आज का पंचाग रविवार 16 अक्टूबर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 16 अक्टूवर 2022
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – कार्तिक माह
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – षष्टी 7.23 AM तक तत्पश्चात सप्तमी
🖍️ तिथि के स्वामी :- षष्टी तिथि के स्वामी भगवान कार्तिकेय जी और सप्तमी तिथि के स्वामी सूर्य भगवान जी है ।
💫 नक्षत्र : आर्द्रा – 02:15 ए एम, अक्टूबर 17 तक पुनर्वसु
🪐 नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- आद्रा नक्षत्र के देवता रुद्र (शिव) और नक्षत्र के स्वामी राहु जी है ।
📢 योग – परिध 15.09 तक तत्पश्चात शिव
👉🏼 योग के स्वामी :- परिध योग की स्वामी विश्वकर्मा जी एवं स्वभाव हानिकारक माना जाता है।
⚡ प्रथम करण : – वणिज 7.03 AM तक
👉🏼 करण के स्वामी, स्वभाव :- वणिज करण की स्वामी लक्ष्मी देवी और स्वभाव सौम्य है।
✨ द्वितीय करण : – विष्टि 20.15 PM तक तत्पश्चात बव
👉🏼 करण के स्वामी, स्वभाव :- विष्टि करण के स्वामी यम और स्वभाव क्रूर है।
🔥 गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहू काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया हैं।
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:22
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:51
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:42 ए एम से 05:32 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:07 ए एम से 06:22 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:44 ए एम से 12:29 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:01 पी एम से 02:47 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:39 पी एम से 06:03 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:51 पी एम से 07:06 पी एम
💧 अमृत काल : 03:03 पी एम से 04:50 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:42 पी एम से 12:32 ए एम, अक्टूबर 17
🪷 त्रिपुष्कर योग : 02:15 ए एम, अक्टूबर 17 से 06:23 ए एम, अक्टूबर 17
❄️ रवि योग : 06:22 ए एम से 02:15 ए एम, अक्टूबर 17
💥 परिघ योग- दोपहर बाद 3 बजकर 9 मिनट तक
☄️ आर्द्रा नक्षत्र – देर रात 2 बजकर 15 मिनट तक
🚕 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में गुड़ चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – विश्व एलर्जी जागरूकता दिवस, विश्व खाद्य दिवस, विश्व एनेस्थीसिया दिवस, कान्हा राष्ट्रीय उद्यान
✍🏽 विशेष – सप्तमी तिथि को आँवला त्याज्य बताया गया है। सप्तमी तिथि मित्रप्रद तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह सप्तमी तिथि एक शुभ तिथि भी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि के स्वामी भगवान सूर्य देवता हैं। यह सप्तमी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह सप्तमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायीनी मानी जाती है। इस सप्तमी तिथि को सुबह सर्वप्रथम स्नान करके भगवान सूर्य को सूर्यार्घ देकर उनका पूजन करना चाहिये। उसके बाद आदित्यह्रदयस्तोत्रम् का पाठ करना चाहिये। इससे जीवन में सुख, समृद्धि, हर्ष, उल्लास एवं पारिवारिक सुखों कि सतत वृद्धि होती है। सप्तमी तिथि में भगवान सूर्य की पुजा करने से सभी मनोकामनाओं की पूर्ति होती है।
🌋 Vastu tips 🏡
इस दीपावली पर वास्तु के अनुसार कौनसा कलर किस कमरे के लिए रहेगा सबसे बेस्ट। जानिए टिप्स-
प्रवेश कक्ष यानी दरवाजे से अंदर आते ही जो कमरा सबसे पहले आता है, वहां सफेद, हल्का हरा, गुलाबी व नीला रंग करवाना शुभ परिणाम देता है।
लिविंग रूम/बैठक कक्ष में हमेशा पीला, मटमैला, भूरा, हरा रंग शुभ होता है।
भोजन कक्ष में आप हरा, नीला या हल्का गुलाबी, हल्का रंग का प्रयोग कर सकते हैं। ये तीनों रंग इस कमरे के लिए शुभ होते हैं।
मुख्य शयन कक्ष में हरा या नीला, गुलाबी, हल्का रंग का प्रयोग किया जाना चाहिए, जो वास्तु के अनुसार इस कमरे के लिए शुभता प्रदान करते हैं।
बच्चों का कोई कमरा हो, या फिर जहां पर बच्चों को सुलाया जाता है वहां की दीवारों पर काला, नीला या हरा रंग शुभ होता है।
रसोईघर यानी किचन में हमेशा शांतिदायक सफेद रंग शुभ होता है, जो वहां की ऊर्जा को सकारात्मकता प्रदान करता है।
पूजा व आध्यात्म से संबंधित कमरे में सदैव गुलाबी, काला, हरा, लाल रंग करवाया जाना ही शुभ फल प्रदान करता है।
स्नान घर/ बाथरूम का अंदरूनी रंग गुलाबी, काला, स्लेटी या सफेद हो तो वह शुभता व सकारात्मकता प्रदान करता है।
अध्ययन कक्ष अर्थात् जहां पर पढ़ाई या लिखा-पढ़ी का काम किया जाता हैं, उसमें हरा, लाल, गुलाबी, नीला, हल्का भूरा, हल्का रंग शुभ होता है।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
हाथ धोते समय कभी न करें ये गलतियां ज्यादातर लोग हड़बड़ी के चक्कर में हाथों की सफाई ठीक से नहीं करते जिसका नतीजा होता है कि ऐसा करने से कीटाणु मरते नहीं हैं। ऐसे लोगों में हाथ की सफाई करने के बाद भी बीमारियां जल्दी होने की आशंका बरकरार रहती है। डायरिया, सांस में तकलीफ, फोड़े फुंसी दाने गले का इन्फेक्शन ब्लू टाइफाइड वायरल यूरिनरी ट्रैक्ट इनफेक्शन निमोनिया जैसी कई गंभीर बीमारियां केवल गंदे हाथों के कारण ही फैलती हैं। इन सभी से बचने के लिए हमें सही तरीके से हाथों को धोना चाहिए।
इन चीजों के बाद हाथों को जरूर धोएं सिर्फ हाथ धोना ही काफी नहीं है बल्कि इस बात पर ध्यान देना जरूरी है कि हाथ ठीक से साफ हुए हैं या नहीं। हाथ धोने के बाद भी हम कुछ ऐसी गलतियां करते हैं, जिससे हमारे हाथ दोबारा कीटाणु के संपर्क में आ जाते हैं। ग्लोबल हैंडवाशिंग डे पर कुछ खास बातों को ध्यान में रखकर इसे अपनी आदत में लाने की कोशिश करें।
🥝 आरोग्य संजीवनी 🍶
तुलसी – आयुर्वेद के अनुसार, डेंगू बुखार में तुलसी काफी फायदेमंद साबित होती है। इसके लिए आप 8 से 10 तुलसी के पत्तों के साथ 4 काली मिर्च को 1 गिलास पानी में डालकर तब तक उबाल लें जब तक की ये आधा ना रह जाए। फिर इस पानी का दिन में 3 बार सेवन करें। इससे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है। यह पानी पीने से इम्यून सिस्टम मजबूत होता है और यह शरीर में एंटी बैक्टीरियल की तरह काम करता है।
पपीता – डेंगू बुखार से पीड़ित रोगियों के लिए पपीता रामबाण की तरह है। पपीते के पत्तों में मौजूद पपेन शरीर के पाचन तंत्र को सही रखता है, इसका जूस बनाकर पीने से शरीर में प्लेटलेट्स तेजी से बढ़ते हैं। इसका सेवन प्लेटलेट्स कम होने पर जरूर करें।
गिलोय – आजकल लोग गिलोय की लता घर में भी लगाने लगे हैं। कोरोना काल के बाद से लोगों को गिलोय का असली महत्व पता चल चुका है। यह हमारे शरीर के लिए काफी फायदेमंद होता है। गिलोय एक आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है इसके पत्ते के रस का सेवन डेंगू में लाभदायक साबित होता है और इससे प्लेटलेट्स भी तेजी से बढ़ते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
हमारी नीतियां आज भी समाज और परिवार में जीने के सलीके सिखाती हैं। आचार्य श्री गोपी राम ने अपनी नीति में पैसे, सेहत, बिजनेस, दांपत्य जीवन, समाज, जीवन में सफलता से जुड़े तमाम चीजों पर अपनी राय दी है। अगर आप इन्हें जीवन में उतार लिया जाए तो आप कभी धोखा नहीं खा सकते हैं। आचार्य श्री गोपी राम के इन्हीं विचारों में से आज हम एक और विचार का विश्लेषण करेंगे। आज के विचार में हमने बताया है कि क्या हैं वो चीजें जो मुश्किल समय में लड़ने की ताकत देती है। आइए जानते हैं उन चीजों के बारे में।
🗣️ श्लोक (बारहवां अध्याय)
संसारातपदग्धानां त्रयो विश्रान्तिहेतवः।
अपत्यं च कलत्रं च सतां संगतिरेव च॥
👉🏼 भावार्थ
आचार्य श्री गोपी राम के इस कथन के अनुसार, सांसारिक ताप से जलते हुए लोगों को तीन ही चीजें आराम दे सकती हैं – संतान, पत्नी तथा सज्जनों की संगति।
आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार, जिस व्यक्ति के पास ऐसा पुत्र हो जो अपने माता-पिता का ख्याल रखता हो और सही रास्ते में चलकर अपने लक्ष्य को पाता है, ऐसा पुत्र आने वाले समय में अपने माता-पिता के साथ-साथ समाज का भी नाम रोशन करता है।
पत्नी यदि किसी व्यक्ति की पत्नी सुशील और संस्कारी हो तो उसका पूरा जीवन सुख के साथ बीत जाता है। ऐसी पत्नी इंसान के हर सुख-दुख में साथ देने के साथ-साथ मुश्किल समय में आपके सामने ढाल की तरह खड़ी रहती हैं।
सही संगति अधिकतर लोग गलत और सही का फर्क नहीं समझ पाते हैं। ऐसे में यदि कोई दुराचारी, दुष्ट स्वभाव या फिर दूसरों को हानि पहुंचाने वाले व्यक्ति से मित्रता कर लेता है तो यह आपके भविष्य के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। इसलिए दोस्ती सोच समझकर ही करें।
┈┉ΦΦΦ❀((हरि ॐ))❀ΦΦΦ┉┈
⚜️ सोमवार और शुक्रवार कि सप्तमी विशेष रूप से शुभ फलदायी नहीं मानी जाती बाकी दिनों कि सप्तमी सभी कार्यों के लिये शुभ फलदायी मानी जाती है। सप्तमी को भूलकर भी नीला वस्त्र धारण नहीं करना चाहिये तथा ताम्बे के पात्र में भोजन भी नहीं करना चाहिये। सप्तमी को फलाहार अथवा मीठा भोजन विशेष रूप से नमक के परित्याग करने से भगवान सूर्यदेव कि कृपा सदैव बनी रहती है।
षष्ठी (छठ) के देवता भगवान भोलेनाथ के पुत्र और देवताओं के सेनापति कार्तिकेय जी है।
भारत के आलावा विश्व के अन्य देशों जैसे श्रीलंका, मलेशिया, सिंगापुर आदि में भी कार्तिकेय जी को इष्ट देव के रूप में स्वीकार किया गया है।
कार्तिकेय जी को युवा और बाल्य रूप में ही पूजा जाता है। भगवान कार्तिकेय जी को सदेव युवा रहने का वरदान प्राप्त है ।
इस तिथि में कार्तिकेय जी की पूजा करने से मनुष्य श्रेष्ठ मेधावी, रूपवान, दीर्घायु और कीर्ति को बढ़ाने वाला हो जाता है। यह यशप्रदा अर्थात सिद्धि देने वाली तिथि हैं।
कार्तिकेय गायत्री मंत्र : – ‘ॐ तत्पुरुषाय विद्महे: महा सैन्या धीमहि तन्नो स्कन्दा प्रचोदयात’. यह मंत्र हर प्रकार के दुख एवं कष्टों का नाश करने के लिए प्रभावशाली है ।


