धार्मिक

कलयुग में केवल हरि नाम संकीर्तन ही कराता है भवसागर से पार : आचार्य श्री प्रदुम्न भार्गव

रिपोर्टर : प्रफुल्ल भार्गव
गैरतगंज । कलयुग केवल नाम अधारा, सुमिर-सुमिर नर उतरी पारा। कलयुग में केवल हरि नाम संकीर्तन ही भवसागर से पार करने वाली वह नैया है, जिस पर बैठकर पाप आत्मा भी भव से पार हो जाती है। कहा गया है कि सतयुग में यज्ञ, द्वापर में दान, त्रेता में तप की बड़ी महिमा थी।लेकिन इन सब में कलयुग में राम नाम की महिमा को बड़ा ही महान बताया गया है । इस कलिकाल में ईश्वर को प्राप्त किया जा सकता है।
उक्त उदगार आचार्य श्री प्रदुम्न भार्गव ने सिहोरा गांव में आयोजित श्री सिद्ध स्थान हनुमान मंदिर में चल रही श्रीमद् भागवत कथा के द्वितीय दिवस व्यक्त किए। कहते हैं कि भगवान कृष्ण के गोलोक धाम जाने के बाद पांचो पांडव द्रोपदी के साथ स्वर्गारोहन करने को चले, साथ ही पुत्र परीक्षित को हस्तिनापुर का राजा बनाया गया। एक दिन महाराज परीक्षित घोड़े पर सवार होकर प्रजा का हाल जानने के लिए निकले, एक जगह उन्होंने देखा कि एक मोटा काला व्यक्ति एक गाय और एक बैल को मार रहा था, परीक्षित ने पूछा तू कौन है, जो मेरे राज्य में गाय, बैल को मार रहा है। व्यक्ति बोला मैं कलयुग हूं और द्वापर समाप्त हो गया है। कलयुग का समय आ गया है, तब राजा ने कहा मेरे होते तू नहीं आ सकता। तब कलयुग ने प्रार्थना की तो परीक्षित ने कलयुग को रहने के लिए पांच स्थान दिए। पहला जुआ में, दूसरा शराब मदिरापान में, तीसरा वेश्यागमन, चौथा हिंसा, पांचवा चोरी के सोने में। यह 5 स्थान देकर राजा परीक्षित घर आए और अपने पूर्वजों द्वारा युद्ध में जीत गया जरासन्ध का मुकुट सिर पर धारण किया और कलयुग राजा के सिर पर चढ़ गया। राजा शिकार खेलने वन में गए भूख प्यास लगी तो एक महात्मा श्रमिक जी के आश्रम में गए। महात्मा समाधि में थे तो राजा का सत्कार नहीं कर पाए तो राजा क्रोधित हो गए और वही पर मरे हुए सर्प को अपनी बाण की नोक से उठाकर महात्मा के गले में डाल दिया। यह बात महात्मा के पुत्र श्रंगी को पता चली तो उस ऋषि बालक ने उन्हें श्राप दिया जिसने भी मेरे पिता के गले में मरा हुआ सर्प डाला है आज से 7 वे दिन तक्षक नाम के सर्प के काटने से उसकी मृत्यु हो जाएगी। इसके बाद सुखदेव जी द्वारा गंगा तट पर सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा राजा को सुनाई, उनका उद्धार किया। इसी के साथ गाय की वर्तमान दशा पर भी प्रकाश डाला। गाय के शरीर में 33 करोड़ देवी-देवताओं का वास होता है। भगवान के 24 अवतारों का भी एक संक्षिप्त में वर्णन किया गया। ब्रह्मा जी द्वारा सृष्टि निर्माण की कथा कही गई।

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