पर्यावरण

पक्षियों की चहचहाहट से वीरान होते उपवन, गिद्ध, चील, कौआ, गौरैया सहित अनेक प्रजाति के पक्षी आसमान से विलुप्त

रिपोर्टर : कुंदनलाल चौरसिया
गौरझामर । इन दिनों आसमान सहित आसपास के पेड़ पौधों बगीचों उपवन में उछल कूद चहचहाहट के साथ मधुर कलरव करने वाले विभिन्न प्रकार के रंग बिरंगे पक्षी जिनमें कोयल कौवा चील गिद्ध गौरैया सहित अनेको प्रजाति के पक्षियो को न हम सुन पा रहे हैं और नहीं उन्हें देख पा रहे हैं जिन पक्षियों को देखकर उनकी अठखेलियां से मन प्रसन्न हो जाया करता था आज सभी जगह सुनसान बियाबान जैसी स्थिति बन गई इन दिनों आम के पेड़ों पर जब आम फलों से लदे हुए हैं कोयल की कूक से पूरा क्षेत्र गुंजायमान हो जाया करता था वहां न अब कोयल दिखाई दे रही है और न ही कोयल की मधुर वाणी, बाग बगीचो में इस समय सन्नाटा पसरा हुआ है यह सब कैसे हुआ क्यों हुआ इस पर ना शासन ने चिंता व्यक्त की है ना ही पर्यावरणविदो ने, हालांकि इन विषम परिस्थितियों के दोषी कोई और नहीं हम ही हैं कृषि उत्पाद बढ़ाने के चक्कर में हमने जमीनी जल का दोहन इस कदर किया कि नदी नाले पोखर तालाब सब सूख गए जलस्तर काफी नीचे जाने के कारण ऊपरी सतह का पानी नदी नालों से गायब होता चला गया‌ इस प्रकार पानी के अभाव में प्यास के मारे पक्षी बेमौत मारे जाते रहे आज स्थिति यह है कि आसमान में पक्षी दिखाई ही नहीं देते यह बहुत बड़ा चिंता का विषय है जिस पर शासन प्रशासन पर्यावरणविद सभी को गंभीरता से सोचना होगा तभी हम पक्षियों के कलरव को वापस पा सकेंगे

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