हमें ढोंगी जीवन नहीं बल्कि ढंग का जीवन जीना चाहिए : कमलेश शास्त्री

सुल्तानगंज । हनुमान बाग मंदिर में चल रही श्री शिव महापुराण कथा के सप्तम दिवस में पं. कमलेश कृष्ण शास्त्री ने कहा कि आज कल व्यक्ति को जो नहीं करना चाहिए उसमे ज्यादा इंटरेस्ट लेता है और जो करना चाहिए उसमें इंटरेस्ट नहीं लेता है।
आज कल हमारे समाज से दान देने की प्रथा समाप्त ही होती जा रही है। दान देने का मतलब धन ही नहीं है दान का मतलब श्रमदान, समय दान, बलिदान, जलदान आदि आदि तभी हमारे पूर्वज कहा करते थे कि एक हाथ से दान दो तो दूसरे हाथ को पता भी न चले। दान छपा कर नहीं देना चाहिए, दान छुपा कर देना चाहिए। जितना दान छुपा कर दोगे उतना ही तुम्हारे लिए दान महत्वपूर्ण होगा।
किसी को दिखाने के लिए या किसी को बताने के लिए भक्त मत बनिए। तिलक लगाना है तो दिखाने के लिए नहीं भाव से लगाइए हमें ढोंगी जीवन नहीं जीना चाहिए बल्कि ढंग का जीवन जीना चाहिए। पाप करते समय मनुष्य ये सोचता है कि मुझे कोई देख न ले। तुम पैसे देकर अपने गलत काम को अदालत से तो छुपा सकते हो पर खुद से नहीं, ईश्वर से नहीं। तुम्हारी सबसे बड़ी अदालत तुम्हारा हृदय है।इसी लिए पाप करते समय ये कभी मत सोचो की कोई मुझे देख न ले बल्कि ये सोचो कि ऐसी कोई जगह ही नहीं है जहाँ ईश्वर आपको देख न रहा हो। पुराणों एवं वेदों की कथाएं हमें सही और गलत मार्ग की दिशा दिखाती हैं।आजकल तो प्रेम का सबूत देना पड़ता है यह प्रेमी नहीं होगी यह तुम्हारे रूप पर लट्टू है तुम्हारे तुमसे प्रेम नहीं उनको जिनका मुख मंडल सुंदर है उसके चाहने वाले थोड़े ज्यादा होते हैं वह बेचारा अपने आप ही पीछे पड़ा रहता है कोई तो हमें देख ले प्रेम नहीं है यह तो कामना है अगर प्रेम होना है तो सही हो मन का हो वही सही प्रेम है।



