गुजरात फार्मूले को लेकर भाजपा में दबाव बढ़ा, सर्वे ने बढ़ाई चिंता, संगठन से हो सकती है शुरुआत

मौजूदा 127 में 60-70 विधायकों के टिकट कट सकते है ।
भोपाल। आगामी विधानसभा चुनाव 2023 में गुजरात फॉर्मूला मध्यप्रदेश में भी लागू होगा या नहीं? ये सवाल राजनीतिक गलियारों में गूंज रहा है। सूत्रों के मुताबिक -सत्ता, संगठन और इंटेलीजेंस के सर्वे से भाजपा के माथे पर परेशानी झलक रही है। अगले विधानसभा चुनाव में प्रदेश में 18 साल की एंटी इनकम्बेंसी से बड़ा नुकसान हो सकता है। ऐसे में हल एक ही है, सरकार की बड़ी सर्जरी। मिशन 2023 में ग्वालियर-चंबल, बुंदेलखंड और विंध्य भाजपा के लिए मुश्किलों भरा हो सकता है इन्हीं इलाकों से केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया, नरेंद्र सिंह तोमर, राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा और भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष वीडी शर्मा आते हैं।
सूत्रों की मानें तो ताजा सर्वे रिपोर्ट्स को ध्यान में रखते हुए पार्टी के रणनीतिकार मध्य प्रदेश में बड़े फेरबदल और सर्जरी पर विचार कर सकती हैं, जिसमें कई मंत्रियों, विधायकों के टिकट पर कैंची चल सकती है।
इसे लेकर भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने कहा कि मध्य प्रदेश नहीं सारे देश में लागू होगा, इस देश में गुजरात एक आइडियल स्टेट हो गया है, वहां हर 5 साल में भाजपा के लिए वोट प्रतिशत बढ़ा है। भाजपा विधायक नारायण त्रिपाठी ने पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा को पत्र लिखकर गुजरात की तर्ज पर शिवराज सिंह चौहान के नेतृत्व वाली सरकार और वीडी शर्मा के नेतृत्व वाले राज्य संगठन दोनों में बदलाव की मांग की है। पत्र को लेकर मध्य प्रदेश के गृहमंत्री डॉ नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि हर राज्य में स्थिति अलग है, मध्यप्रदेश में अभी ऐसा कुछ नहीं है. हां, उन्होंने पहले भी पत्र लिखा है।
हालांकि सूत्रों की मानें तो गुजरात के उलट मध्य प्रदेश में सर्जरी राज्य के पार्टी संगठन के बड़े फेरबदल के साथ शुरू हो सकती है और राज्य सरकार में 4 खाली पदों को भरने के साथ अहम बदलाव हो सकते हैं।
प्रदेश भाजपा अध्यक्ष से हो सकती है बदलाव की शुरुआत
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान देश में सबसे लंबे समय तक बीजेपी के मुख्यमंत्री हैं, एक ताकतवर ओबीसी नेता जिनका विकल्प आसान नहीं। ऐसे में उनकी जगह किसी और को बिठाने की पार्टी में जल्दबाजी नहीं है और पार्टी के शीर्ष नेताओं में इसको लेकर आमराय भी नहीं, ऐसे में माना जा रहा है कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जिनका तीन साल का कार्यकाल फरवरी में समाप्त हो रहा है, उनकी जगह किसी आदिवासी या दलित चेहरे को बिठाकर बदलाव की शुरुआत होगी।
संगठन के साथ सरकार में भी बदलाव
संगठन के साथ सरकार में भी बदलाव होंगे, जिसमें कई युवा चेहरे, खासकर विंध्य के नेताओं को वरीयता मिलेगी। अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के विधायकों को मंत्रिमंडल में शामिल किया जाएगा, जिससे जाति, उम्र और क्षेत्र को साधा जा सके। फिलहाल राज्य में अभी 30 मंत्री हैं, जिनमें 10 क्षत्रिय, 8 ओबीसी, 3 एससी, 4 एसटी, 2 ब्राह्मण हैं। सूत्रों के मुताबिक- हालिया सर्वे के आधार पर मौजूदा 127 में 60-70 विधायकों के टिकट कट सकते हैं।



