धार्मिक

1008 कुंडीय महायज्ञ…9 दिनों तक होगा हवन, पढ़े जाएंगे 24 हजार श्लोक, 24 घंटे सीता-राम जाप भी

रिपोर्टर : शिवकुमार साहू
सागर । बुंदेलखंड के सागर में धर्म की गंगा बहने वाली है. एक तरफ बागेश्वर धाम सरकार श्रीमद् भागवत कथा कहेंगे तो दूसरी ओर आत्मानंद त्यागी जी महाराज का 1008 कुंडीय राम नाम जप महायज्ञ होने वाला है. पूरा सागर राम मय होने बाला है
इसकी तैयारियां अंतिम चरण में पहुंच गई हैं।
बता दें कि करीब 100 एकड़ में यज्ञ शाला का विस्तार किया गया है. सागर के राजघाट रोड पर स्थित सलैया गांव में यह जगह तैयार की गई है. यह नेपाली बाबा का 151वां महायज्ञ है. इसके पहले इस तरह के आयोजन नेपाल, बिहार, उत्तर प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ सहित मध्य प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर हो चुके हैं।
महायज्ञ के लिए सैकड़ों की संख्या में टेंट लगाए गए हैं। संत-महात्माओं के रहने ठहरने के लिए घांस-फूस की कुटियों का निर्माण किया गया है। यह सब हो रहा है सागर के राजघाट डेम से लगी हुई भूमि पर। सैकड़ों लोग इस काम में जुटे हुए हैं। अनुमान है कि हर दिन लाखों लोग महायज्ञ में पहुंचेंगे। आयोजन 24 अप्रैल से 04 मई तक शारदा माता मंदिर के प्रांगण में किया जाएगा।
9 दिनों तक लगातार होगा महायज्ञ
श्री सीताराम नाम जप यज्ञ समिति के अध्यक्ष हीरा सिंह राजपूत ने बताया कि यह महायज्ञ वाल्मीकि रामायण में उल्लेखित हवन प्रक्रिया के तहत संपन्न होगा, जिसमें 24 हजार श्लोक हैं. हवनकर्ता जोड़े-रामाये स्वाहा के मंत्र से आहुति देंगे, जिसके लिए 1008 कुंड तैयार किए गए हैं. इनमें धर्मप्रेमी श्रद्धालु एक समय में आहुति देंगे. यहां पर 9 दिनों तक लगातार हवन होगा, 1200 मंडली यहां 24 घंटे राम नाम कीर्तन करेंगी. खास बात यह है कि यहां एक एकड़ की जगह में 10 मंजिला यज्ञशाला भी तैयार की गई है. 24 मार्च को यज्ञ के लिए बरमान से नर्मदा जल लेने के लिए 1500 वाहनों का काफिला निकलेगा।
प्रकृति की सुरक्षा के लिए यज्ञ जरूरी
24 अप्रैल से 4 मई तक होने वाले इस यज्ञ को लेकर नेपाली बाबा ने कहा कि पाप की बात नहीं हमेशा धर्म की चर्चा करें, तभी समाज आगे बढ़ेगा. कर्म ही देवता बनाते हैं, देवताओं ने कर्म नहीं बनाए हैं. लोग आजकल अवैदिक कार्यक्रम करते हैं. वे धर्म का शोषण कर रहे हैं, पोषण नहीं. वैदिक कार्य करना चाहिए, तभी मानव जीवन का कल्याण होगा. कहा कि सारे देवताओं का बिल बकाया है, क्योंकि हमने भगवान की बनाई प्रकृति का उपयोग तो किया है. लेकिन हमने दिया कुछ नहीं है. अर्थात प्रकृति का संतुलन बनाने के लिए हमें यज्ञ करना चाहिए. नियमित और वैदिक यज्ञ करके प्रकृति को मजबूत बनाना चाहिए, तभी जीवन स्वस्थ और सुरक्षित होगा।
लोगों से आह्वान : नेपाली बाबा ने लोगों से आह्वान किया कि सभी इसमें हिस्सा लें. 1008 हवन कुंड का निर्माण होगा. श्रीमद्भागवत गीता, वाल्मीकि रामायण, हनुमान चालीसा, रुद्राभिषेक सहित अनेक धार्मिक कार्यक्रम इस अवसर पर होंगे।

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