मध्य प्रदेश

रायसेन जिले में सूदखोरों का मकड़जाल : कर्ज में दब लोग आत्मगत्या के लिए मजबूर, एटीएम-पासबुक जब्त कर लेते हैं सूदखोर

एसपी बोले- शिकायत पर करेंगे कार्रवाई
रिपोर्टर : शिवलाल यादव
रायसेन। रायसेन जिला मुख्यालय सहित गांवों में सूदखोर हावी है। कुछ वर्षों से कोरोना काल में बीमारी से जितना लोग परेशान थे। उससे ज्यादा सूदखोरों के जाल में लोग फंसने से लोगों को परेशानी हो रही हैं। शहर से लेकर देहात तक सूदखोरों का नेटवर्क फैला हुआ है। हाल यह है कि रायसेन शहर के आर्थिक स्थिति से तंग जरूरत मंद लोग कर्ज में गड़ते चले जा रहे हैं। घर गृहस्थी का सामान तक बेचने को मजबूर हैं। गांव के किसान फसल बेचकर कर्च चुका रहे है। लेकिन सूदखोरों का ब्याज खत्म नहीं हो रहा है।
रायसेन में सैकड़ों मामले थानों में दर्ज….
रायसेन शहर में इस तरह के एक नहीं कई मामले हैं। एक मामले में तो एक व्यक्ति को कर्ज देने वाले ने मानसिक रूप से इतना परेशान किया कि वह आत्महत्या करने को मजबूर हो गया। पुलिस के हस्तक्षेप के बाद मामला शांत हुआ। कई मामलों में पुलिस-प्रशासन के पास पीड़ितों ने सूदखोरों से बचाने की गुहार तक लगाई है। कई बार सूदखोरों के चंगुल में फंसकर लोग अपनी जान तक गंवा चुके हैं। हालांकि होशंगाबाद रायसेन पुलिस संभाग रेंज की तेज तर्रार आईजी दीपिका सूरी, डीआईजी जेएस राजपूत ने शासन के निर्देश पर युवा एसपी रायसेन विकाश कुमार शाहवाल एएसपी अमृत मीणा की मदद से जिलेभर में ब्याजखोरों के खिलाफ अभियान चलाया।इस वजह से कई सूदखोरों ने अपना कारोबार लपेटकर दूसरी जगह चले गए हैं।
5 से 10 प्रतिशत महीने का लेते हैं ब्याज….
पता चला है कि सूदखोर लोगों को पांच से दस प्रतिशत महीने ब्याज दर पर कर्ज देते हैं। इनमें ज्यादातर अवैध रूप से सूदखोरी का धंधा कर रहे हैं।उनके पास साहूकारी लायसेंस तक नहीं है। इनके चंगुल में फंसे कुछ लोग तो ऐसे हैं, जिन पर इस कदर ब्याज चढ़ गया है कि अब उसे चुकाना उनके लिए मुश्किल है।
अवैध तरीके से कर रहे ब्याज का धंधा….
जिले में दर्जनों लाइसेंसी साहूकार हैं, लेकिन अवैध रूप से यह धंधा करने वालों की संख्या सैकड़ों में है। जिनका सूदखोरी का धंधा बेरोकटोक चल रहा है। सूदखोरों के चंगुल में फंसने के बाद कम ही कर्जदार उनके जी जंजाल से बाहर आ पाते हैं।
सूदखोरों के पास रहती है पासबुक और एटीएम….
कर्जदारों से मिली जानकारी के अनुसार, सूदखोर जिनको ब्याज में पैसे देते हैं। उनके एटीएम और पासबुक अपने पास रख लेते हैं। एटीएम के पासवर्ड की जानकारी भी ले लेते हैं। कुछ सरकारी कर्मचारी जो इनके चंगुल में फंसे हैं। उनकी तनख्वाह भी सूदखोर ATM से भी निकाल लेते हैं। यदि सूदखोर पकड़ाते हैं तो सैकड़ों ATM और पासबुक इनके पास मिल सकती हैं।
दादागिरी से हथिया लेते हैं प्रॉपर्टी…
सूदखोर रकम और ब्याज की वसूली के नाम पर कर्जदार को जमकर लूटते हैं। कई बार तो ब्याज इतना ज्यादा हो जाता है कि कर्जदार का जेवर, मकान, प्लाट तक सूदखोर हथिया लेते हैं।नोटों और दौलत की खनक के आगे कोई उनका कुछ बिगाड़ नहीं पाता।
शिकायत करने से कतराते हैं लोग….
बेहद जरूरतमंद व्यक्ति ही सूदखोर से कर्ज लेता है। इसलिए उस पर कर्ज चुकाने का दबाव रहता है। कर्जदार तो पूरी रकम चुकाना चाहता है। लेकिन ब्याज की रकम ही इतनी ज्यादा होती है कि उसकी कमाई इसे चुकाने में ही चली जाती है। सिर पर कर्ज होने की वजह से वह पुलिस -प्रशासन से शिकायत करने का जोखिम उठाने में कतराता है।
पुराने लाइसेंस पर चला रहे काम…
प्राप्त जानकारी के मुताबिक रायसेन जिले में दर्जनों सूदखोर पंजीकृत हैं। पिछले दो साल से कई के नवीनीकरण नहीं हुए हैं। इसके बाद भी धड़ल्ले से मनमर्जी से ब्याज वसूल रहे हैं। ऐसे में यदि जिला प्रशासन और जिला पुलिस अधीक्षक विकाश कुमार शाहवाल का कहना है कि अवैध तरीके से ब्याज का काम करने वालों का पता लगाते हैं तो कई बड़े खुलासे हो सकते है। लोग इनके चंगुल से निकल सकते हैं।
एसपी फिर बोले- शिकायत मिलने पर करेंगे कार्रवाई….
इस मामले में जिला पुलिस अधीक्षक विकाश शाहवाल का कहना है कि यदि कोई सूदखोरों की शिकायत करता है तो जांच करके कार्रवाई की जाएगी। एसपी ने लोगों से अपील की है कि जिले का कोई भी व्यक्ति सूदखोरों से परेशान है तो उसकी शिकायत संबंधित थाने में करें या मुझसे शिकायत करें।

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