आचार संहिता में घुघरा सचिव ने निकाल लिये 6,20,000, शोपिट और वाटर हार्वेसिंटग के नाम पर भी जमकर हुआ खेला
अधिकारियों को लगी जानकारी तो फड़फड़ा रहे सचिव साहब
रिपोर्टर : सतीश चौरसिया
उमरियापान । जनपद पंचायत ढीमरखेड़ा की ग्राम पंचायत घुघरा में पदस्थ सचिव उदय यादव के कारनामें जगजाहिर हैं और जब उक्त सचिव कछारगांव में पदस्थ तो इनके द्वारा कछारगांव पंचायत में भी जमकर चांदी काटी गई लिहाजा वहां पर इनके कारनामें उजागर होने लगे और ग्रामवाासियों द्वारा इस संबंध में शिकायत की गई और आये दिन अखबारों की सुर्खियां बन गये लिहाजा इनके द्वारा अधिकारियों को पैसे देकर अपना स्थानांतरण घुघरा पंचायत करवा लिया गया लेकिन इनके कारनामें यहां और ज्यादा बढ़ गये और चुनाव आयोग द्वारा पंचायत निर्वाचन की घोषणा के बाद धड़ाधड़ इनके द्वारा अनेक दिनांकों में 6,20,000 की राशि विभिन्न काम को दर्शाकर निकाल ली गई जबकि मौके पर वे काम हुये ही नहीं है। लिहाजा जैसे ही इस संबंध में वरिष्ठ अधिकारियों को जानकारी लगी तो सचिव उदय यादव के हाथ पांव फूलने लगे हैं और अब इनके द्वारा निर्माण सामग्री बुलवाकर जो काम नहीं किये गये है वे करवाने की तैयारी की जा रही है। ऐसे में सवाल यह उठता है कि आखिर घुघरा सचिव के द्वारा निर्वाचन आयोग द्वारा जारी पंचायत चुनाव की अधिसूचना के बाद किस अधिकार से राशि आहरित की गई जबकि न तो मौके पर वे काम हुये है और न ही काम काम होना जारी था।
शोपिट और वाटर हार्वेसिंटग पर शासन को लगाई चपत
शासन द्वारा कोई भी योजनाएं इस उद्देश्य के साथ बनाई जाती है कि उनका लाभ संबंधित ग्रामवासियों को मिले लेकिन जिस भी ग्राम पंचायत में उदय यादव जैसे भ्रष्टाचारी सचिव पदस्थ हो जाये तो उस पंचायत का भगवान ही मालिक है। हम ऐसा इसलिये कह रहे है कि घुघरा सचिव के द्वारा शोपिट बनाने के नाम पर भी राशि आहरित की गई और कागजों में यह बताया गया कि पंचायत में 12 शोपिट का निर्माण करवाया गया है और प्रत्येक शोपिट के नाम 10 हजार की राशि आहरित की गई इस प्रकार कुल 1,20,000/- रुपये की राशि आहरित की गई। लेकिन जब हकीकत जानने के लिये ग्राम पंचायत घुघरा का मौका मुआयन किया गया तो हकीकत कुछ और थी और शोपिट के नाम पर मात्र गड्ढ़ा खोद दिया गया है। इसी प्रकार वाटर हार्वेसिंटग के नाम पर भी घुघरा सचिव उदय यादव के द्वारा शासन को चूना लगाया गया है। सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार ग्राम घुघरा में 3, टोपी और रामपुर में 2-2 वाटर हार्वेसिंटग कागजों में दर्शाये गये है और प्रत्येक वाटर हार्वेसिंटग के नाम पर 17,000/- रुपये की राशि अर्थात कुल 7 वाटर हार्वेसिंटग की राशि 1,19,000/- रुपये की राशि आहरित की गई लेकिन मौके पर मात्र खानापूर्ति की गई है। इस तरह से घुघरा सचिव के द्वारा शासन के पैसों की जमकर होली खेली गई और आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद भी 6,20,000 की राशि विभिन्न काम को दर्शाकर निकाल ली गई जबकि जिन कामों को बताकर राशि आहरित की गई वे काम हुये ही नहीं है इस संबंध में अधिकारी स्वयं मौका मुआयना कर सकते है जिससे हकीकत स्वयं की सामने आ जावेगी।
इस संबंध में शिशिर मेगावत, सीईओ, जिला पंचायत कटनी का कहना है कि चुनाव आदर्श आचार संहिता लागू होने के बाद राशि आहरित नहीं की जा सकती है। घुघरा सचिव के द्वारा आचार संहिता लागू होने के बाद किस अधिकार से राशि आहरित की इस संबंध में जनपद सीईओ से रिपोर्ट तलब की जायेगी।




