6 या 7 मार्च, दोनों दिन रखा जाएगा विजया एकादशी व्रत? जानें पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत पारण टाइम
Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
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🔮 6 या 7 मार्च, दोनों दिन रखा जाएगा विजया एकादशी व्रत? जानें पूजा-विधि, शुभ मुहूर्त, व्रत पारण टाइम
🥏 *_HIGHLIGHTS_*
🔹 *_विजया एकादशी के दिन ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान कर लें और फिर व्रत का संकल्प लें।_*
🔹 *_इसके बाद विधि विधान कलश स्थापना करें।_*
🔹 *_इसके बाद किसी साफ चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित करें।_*
🔹 *_तस्वीर पर गंगा जल के साथ चावल और रोली भी छिड़कें।_*
🔹 *_भगवान की प्रतिमाक के समक्ष घी के दीपक जलाएं।_*
फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को विजया एकादशी कहते हैं। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित होता है। एकादशी का व्रत रखने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होने के साथ ही सभी मनोकामनाएं भी पूर्ण होती हैं। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, एकादशी व्रत रखने से व्यक्ति के पाप नष्ट हो जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस साल विजया एकादशी 6 और 7 फरवरी दो दिन रहेगी। इस बार विजया एकादशी 6 और 7 मार्च दो दिन रहेगी। एकादशी तिथि प्रारंभ 6 मार्च को सुबह 6 बजकर 30 मिनट से होगा जो कि 7 मार्च को सुबह 04 बजकर 13 मिनट पर समाप्त होगी। गृहस्थजन 6 मार्च को और संतजन 7 मार्च को जया एकादशी का व्रत रखेंगे। कभी कभी एकादशी व्रत लगातार दो दिनों के लिए हो जाता है। जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब स्मार्त-परिवारजनों को पहले दिन एकादशी व्रत करना चाहिए। दूसरे दिन वाली एकादशी को दूजी एकादशी कहते हैं। संतों और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालुओं को दूजी एकादशी के दिन व्रत करना चाहिए। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं।
🤷🏻♀️ *_दोनों दिन रखा जाएगा विजया एकादशी व्रत?_*
इस साल विजया एकादशी 6 और 7 मार्च, 2024 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, 6 मार्च के दिन 06:30 ए एम से एकादशी तिथि की शुरुआत होगी, जो 07 मार्च के दिन 04:13 ए एम मिनट तक रहेगी। गृहस्त लोग 6 मार्च के दिन विजया एकादशी का व्रत रख सकते हैं। वहीं, सन्यासी और मोक्ष प्राप्ति के इच्छुक श्रद्धालु 7 मार्च को एकादशी व्रत कर सकते हैं। जब-जब एकादशी व्रत दो दिन होता है तब-तब दूजी एकादशी और वैष्णव एकादशी एक ही दिन होती हैं। भगवान विष्णु के भक्तों को दोनों दिन एकादशी व्रत रखने की सलाह दी जाती है।
💮 *_विजया एकादशी शुभ मुहूर्त_*
➡️ *_एकादशी तिथि प्रारम्भ – मार्च 06, 2024 को 06:30 ए एम बजे_*
➡️ *_एकादशी तिथि समाप्त – मार्च 07, 2024 को 04:13 ए एम बजे_*
➡️ *_7 मार्च को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 01:28 पी एम से 03:49 पी एम_*
➡️ पारण तिथि के दिन हरि वासर समाप्त होने का समय – 09:30 ए एम, 7 मार्च
💧 8 मार्च को, पारण (व्रत तोड़ने का) समय – 06:23 ए एम से 08:45 ए एम
💦 पारण के दिन (8 मार्च) द्वादशी सूर्योदय से पहले समाप्त हो जाएगी।
✡️ विजया एकादशी की पूजा विधि
🪶 दशमी तिथि की रात को सात्विक भोजन करें और ब्रह्मचर्य का पालन करें.
🪶 एकादशी तिथि की सुबह सूर्योदय से पहले उठें और स्नान करें.
🪶 स्वच्छ वस्त्र धारण करें और पूजा स्थान को साफ करें.
🪶 भगवान विष्णु की मूर्ति स्थापित करें और दीप प्रज्वलित करें.
🪶 भगवान विष्णु को फल, फूल, मिठाई और दीप अर्पित करें.
🪶 विष्णु सहस्त्रनाम का पाठ करें.
🪶 आरती करें और प्रसाद वितरित करें.
🪶 द्वादशी तिथि की सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उपवास खोलें.
🗣️ विजया एकादशी की कथा
कथा के अनुसार त्रेता युग में मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम के वनवास काल के दौरान जब लंकापति रावण माता सीता का हरण करके लंका ले गया,तब प्रभु श्री राम ने सुग्रीव की अनुमति लेकर लंका प्रस्थान करने का निश्चय किया । जब श्री राम अपने सैन्यदल सहित समुद्र के किनारे पहुंचे,तब उन्होंने भयंकर जल जंतुओं से भरे अगाध समुद्र को देखकर लक्ष्मणजी से कहा-‘हे सुमित्रानंदन ! किस पुण्य के प्रताप से हम इस समुद्र को पार करेंगे।’तब लक्ष्मण जी बोले-‘हे पुराण पुरुषोत्तम !,आप आदि पुरुष हैं, सब कुछ जानते हैं । यहाँ से आधा योजन की दूरी पर बकदालभ्य मुनि का आश्रम है ,उनके के पास जाकर आप इसका उपाय पूछिए ।’ लक्ष्मण जी की इस बात से सहमत होकर श्री राम बकदालभ्य ऋषि के आश्रम गए और उन्हें प्रणाम किया । मुनि ,प्रभु राम को देखते ही पहचान गए कि ये तो विष्णु अवतार श्री राम हैं , जो किसी कारणवश मानव शरीर में अवतीर्ण हुए हैं । महर्षि ने श्री राम से उनके आने का कारण पूछा । रामचंद्र जी कहने लगे-‘हे ऋषे! मैं अपनी सेना सहित राक्षसों को जीतने लंका जा रहा हूँ अतः आप कृपा करके समुद्र पार करने का कोई उपाय बताइए।’ बकदालभ्य ऋषि बोले-‘हे राम ! फाल्गुन कृष्ण पक्ष में जो विजया नाम की एकादशी आती है उसका व्रत करने से आपकी निश्चित विजय होगी,साथ ही आप अपनी वानर सेना के साथ समुद्र भी अवश्य पार कर लेंगे ।’ मुनि के कथनानुसार श्री रामचंद्र जी सहित सभी ने इस व्रत का विधिपूर्वक पालन किया ।इसके बाद उन सभी ने रामसेतु बनाकर समुद्र को पार किया और लंकापति रावण को परास्त कर युद्ध में विजय प्राप्त की।
🤷🏻♀️ विजया एकादशी पर करें इन चीजों का दान
👉🏽 अन्न और भोजन का दान : सनातन परंपरा में अन्न और भोजन का दान सबसे अच्छा माना गया है। इसलिए इस दिन निर्धन और असहाय बच्चों को अन्न का दान करना चाहिए। विजया एकादशी के शुभ अवसर पर दीन-हीन, असहाय बच्चों को भोजन कराने से भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। नारायण सेवा संस्थान विजया एकादशी पर दिव्यांग बच्चों को भोजन कराने जा रहा है। इस पावन अवसर पर बच्चों को भोजन कराने हेतु सहयोग करें।
👉🏽 वस्त्र और शिक्षा दान : एकादशी के शुभ अवसर पर वस्त्र और शिक्षा का दान भी बेहद शुभ माना जाता है। इसलिए इस शुभ दिन पर आप निर्धन बच्चों को शिक्षा से संबंधित सामग्री जैसे- कॉपी, किताब, पेंसिल, पेन, स्कूली बैग इत्यादि वितरित करें। साथ ही यदि संभव हो तो इस दिन किसी निर्धन बच्चे शिक्षित करने के लिए संकल्प लें। विजया एकादशी के पुण्यकारी अवसर पर नारायण सेवा संस्थान के वस्त्र दान और शिक्षा दान करने के आंदोलन में सहयोग करके पुण्य के भागी बनें।



