मध्यप्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव की अधिसूचना नवरात्रि में
सनातन संस्कृति में श्राद्ध पक्ष में नहीं होता शुभ कार्य
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
भोपाल । एक ओर जहां विपक्ष के इंडिया गठबंधन के कुछ सदस्य भले ही सनातन धर्म को खत्म करना चाहते हैं, वही दूसरी ओर आज भी देश में सनातन धर्म का प्रभाव बना हुआ है। सब जानते हैं कि सनातन संस्कृति से जुड़े हिन्दू पंचांग में इस वर्ष एक माह अधिक की गणना है, इसलिए तिथियों पर आधारित तीज-त्योहारों में गत वर्ष के मुकाबले विलंब है। गत वर्ष जो श्राद्ध पक्ष सितंबर माह में आरंभ हुआ था, वह इस बार 29 सितंबर से शुरू होकर 14 अक्टूबर तक चलेगा। इसके साथ ही 14 अक्टूबर से नवरात्र शुरू हो जाएंगे। सनातन संस्कृति में यह माना जाता है कि श्राद्ध पक्ष में कोई शुभ कार्य नहीं किया जाता है। श्राद्ध पक्ष के दौरान आम लोगों की धार्मिक भावनाओं का ख्याल करते हुए भाजपा ने राजस्थान में अपने उम्मीदवारों की सूची भी टाल दी है। अब भाजपा नवरात्र में उम्मीदवारों की सूची जारी करेगी। पांच राज्यों के चुनाव को लेकर चुनाव आयोग की प्रक्रिया को देखते हुए प्रतीत होता है कि आयोग भी अब श्राद्धपक्ष के बाद यानी नवरात्र से ही अधिसूचना जारी करेगा। आयोग अभी राजस्थान के चुनाव तैयारियों का जायजा ले रहा है। मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम का दौरा पहले हो चुका है। कहा जा सकता है कि चुनाव आयोग की तैयारियों की प्रक्रिया दस अक्टूबर तक चलेगी। 2018 में इन्हीं पांच राज्यों में 6 अक्टूबर को अधिसूचना जारी हुई थी, लेकिन इस बार कम से कम दस दिन का विलंब होगा। लेकिन इससे इन राज्यों में सरकार गठन पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। सिर्फ मिजोरम में मौजूदा सरकार का कार्यकाल 17 दिसंबर को समाप्त हो रहा है, जबकि छत्तीसगढ़ में 3 जनवरी, मध्य प्रदेश में 6 जनवरी, राजस्थान में 14 जनवरी तथा तेलंगाना में मौजूदा सरकार का कार्यकाल 16 जनवरी 2024 तक हैं। मध्यप्रदेश को छोड़ कर शेष चार राज्य में अभी गैर भाजपा की सरकार हैं। भाजपा ने हिन्दी भाषी राजस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में चुनाव जीतने के लिए पूरी ताकत लगा रखी है। गत बार के मुकाबले इस बार अधिसूचना के विलंब होने में कांग्रेस को ज्यादा फायदा है, क्योंकि उनके मुख्यमंत्री राजस्थान और छत्तीसगढ़ में ज्यादा दिनों तक घोषणाएं करते रहेंगे। मालूम हो कि आयोग की अधिसूचना जारी होते ही आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू हो जाती है। ऐसे में कोई मुख्यमंत्री नई घोषणा नहीं कर सकता है। मुख्यमंत्रियों को सरकारी खर्चे पर प्रचार भी बंद करना पड़ता है। भाजपा और कांग्रेस के लिए इन पांच राज्यों के विधानसभा बहुत महत्वपूर्ण है। क्योंकि इन चुनावों के बाद ही लोकसभा के चुनाव होने हैं। जिस दल को जितनी सफलता मिलेगी, वह उतने ही उत्साह के साथ लोकसभा का चुनाव लड़ेगा।



