पर्यावरणमध्य प्रदेश

3 लाख रुपए सालाना आय देने वाली नर्सरी में पानी की कमी से सूख रहे 20 हजार पौधे

प्रभारी बोले विभागीय स्तर पर लिख चुका 8 पत्र
पोधों को बचाने के लिए स्वयं के व्यय पर बोर कराने एसडीएम से ली अनुमति, 230 फिट पर भी नहीं निकला पानी

सिलवानी। 5 जून से पर्यावरण दिवस से लेकर पूरी बारिश में आम आदमी से लेकर सरकार पर्यावरण सरंक्षण को लेकर पौधारोपण अभियान चलाता है। इस अभियान को सफल बनाने के लिए वन उधानिकी विभाग और वन विकास निगम अपनी अपनी नर्सरी में बड़े पैमाने पर पौधे तैयार करवाते हैं। यहां से सरकार और समाजसेवी संगठन और अन्य पौधे खरीदते हैं और इन्हें जगह जगह रोपित करते हैं ताकि रोपा जा सकें, लेकिन सिलवानी तहसील में वन उद्यानिकी नर्सरी जुनिया में लगे लगभग 20 हजार पौधों पर संकट छा रहा है और इन्हें बचाए रखना नर्सरी के स्टाफ मुश्किल भरा साबित हो रहा है। नर्सरी में पानी की कमी के कारण यह पौधे सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं, जबकि इस नर्सरी से शासन को हर साल लगभग 3 से 4 लाख रुपए की आय होती है। बावजूद इसके विभागीय अफसर यहां पर एक बोर की व्यवस्था नहीं करवा पा रहे हैं यह समझ से परे हैं।
दो बोर पहले से उनमें पानी नहीं,
जानकारी के अनुसार इस नर्सरी में दो बोर हैं जो मार्च महीना लगते ही पानी छोड़ देते हैं। वर्तमान में दोनों बोर बंद पड़े हुए हैं, ऐसे में जब पेड़ सूखने लगे तो नर्सरी प्रभारी मनोज साहू ने एसडीएम से अनुमति लेकर 40 हजार रुपए स्वयं निजी तौर पर खर्च कर यहां बोरबेल करवाया, लेकिन 230 फिट खुदाई के बाद जब पानी नहीं निकला तो प्रभारी साहू की भी हिम्मत टूट गई। वहीं लगभग 500 फिट बोर करवाने के लिए वह बीते दो साल में विभागीय अफसरों को 8 बार पत्र लिख चुके हैं, लेकिन अब तक विभागीय अफसरों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
20 हजार पौधों की जीवन पर संकट
वर्तमान में नर्सरी में 1152 मातृ वृक्ष है, जिनमे आम, अमरुद, नींबू, संतरा, मोसम्मी, आंवला, सहित अन्य पौधे हैं। वहीं 18 हजार 700 पौधे तैयार हो चुके हैं वह भी सूखने की स्थिति में हैं। पर्यावरण प्रेमियों ने बताया कि वन विभाग के पास बजट रहता है इन पौधों के जीवन को बचाने के लिए बोर करवाना चाहिए।
मनोज साहू, प्रभारी नर्सरी जुनिया का कहना है कि यह सही है कि नर्सरी के 20 हजार पौधों पर पानी का संकट है। हम विभागीय स्तर पर पत्राचार कर प्रयास कर रहें है ताकि इन पौधों को बचाया जा सके। वहीं निजी तौर पर भी 40 हजार रुपए व्यय कर 230 फिट बोर खुदवाया उसमें पानी नहीं निकला है। कभी- कभी टैंकर मंगवाकर काम चलाना पड़ रहा है क्योंकि मन नहीं मानता है।

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