मध्य प्रदेश

कुरआन हदीस और सहाबा की जिंदगी हमारी रहनुमाई के लिए है : तोहिद आलम

व्यूरो चीफ : शब्बीर अहमद
बेगमगंज । पैग़ंबरे इस्लाम पर कुरआन पाक का नुजूल होते वक्त यह भी बता दिया गया था की कुरआन पाक को अपने अमली जिंदगी में किस तरह से लाना है जो अमल पैग़ंबरे इस्लाम ने किया या जो बोला उसे हदीस कहते हैं। अकेले कुरान को सामने रखकर हम 1 रकात नमाज नहीं पढ़ सकते क्योंकि कुरान पाक में नमाज का हुक्म है तरीका हदीस ए पाक के अंदर बताया गया है इसलिए जब भी हम गुमराह हो या हमें रहनुमाई की जरूरत पड़े तो तीन चीजें याद रखें कि हमारी रहनुमाई के लिए कुरान हदीस और सहाबा की जिंदगी मौजूद है। उससे हम रहनुमाई हासिल कर सकते हैं।
उक्त बात रात्रि में जामा मस्जिद में शूरा कमेटी के जरिए आयोजित सीरते पाक के जलसे में लखनऊ से तशरीफ लाए नदवातुल उलेमा के पूर्व उस्ताद मौलाना सैयद तौहीद आलम नदवी ने कहीं । उन्होंने पैग़ंबरे इस्लाम के बताए हुए तरीके पर अमल करने का आह्वान किया और कहा कि नबी के तरीके को छोड़कर दुनियावी तरीके अपनाने से इज्जत नहीं मिल सकती इज्जत तो परवरदिगार ने नबी के तरीके में रखी है। आज हमारी नौजवान नस्लें नबी से मोहब्बत का दम तो भरती हैं लेकिन नबी के तरीकों को छोड़कर गैरों के तरीकों को अपना रहीं हैं इसीलिए वह जलील हो रही हैं। उन्होंने जिम्मेदार उलेमाओं को भी इख्तेलाफी मसाईल को नहीं छेड़ने की ताकीद की और कहां की वक्त के हालात को समझो और अपने अकीदे की हक बात अच्छे अंदाज में पेश करो और अपने हक अकीदे पर कायम रहो बहुत जल्द ही हक सारी दुनिया पर गालिब आकर रहेगा इसकी शुरुआत हो चुकी है। हम परवरदिगार की तरफ रुजू हो जाएं अगर हम परवरदिगार के सामने नहीं झुके तो कहीं ऐसा ना हो कि हमसे ईमान की दौलत छीन कर परवरदिगार दूसरों से काम ले ले।
जलसे की शुरुआत तिलावते कलाम पाक से की गई नात शरीफ का नजराना भी पेश किया गया । आए हुए उलेमाओं का परिचय मौलाना अदनान बारी नदवी ने अपने शुरुआती बयान में कराते हुए साबिक अमीरे जमात मरहूम हाजी मकबूल हसन वकील और हाजी अब्दुल हमीद साबिर व दीगर बुजुर्गों की कुर्बानियों की याद ताजा कराते हुए शहर में काम कर रही जमीयत उलेमा व इस्लाहे मिल्लत कमेटी वगैरा के कामों की भूरी भूरी प्रशंसा की। उसके बाद रानीगंज उत्तर प्रदेश से तशरीफ लाए मौलाना सैयद तौसीफ नदवी ने 12 रबी उल अव्वल के संबंध में किए जाने वाले जरूरी कामों को बताया और आज जो कुछ लोग झंडे बुलंद करके नबी से सच्ची मोहब्बत की बात करते हैं उन्हें मोहब्बत भरे अंदाज में समझाइश दी कि नबी से मोहब्बत का सही तकाजा आपके बताए हुए तरीकों पर अमल करने से साबित होगा ना कि गैरों के तरीके से। उन्होंने सभी से पैग़ंबरे इस्लाम से मोहब्बत का अमली नमूना पेश करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि पैगंबर इस्लाम को हर वक्त उम्मत की फिक्र रही दुनिया से पर्दा फरमाने से पहले भी आपने जिब्रील अमीन को बार-बार खुदा के पास भेजा कि मुझे उम्मत के बारे में मुतमईन करें कि मेरे बाद मेरी उम्मत का क्या होगा जब मुतमईन हो गए तो पर्दा फरमाया और रोजे महशर भी आप सजदे से सर तब तक नहीं उठाएंगे जब तक कि उम्मत के बारे में परवरदिगार आपसे यह नहीं कहेगा कि जैसा आप चाहेंगे वैसा किया जाएगा । हमें चाहिए कि हम ऐसे आमाल पेश करके दुनिया से जाएं कि नबी हमें अपना उम्मती तस्लीम कर लें । और यह तब होगा जब हम नबी के बताए तरीके पर अमल पैरा होंगे ।
जलसे के अंत में दुआ से पहले आभार चांद मियां एडवोकेट ने व्यक्त करते हुए लोगों से अपनी नस्लों को दीनी व दुनियावी तालीम से शिक्षित करने का आव्हान किया। और जलसे में सहयोग करने वालों का शुक्रिया अदा किया आखिर में मौलाना नदवी ने मुल्क में अमनो अमान विश्व में शांति और अपनी गलतियों की माफी परवरदिगार से मांगते हुए खुशहाल जिंदगी गुजारने की दुआ के साथ जलसे का समापन किया ।
वही दिन में मुस्लिम त्योहार कमेटी अध्यक्ष शहादत अली के तत्वाधान में काजी मोहल्ले से ईद मिलादुन्नबी पर अखाड़ों का जुलूस और बाइक रैली निकाली गई जो विभिन्न मार्गों से होती हुई बालाई टेकरी पर पहुंच कर समाप्त हुई। अखाड़े के युवाओं ने दो लड़कों की थाप पर ले जनों के विभिन्न करतब दिखाए जगह-जगह जुलूस का समाजसेवी द्वारा स्वागत किया गया मिष्ठान का वितरण भी किया।

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