रिश्वतखोर सरपंच पर होगी धारा 39 की कार्यवाही
ग्राम पंचायत खाम्हा का मामला : एक लाख की रिश्वत लेते सरपंच हुआ था गिरफ्तार
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत खाम्हा में विगत दिवस हुये रिश्वतकांड मामले में जहां पूरे जिले में भूचाल ला दिया है वहीं यह घटनाक्रम लोगों को रोचक हो गया है। चूंकि अभी 2 अगस्त को ही राज्य निर्वाचन आयोग के द्वारा संबंधित जनप्रतिनिधियों को शपथ दिलाई गई थी और उनके द्वारा इस बात की शपथ ली गई कि बिना भेदभाव और भ्रष्टाचार के तहत पंचायत का संचालन किया जायेगा लेकिन आखिर ऐसी क्या परिस्थितियां निर्मित हुई कि खाम्हा पंचायत के नवनिर्वाचित सरपंच ने शपथ ग्रहण के 3 दिन बाद ही 1 लाख की रिश्वत ले ली।
उपरोक्त मामले के फरियादी आलोक कुमार पिता श्रवण कुमार 40 वर्ष निवासी ग्राम खामहा तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी, स्थाई निवासी-इलाहाबाद यूपी ने जबलपुर लोकायुक्त से शिकायत की थी कि सरपंच सुशील कुमार पाल, ग्राम खामहा तहसील ढीमरखेड़ा जिला कटनी का उसकी माता द्वारा विकृत 8 एकड़ भूमि स्वयं की पंचायत की होने से 50000 प्रति एकड़ के हिसाब से एवं सरपंच क्षेत्र के शासकीय योजनाओं का लाभ बाहरी होने बाहरी होने से से न दिलाने के नाम पर 400000 की रिश्वत मांग की गई थी। लोकायुक्त द्वारा योजनाबद्ध तरीके से फरियादी को 1 लाख रूपये देकर भेजा गया जहां पर पहले से योजनाबद्ध तरीके से खड़ी लोकायुक्त की टीम ने सरपंच के पैसे लेते ही उसे गिरफ्तार कर लिया।
सरपंच के कारनामे से प्रशासन भी पशोपेश में
अभी हाल में संपन्न हुये पंचायत चुनाव में सरपंच द्वारा रिश्वत लेने का यह पहला मामला प्रदेश में सबसे पहली कटनी जिले से सामने आया है। सरपंच की इस करतूत से जहां ढीमखेड़ा विकासखंड को तार तार कर दिया है वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अधिकारी भी पशोपेश में हैं क्योंकि शपथ के मात्र अभी 3 ही दिन हुये थे। लिहाजा यह समझ से परे है जो सरपंच चुनाव के चंद दिनों तक अपने आगे ईमानदार, कर्मठ, योग्य, अनुभवी जैसे शब्दों का तमगा लेकर घूम रहा था उसे ये बाते कैसे भूल गई और शपथ के मात्र 3 दिन ही सरपंच द्वारा 1 लाख की रिश्वत ले ली गई।
इस मामले में जिला पंचायत सीईओ जगदीशचंद्र गोमे ने सीईओ जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा से संपूर्ण जानकारी तलब की है। जानकारी आने के उपरांत ही आगे की कार्यवाही की जायेगी और इस मामले में प्रशासन द्वारा विधि विशेषज्ञों की राय ली जा रही है जिसमें म.प्र.पंचायती राज अधिनियम की धारा 39 के तहत कार्यवाही कर उसे अभी निलंबित कर उपसरपंच को खाम्हा पंचायत का कार्यभार सौंपा जा सकता है। बाद में सरपंच को पद से पृथक करने की कार्यवाही होगी। बहरहाल लोकायुक्त के द्वारा की गई कार्यवाही ने क्षेत्र में भूचाल ला दिया है।
जांच की आंच में झुलस सकते हैं सचिव और रोजगार सहायक
स्मरण रहे कि जिस तरह से उक्त घटनाक्रम निर्मित हुआ और शपथग्रहण के महज तीन बाद ही सरपंच 1 लाख की रिश्वत लेते गिरफ्तार हुआ। इस मामले में गांव में यह भी चर्चा व्याप्त है कि ग्राम पंचायत खाम्हा में पदस्थ सचिव और रोजगार सहायक की भी जांच होनी चाहिये। क्योंकि जो राशि सरपंच द्वारा ली गई होगी उसमें इन लोगों का भी हिस्सा हो सकता है। यहां पर यह भी उल्लेखनीय है कि पंचायत द्वारा जो एनओसी जारी की जाती है उसमें सरपंच-सचिव के भी हस्ताक्षर होते है और खाम्हा पंचायत में जो रिश्वतकांड हुआ वह एनओसी और अन्य शासकीय योजनाओं का लाभ दिलाने को लेकर हुआ है। खाम्हा पंचायत में पदस्थ रोजगार सहायक के कारनामें भी जग जाहिर है और रोजगार सहायक द्वारा पिछले कार्यकाल में जमकर लूट-खसोट की गई है क्योंकि पिछले कार्यकाल में यहां पर सचिव नहीं था। लिहाजा वित्तीय प्रभारी भी रोजगार सहायक के पास ही था जिसका इसके द्वारा जमकर दुरूपयोग किया गया।
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2 को शपथ, 5 को रिश्वकांड, एक लाख की रिश्वत लेते नवनिर्वाचित सरपंच गिरफ्तार



