्मिणी के पुत्र हैं भगवान कामदेव। कामदेव प्रेम और आकर्षण के देवता माने जाते हैं। जिन पुरुषों अथवा स्त्रियों में काम जागृत नहीं होता अथवा अपने जीवन साथी के प्रति आकर्षण कम हो गया है, उन्हें आज के दिन भगवान कामदेव का उनकी पत्नी रति के साथ पूजन करके उनके मन्त्र का जप करना चाहिये। कामदेव का मन्त्र – ॐ रतिप्रियायै नम:। अथवा – ॐ कामदेवाय विद्महे रतिप्रियायै धीमहि। तन्नो अनंग: प्रचोदयात्।
आज की त्रयोदशी तिथि में सपत्निक कामदेव की मिट्टी कि प्रतिमा बनाकर सायंकाल में पूजा करने के बाद उपरोक्त मन्त्र का जप आपका वर्षों का खोया हुआ प्रेम वापस दिला सकता है। आपके चेहरे की खोयी हुई कान्ति अथवा आपका आकर्षण आपको पुनः प्राप्त हो सकता है इस उपाय से। जो युवक-युवती अपने प्रेम विवाह को सफल बनाना चाहते हैं उन्हें इस उपाय को करना चाहिये। जिन दम्पत्तियों में सदैव झगडा होते रहता है उन्हें अवश्य आज इस उपाय को करना चाहिये।
त्रयोदशी तिथि ज्योतिषशास्त्र में अत्यंत श्रेष्ठ माना गया है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति महापुरूष होता है। इस तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान होता है और अनेक विषयों की अच्छी जानकारी रखने वाला होता है। यह व्यक्ति काफी विद्वान होता है तथा अन्यों के प्रति दया भाव रखने वाला एवं किसी की भी भलाई करने हेतु सदैव तत्पर रहने वाला होता है । इस तिथि के जातक समाज में काफी प्रसिद्धि हासिल करते ही हैं।

