धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 08 अप्रैल 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 08 अप्रैल 2025
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126_

🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – उत्तरायण
☂️ ऋतु – सौर ग्रीष्म ऋतु
☀️ मास – चैत्र मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – मंगलवार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष एकादशी तिथि 09:13 PM तक उपरांत द्वादशी
📝 तिथि स्वामी – एकादशी के देवता हैं विश्वेदेवगणों और विष्णु। इस तिथि को विश्वेदेवों पूजा करने से संतान, धन-धान्य और भूमि आदि की प्राप्ति होती है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र आश्लेषा 07:55 AM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी – आश्लेषा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है। तथा आश्लेषा नक्षत्र से संबंधित देवता नाग हैं।
⚜️ योग – शूल योग 06:10 PM तक, उसके बाद गण्ड योग
प्रथम करण : वणिज – 08:32 ए एम तक
द्वितीय करण : विष्टि – 09:12 पी एम तक बव
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:48:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:12:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:32 ए एम से 05:18 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:55 ए एम से 06:03 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:58 ए एम से 12:48 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:20 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:42 पी एम से 07:04 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:43 पी एम से 07:51 पी एम
💧 अमृत काल : 06:13 ए एम से 07:55 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:00 पी एम से 12:45 ए एम, अप्रैल 09
सर्वार्थ सिद्धि योग : 06:03 ए एम से 07:55 ए एम
❄️ रवि योग : 06:03 ए एम से 07:55 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻 आज का उपाय- अपने विप्र को लाल वस्त्र एवं लाल फ़ल भेंट करें ।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थ सिद्धि योग/ भद्रा/ रवि योग/ कामदा एकादशी व्रत (सर्वे स्मार्त)/ अंतरराष्ट्रीय सौंदर्य प्रतियोगिता दिवस, अंतरराष्ट्रीय रोमानी दिवस, और राष्ट्रीय सब हमारा है दिवस, प्रथम भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के अग्रदूत मंगल पांडे शहीद दिवस, राष्ट्रीय पुस्तकालय कर्मचारी दिवस, राष्ट्रीय चिड़ियाघर प्रेमी दिवस, अभिनेत्रा अल्लू अर्जुन जन्म दिवस, पद्म भूषण से सम्मानित सत्यब्रत मुखर्जी जयन्ती, साहित्यकार आत्माराम रावजी देशपांडे स्मृति दिवस, विश्व रेडक्रॉस दिवस, विश्व थैलेसिमिया दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – एकादशी तिथि को चावल एवं दाल नहीं खाना चाहिये तथा द्वादशी को मसूर नहीं खाना चाहिये। यह इस तिथि में त्याज्य बताया गया है। एकादशी को चावल न खाने अथवा रोटी खाने से व्रत का आधा फल सहज ही प्राप्त हो जाता है। एकादशी तिथि एक आनन्द प्रदायिनी और शुभफलदायिनी तिथि मानी जाती है। एकादशी को सूर्योदय से पहले स्नान के जल में आँवला या आँवले का रस डालकर स्नान करना चाहिये। इससे पुण्यों कि वृद्धि, पापों का क्षय एवं भगवान नारायण के कृपा कि प्राप्ति होती है।।
🏘️ Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में आज हम बात करेंगे पीली रंगों की चीजों को सही दिशा में रखने के बारे में। आज सबसे पहले बात करेंगे पीले रंग की चीजों के बारे में। पीले रंग की चीजों में हर वो चीज आ जाती है, जो घर में उपयोग में आती हो। चाहें वो घर में रखी सब्जी-भाजी हो, या फिर पीली दाल, कोई पेंटिंग हो या गुलदस्ता आदि सभी चीजें जो पीले रंग की हैं, उन्हें घर के नैऋत्य कोण, यानि दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखना चाहिए। पीले रंग की चीजों को दक्षिण-पश्चिम दिशा में रखने से माता का स्वास्थ्य अच्छा रहता है, पेट संबंधी तकलीफों से छुटकारा मिलता है। साथ ही लीवर का संचालन अच्छा रहता है और पाचन क्रिया अच्छे से होती है, लिहाजा पीले रंग से संबंधित चीज़ों को नैऋत्य कोण यानि दक्षिण-पश्चिम दिशा में ही रखना चाहिए।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां_ ⚜️
ध्वनि की गति और माध्यम: ध्वनि की गति किसी माध्यम की घनत्व (density) और लोच (elasticity) पर निर्भर करती है। हवा में ध्वनि की गति लगभग 343 मीटर/सेकंड होती है, जबकि हीलियम में यह 965 मीटर/सेकंड तक बढ़ सकती है। चूंकि हीलियम का घनत्व बहुत कम होता है, इसलिए ध्वनि तेजी से यात्रा करती है और आपकी आवाज़ तीव्र (sharper) और ऊँची (high-pitched) सुनाई देने लगती है।
स्वर रज्जु का प्रभाव: जब आप बोलते हैं, तो आपके स्वर रज्जु कंपन (vibrate) करते हैं और मुंह में मौजूद हवा उस कंपन को प्रसारित करती है। हीलियम गैस लेने पर, आपके स्वर रज्जु सामान्य रूप से ही कंपन करते हैं, लेकिन इस बार ध्वनि हीलियम के हल्केपन के कारण तेजी से यात्रा करती है, जिससे उच्च आवृत्ति (high frequency) वाली आवाज़ उत्पन्न होती है। इसीलिए आपकी आवाज़ पतली और चूहे जैसी सुनाई देती है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
गुर्दे (किडनी) पर बुरा प्रभाव रक्त में अतिरिक्त कैल्शियम किडनी स्टोन (गुर्दे की पथरी) और किडनी डैमेज का कारण बन सकता है। इसके अलावा, अधिक कैल्शियम किडनी की कार्यक्षमता को प्रभावित करता है और शरीर में टॉक्सिन्स के जमाव का कारण बनता है।
➡️ दिल की समस्याएं और हाई ब्लड प्रेशर रक्त में बढ़ा हुआ कैल्शियम ब्लड वेसल्स (धमनियों) में जमाव करने लगता है, जिससे दिल की धड़कन अनियमित हो सकती है, हाई ब्लड प्रेशर और कार्डियोवैस्कुलर डिजीज का खतरा बढ़ जाता है।
➡️ मस्तिष्क और मानसिक स्वास्थ्य पर असर PTH के असंतुलन का प्रभाव मस्तिष्क पर भी पड़ता है। व्यक्ति को याददाश्त की समस्या, अवसाद, थकान, चिड़चिड़ापन और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई महसूस हो सकती है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
! राजा नहुष की कथा !!
एक बार अवश्य पढ़े 🧵
पाण्डवों ने युद्ध का निमंत्रण मद्रदेश के राजा शल्य के पास भी भेजा। राजा शल्य पराक्रमी होने के साथ ही साथ नकुल और सहदेव के मामा भी थे।
वे पाण्डवों के सहायतार्थ अपनी एक अक्षौहिणी सेना लेकर चले किन्तु दुष्ट दुर्योधन ने मार्ग में ही उनसे मिलकर उनकी अनेक प्रकार से सेवा करके तथा चिकनी-चुपड़ी बातें करके उन्हें अपनी ओर मिला लिया।
जब बाद में विराट नगर के समीप जब युधिष्ठिर से उनकी भेंट हुई तो शल्य को दुर्योधन के साथ मिल जाने के अपने कृत्य पर पश्‍चाताप होने लगा।
किन्तु दुर्योधन को एक बार वचन दे देने के बाद वे अपना वचन तोड़ भी नहीं सकते थे इसलिये युधिष्ठिर से वे बोले, “धर्मराज! युद्ध में सहायता को छोड़कर तुम मुझसे कुछ और माँग लो।”
इस पर युधिष्ठिर ने कहा, “मामाजी! जिस समय कर्ण और अर्जुन का युद्ध होगा उस समय आप हर प्रकार से कर्ण को हतोस्हाहित करते रहिये।”
शल्य बोले, “अच्छी बात है, मैं ऐसा ही करूँगा। साथ ही तुम्हें आशीर्वाद देता हूँ कि विजय तुम्हारी ही होगी क्योंकि तुम धर्मात्मा हो और तुमने अनेक कष्ट सहे हैं।
किन्तु जिस प्रकार देवराज इन्द्र का कष्ट दूर हुआ था उसी प्रकार अब तुम्हारे भी कष्टों का अन्त होने वाला है।”युधिष्ठिर ने पूछा, “तात्! इन्द्र को किस प्रकार का कष्ट हुआ था और कैसे उसका अन्त हुआ था?”
शल्य ने उत्तर दिया, “हे युधिष्ठिर! बहुत पहले त्वष्टा नाम के एक प्रजापति थे। उनके त्रिशिरा नामक तीन सिर वाला एक पुत्र हुआ।
वह तेजस्वी होने साथ बहुत बड़ा तपस्वी था। उसके उग्र तप से इन्द्र को अपने इन्द्रासन छिन जाने का भय हो गया और उसने अपने वज्र से त्रिशिरा का सिर काट डाला।त्रिशिरा का वध करने के कारण इन्द्र को ब्रह्महत्या का दोष लगा और वे इस महादोष के कारण स्वर्ग छोड़कर किसी अज्ञात स्थान में जा छुपे।
इन्द्रासन खाली न रहने पाये इसलिये देवताओं ने मिलकर पृथ्वी के धर्मात्मा राजा नहुष को इन्द्र के पद पर आसीन कर दिया।
“नहुष अब समस्त देवता, ऋषि और गन्धर्वों से शक्‍ति प्राप्त कर स्वर्ग का भोग करने लगे।
अकस्मात् एक दिन उनकी द‍ृष्टि इन्द्र की साध्वी पत्‍नी शची पर पड़ी। शची को देखते ही वे कामान्ध हो उठे और उसे प्राप्त करने का हर सम्भव प्रयत्‍न करने लगे।जब शची को नहुष की बुरी नीयत का आभास हुआ तो वह भयभीत होकर देव-गुरु वृहस्पति के शरण में जा पहुँची और नहुष की कामेच्छा के विषय में बताते हुये कहा, “हे गुरुदेव! अब आप ही मेरे सतीत्व की रक्षा करें।”
गुरु वृहस्पति ने सान्त्वना दिया, “हे इन्द्राणी! तुम चिन्ता न करो। यहाँ मेरे पास रह कर तुम सभी प्रकार से सुरक्षित हो।”
इस प्रकार शची गुरुदेव के पास रहने लगी और वृहस्पति इन्द्र की खोज करवाने लगे।
“अन्त में अग्निदेव ने एक कमल की नाल में सूक्ष्मरूप धारण करके छुपे हुये इन्द्र को खोज निकाला और उन्हें देवगुरु वृहस्पति के पास ले आये।
इन्द्र पर लगे ब्रह्महत्या के दोष के निवारणार्थ देव-गुरु वृहस्पति ने उनसे अश्‍वमेघ यज्ञ करवाया।
उस यज्ञ से इन्द्र पर लगा ब्रह्महत्या का दोष चार भागों मे बँट गया। एक भाग को वृक्ष को दिया गया जिसने गोंद का रूप धारण कर लिया।
दूसरे भाग को नदियों को दिया गया जिसने फेन का रूप धारण कर लिया।तीसरे भाग को पृथ्वी को दिया गया जिसने पर्वतों का रूप धारण कर लिया। और चौथा भाग स्त्रियों को प्राप्त हुआ जिससे वे रजस्वला होने लगीं।
इस प्रकार इन्द्र का ब्रह्महत्या के दोष का निवारण हो जाने पर वे पुनः शक्‍ति सम्पन्न हो गये किन्तु इन्द्रासन पर नहुष के बैठे होने के कारण उनकी पूर्ण शक्‍ति वापस न मिल पाई।
इसलिये उन्होंने अपनी पत्‍नी शची से कहा कि तुम नहुष को आज रात में मिलने का संकेत दे दो किन्तु यह कहना कि वह तुमसे मिलने के लिये सप्तर्षियों की पालकी पर बैठ कर आये।शची के संकेत के अनुसार रात्रि में नहुष सप्तर्षियों की पालकी पर बैठ कर शची से मिलने के लिये जाने लगा।
सप्तर्षियों को धीरे-धीरे चलते देख कर उसने ‘सर्प-सर्प’ (शीघ्र चलो) कह कर अगस्त्य मुनि को एक लात मारी।
इस पर अगस्त्य मुनि ने क्रोधित होकर उसे शाप दे दिया कि मूर्ख! तेरा धर्म नष्ट हो और तू दस हजार वर्षों तक सर्प योनि में पड़ा रहे।
ऋषि के शाप देते ही नहुष सर्प बन कर पृथ्वी पर गिर पड़ा और देवराज इन्द्र को उनका इन्द्रासन पुनः प्राप्त हो गया।
इसी प्रकार तुम भी अपना राज्य प्राप्त कर सुख भोगोगे। इस प्रकार युधिष्ठिर को अनेक प्रकार से समझा-बुझा कर शल्य पुनः दुर्योधन के पास चले गये।!! ॐ नमो भगवते वासुदेवाय !!
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⚜️ एकादशी तिथि के देवता विश्वदेव होते हैं। नन्दा नाम से विख्यात यह तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है। एकादशी तिथि एक आनंद प्रदायिनी और शुभ फलदायी तिथि मानी जाती है। इसलिये आज दक्षिणावर्ती शंख के जल से भगवान नारायण का पुरुषसूक्त से अभिषेक करने से माँ लक्ष्मी प्रशन्न होती है एवं नारायण कि भी पूर्ण कृपा प्राप्त होती है।।
यदि एकादशी तिथि रविवार और मंगलवार को पड़ती है तो मृत्युदा योग बनाती है। इस योग में शुभ कार्य करना वर्जित है। इसके अलावा एकादशी तिथि शुक्रवार को होती है तो सिद्धा कहलाती है। ऐसे समय में किसी भी कार्य की सिद्धि प्राप्ति का योग निर्मित होता है। यदि किसी भी पक्ष में एकादशी सोमवार के दिन पड़ती है तो क्रकच योग बनाती है, जो अशुभ होता है। इसमें शुभ कार्य निषिद्ध बताये गये हैं। एकादशी तिथि नंदा तिथियों की श्रेणी में आती है। वहीं किसी भी पक्ष की एकादशी तिथि पर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना जाता है।

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