अहंकारी मनुष्य सत्य और असत्य में भेद नहीं कर पाता है: स्वामी सदाशिव नित्यानंद जी महाराज
रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी
आज भगवान श्रीकृष्ण जी का जनोमत्स मनाया गया।
सिलवानी। सिलवानी अंचल के ग्राम मुआर में रघुवंशी पटेल परिवार द्वारा चल रही श्रीमद्भागवत कथा के चौथे दिवस कथा व्यास स्वामी सदाशिव नित्यानंद जी ने कहा कि मानव को कभी किसी बात या धन का अहंकार नहीं करना चाहिये, किसी की निदा नहीं करना चाइए, ये जीव आत्मा का हक सिर्फ धर्म और भजन का है। बाकी कौन क्या लाया और क्या लेके जायेगा, एक दिन सब को ही इस शरीर को छोड़कर जाना है। बस तुम्हारे द्वारा किए गए धर्म पुण्य ही साथ जाएंगे बाकी सब यही रहेगा।
श्रीमद् भागवत सुनने का लाभ भी कई जन्मों के पुण्य से प्राप्त होता है। श्रीमद् भागवत कथा मनुष्य को जीवन जीने और मरने की कला सिखाती है। मनुष्य को जीवन परमात्मा ने दिया है, लेकिन जीवन जीने की कला हमें सत्संग से प्राप्त होती है। सत्संग का मनुष्य के जीवन में बड़ा महत्व है। यह सद्विचार हिमालय ऋषि केश से पधारे हुए सदाशिव स्वामी नित्यानंद गिरी जी महाराज ने श्री सिद्ध स्थान टेकरीधाम मंदिर में चल रही श्रीमद भागवत कथा के चतुर्थ दिवस पर व्यक्त किए। श्रीकृष्ण जन्मोत्सव की कथा का वाचन करते हुए श्री सदा स्वामी नित्यानंद गिरी महाराज ने कहा कि भगवान सदैव भक्तों के वश में है। भगवान हमेशा अपने भक्तों का ध्यान रखते हैं। जब-जब धरती पर पाप बढ़ता है, तब-तब भगवान श्रीहरि धरा पर किसी न किसी रूप में अवतार लेकर भक्तों के संकट को हरते हैं। जब कंस के पापों का घड़ा भर गया तब भगवान श्रीकृष्ण ने बृज में जन्म लेकर कंस का अंत कर पापी राजा से भक्तों को मुक्ति दिलाई।
कथा आयोजक पटेल महेश सिंह रघुवंशी, श्रीमती सरोज पटेल लक्ष्मी नारायण सिंह रघुवंशी (जनपद सदस्य), पटेल भूपेंद्रसिंह रघुवंशी ने सभी धर्म प्रेमी बंधुओ से आग्रह किया है की कथा श्रवन कर धर्म लाभ उठाएं।


