दादाजी धाम खंडवा की जर्जर स्तिथि के विरुद्ध भक्त हुए मुखर
रिपोर्टर : कमलेश अवधिया
साईंखेड़ा। श्री श्री 1008 श्री धूनीवाले दादाजी की नगरी खंडवा के श्री दादा दरबार की वर्तमान जर्जर स्तिथि के विरोध और 84 खंबो के भव्य सफेद संगमरमर मंदिर के समर्थन में कई वर्षो से लगातार आवाज उठाई जा रही है।
विदित हो श्री दादाजी महाराज की मुख्य लीला स्थली साईंखेड़ा रही है एवं यहां हजारों लाखों के संख्या में श्री दादाजी भक्त है।
दादाजी भक्त उमंग अग्रवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि कुछ वर्षों पहले श्री दादा दरबार ट्रस्ट खंडवा द्वारा लगभग 50 साल पुराने जर्जर RCC के मंदिर के ऊपर ही लाल पत्थर से मंदिर निर्माण करने की घोषणा की गई थी परंतु अवैज्ञानिक तरीके से पत्थर के मंदिर में आर. सी. सी. की नीव के चलते एसडीएम ने पंचनामा बनाकर जनहित में निर्माण कार्य रुकवा दिया तब से अब तक निर्माण शुरू नहीं हो पाया है।
अब जब समाधि स्थल पर रंग रोगन के लिए घिसाई की जा रही थी, जर्जर अवस्था में जा चुके 50 साल पुराने आरसीसी निर्माण की पापड़िया कमजोर होने के कारण झड़ गई जिससे पुराने निर्माण में प्रयोग किया गया वर्षों पुराना सरिया दयनीय अवस्था में है यह साफ दिखने लगा है। जिसे छुपाने के लिए उस पर पलस्तर और रंग रोगन कर भक्तों की भेंट का ट्रस्ट धड़ल्ले से दुरुपयोग कर रहा है।
भक्तों ने प्रश्न उठाया इस निर्माण की आयु अब लगभग पूरी हो चुकी है और भगवान ना करे पर यदि कभी कोई बड़ी दुर्घटना हो जाती है तो क्या हठधर्मी ट्रस्टी उसकी जिम्मेदारी लेंगे?
ट्रस्ट की रूचि कभी भी भव्य मंदिर निर्माण की नहीं रही बल्कि नए-नए छोटे बड़े खर्चे किसी भी तरह से किए जाते रहे हैं।
साईंखेडा निवासी सभी दादाजी भक्तों ने खंडवा और देश विदेश के सभी भक्तों से आगे आकर ट्रस्ट की अनियमित और हठधर्म का विरोध करने की अपील की है। भक्तों ने शासन से मांग रखी है कि प्रशासनिक स्तर पर एक आधिकारिक समिति गठित की जाए जो यह सब अनियमिताएं दूर कर श्री छोटे दादा जी श्री हरिहर भोले भगवान जी की आज्ञा अनुसार प्रस्तावित संगमरमर के 84 खंभों का मंदिर जिसका लगभग 90% घडाई किया हुआ पत्थर कई वर्षों से खंडवा में भक्तों द्वारा एकत्रित करके रखा हुआ है उसका निर्माण जल्दी से जल्दी प्रारंभ करा सके ।


