कृषिमध्य प्रदेश

जंगली जानवर खेतों में मचा रहे धमाचौकड़ी, किसान परेशान

ब्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगज । इन दिनों ग्रामीण क्षेत्र में घूम रहे नीलगाय के झुंड से खेतों में निकल रही मक्का, मटर, टमाटर, चना, गेहूँ ज्वार आदि की फसल को भारी नुकसान हो रहा है तो दूसरी तरफ आवारा मवेशी उनकी फसलों को बरबाद कर रहे है। इससे किसान चिंतित है। मरखंडी, घोघरी, कुडा, भैसा, नई गडिया, पदरगटा, पिपलिया, सुल्तानगंज, सुनवाहा, बम्होरी टीटोर, मरखेडा टप्पा, चौका, झिरिया के अलावा आसपास के अन्य गांवों में भी वन्य प्राणी लंबे समय से फसलों को क्षति पहुचा रहे हैं। नील गाय मक्का,ज्वार के भुट्टों को खाकर फसल को रौंद रही है।
सुल्तानगंज क्षेत्र के किसान कंछेदीलाल शर्मा ने बताया कि खाए हुए यह भुट्टे बाद में किसी काम के नहीं रहते। इसी तरह मटर, टमाटर व अन्य फसलो को भी बुरी तरह प्रभावित कर देती है। 20-25 की संख्या में रात में विचरण करने वाली नीलगाय जिस खेत में घुसती है वहां की फसल बर्बाद हो जाती है। सुल्तानगंज क्षेत्र के सुनवाहा, बम्होरी टीटोर, गुलवाड़ा, चांदोड़ा, नारायणपुर, पिपलिया बिचोली, खजुरिया, खामखेडा, ककरुआ गुलाब, नई गढ़िया, मरखंडी, तिनघरा, भोजपुर, खैरी, झिरिया, महुआखेडा, पडरिया राजाधार, मरखेडा टप्पा, गोंडा खो, चौका सहित अन्य ग्रामों में जहां जंगली इलाका है वहा पर नीलगाय को अपने मुफीद माहौल मिलने से पिछले वर्षों में इन क्षेत्रों में जंगली जानवरों की संख्या में भारी इजाफा हुआ है। इस समय क्षेत्र में 600 से अधिक नीलगाय क्षेत्र में मौजूद है। इससे सीमांत किसान अपनी फसलों को बचाने के लिए समय समय पर कई जतन करते हैं। जबकि अभी फसले जमीन से निकल रही है जब यह स्थिती है तो फसल जब बढ़ जाएगी तब क्या होगा यह फिकर किसानों को सता रही है।
‌किसानों को पूरी रात नीलगाय को भगाने के लिए खेतों के आसपास घूमते फिरते बिताना पड़ती है। नील गाय इतना सजग व चतुर हाते हे कि जरा सी आहट मिलते ही तुरंत भाग खड़े होते है। यह झुंड में चारों दिशाओं में मुह करके बैठती है। कहीं से भी खतरे का संकेत मिलने पर दौड़ लगा देती है। कभी किसानों के हाथ नहीं लगती।
शहरी क्षेत्र के आसपास आवारा मवेशियों से परेशानी:- शहरी क्षेत्र बेगमगंज सुल्तानगंज के आस पास आवारा मवेशियों से शहर नगर कसवों से लगी कृषि भूमि के किसान इन आवारा मवेशियों से परेशान है जिसको लेकर वे पूर्व में जन सुनवाई में भी आवेदन लगा चुके है। लेकिन आवारा मवेशियो से निजात नहीं मिल पा रही है। आवारा मवेशिया के दर्जनों की संख्या में झुंड एक स्थान के किसान अपनी फसल बचाने दूसरे स्थान पर खदेड़ देते हैं तो दूसरे स्थान के किसान उन्हें वहां से चलता कर देते हैं। कई बार किसानों के बीच विवाद की स्थिती भी बन जाती है। गऊशाला में मवेशियों के रखने की जगह नहीं है तो कांजी हाऊस में रखा नहीं जा रहा है। क्योंकि कोई भी नीलामी में उक्त मवेशियों को खरीदता नहीं है और गऊ शाला लेती नहीं है। जिसके कारण किसान सबसे अधिक परेशान है तो दूसरे नंबर पर वाहन चालक ।
किसान नेताओं ने की मुआवजे की मांग:- किसान नेता जयकरण पटेल, कैलाश गुप्ता, बालगिरी गोस्वामी, सौरभ शर्मा, डा. रवि शर्मा, वीरू यादव, माखन सिंह, गर्धव सिंह, सत्तार खा मंसूरी, शहजाद खान, नरेन्द्र सिंह यादव, शहादत खा, जगत सिंह यादव, प्रदीप दुबे अजहर पटेल सहित अन्य किसानों ने शासन से जंगली जानवरों के द्वारा फसल बरबाद करने पर किसानों को मुआवजा देने की मांग की है। साथ ही शहरी क्षेत्रों में आवारा मवेशियों को गऊशाला में भेजने के लिए नवीन गौशाला खोलने की भी मांग की है।

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