आज का पंचांग रविवार, 18 दिसम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचांग 🧾
रविवार 18 दिसम्बर 2022
भगवान सूर्य जी का मंत्र : ऊँ घृणि सूर्याय नम: ।।
🌠 रविवार को की गई सूर्य पूजा से व्यक्ति को घर-परिवार और समाज में मान-सम्मान की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन उगते हुए सूर्य को देव को एक ताबें के लोटे में जल, चावल, लाल फूल और रोली डालकर अर्ध्य करें।
इस दिन आदित्य ह्रदय स्रोत्र का पाठ करें एवं यथा संभव मीठा भोजन करें। सूर्य को आत्मा का कारक माना गया है, सूर्य देव को जल देने से पितृ कृपा भी मिलती है।
रविवार के दिन भैरव जी के दर्शन, आराधना से समस्त भय और संकट दूर होते है, साहस एवं बल की प्राप्ति होती है। रविवार के दिन जी के दर्शन अवश्य करें ।
रविवार के दिन भैरव जी के मन्त्र ” ॐ काल भैरवाय नमः “ या ” ॐ श्री भैरवाय नमः “ की एक माला जाप करने से समस्त संकट, भय दूर होते है, रोगो, अकाल मृत्यु से बचाव होता है, मनवांछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर हेमन्त ऋतु
🌤️ मास – पौष माह
🌗 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – दशमी 22:51 PM बजे तक उपरान्त एकादशी तिथि है।
🖍️ तिथि के स्वामी :- दशमी तिथि के स्वामी भगवान यमराज जी है। दशमी तिथि के देवता यमराज जी हैं। यह दक्षिण दिशा के स्वामी है। इनका निवास स्थान यमलोक है।
💫 नक्षत्र – हस्त 10.18 AM तक तत्पश्चात चित्रा
🪐 नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी- हस्त नक्षत्र के देवता सुर्य और स्वामी चंद्र देव जी है।
🔊 योग : शोभन – 05:24 ए एम, दिसम्बर 19 तक अतिगण्ड
⚡ प्रथम करण : वणिज – 03:43 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : विष्टि – 03:32 ए एम, दिसम्बर 19 तक बव
🔥 गुलिक काल : – अपराह्न – 3:00 से 4:30 तक ।
⚜️ दिशाशूल – रविवार को पश्चिम दिशा का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से पान या घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सायं – 4:30 से 6:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:47:48
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:13:22
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:18 ए एम से 06:13 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:46 ए एम से 07:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:57 ए एम से 12:38 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:01 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:17 पी एम से 05:41 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:27 पी एम से 06:50 पी एम
💧 अमृत काल : 04:04 ए एम, दिसम्बर 19 से 05:40 ए एम, दिसम्बर 19
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:51 पी एम से 12:45 ए एम, दिसम्बर 19
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 07:08 ए एम से 10:18 ए एम
💦 अमृत सिद्धि योग : 07:08 ए एम से 10:18 ए एम
🌌 आयुष्मान योग – सुबह 6 बजकर 48 मिनट तक
☀️ सौभाग्य योग-अगले दिन सुबह 5 बजकर 24 मिनट तक
☄️ हस्त नक्षत्र नक्षत्र- सुबह 10 बजकर 18 मिनट तक
☄️ चित्रा नक्षत्र- सुबह सुबह 10 बजकर 18 मिनट के बाद
🚓 यात्रा शकुन-इलायची खाकर यात्रा प्रारंभ करें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ घृणि: सूर्याय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में गुड़ से बनी मिठाई भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-बेल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/भद्रा, पाश्र्वनाथ जयन्ती (जैन), अल्पसंख्यक अधिकार दिवस, मदनमोहन मालवीय जयंती, मध निषेध दिवस, अंतर्राष्ट्रीय घुमंतु दिवस, राष्ट्रीय धातुविज्ञान दिवस, अंतरराष्ट्रीय अल्पसंख्यक अधिकार दिवस, अन्तरराष्ट्रीय प्रवासी दिवस, श्रुति सेठ महिला अभिनेत्री जन्म दिवस, संत गुरु घासीदास जन्म दिवस, उधोगपति – विजय माल्या जन्मोत्सव
✍🏽 तिथि विशेष – दशमी तिथि को कलम्बी एवं परवल का सेवन वर्जित है। दशमी तिथि धर्मिणी और धनदायक तिथि मानी जाती है। यह दशमी तिथि पूर्णा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह दशमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है। दशमी को धन देनेवाली अर्थात ढंदायक तिथि माना जाता है। इस दिन आप धन प्राप्ति हेतु उद्योग करते हैं तो सफलता कि उम्मीदें बढ़ जाती हैं।
🗽 Vastu tips 🗼y
वास्तु शास्त्र के अनुसार बाथरूम और टॉयलेट को एक साथ अटैच करके नहीं बनवाना चाहिए और खासकर कि कमरे के अंदर तो बिलकुल भी नहीं। बाथरूम घर का वह हिस्सा होता है जहां पर अगर ठीक से साफ-सफाई का ध्यान न दिया जाए तो यहां नकारात्मक शक्तियां हावी भी हो सकती हैं। यही कारण है कि भूलकर भी बाथरूम का दरवाजा रात में खुला नहीं रखना चाहिए। इसके अलावा अगर रंगों की बात करें तो वास्तु के मुताबिक बाथरूम या टॉयलेट की दीवारों पर सफेद, गुलाबी, हल्का पीला या हल्का आसमानी रंग होना चाहिए ताकि वहां पर सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो सके।
वहीं अगर बाथरूम की टाइल्स की बात करें तो हमेशा लाइट कलर का उपयोग करें, गहरे रंग की टाइल्स न लगाएं। टाइल्स का रंग सफेद, आसमानी या ब्लू होना चाहिए। ये रंग बाथरूम को बिलकुल फ्रेश लुक देते हैं। वहीं काले और लाल जैसे गहरे रंगों से बचें। यहां तक कि वास्तु के हिसाब से बाथरूम में रखी बाल्टी के रंग का भी ध्यान रखना चाहिए। बाथरूम में नीले रंग की बाल्टी रखें। वास्तु के अनुसार यह शुभ भाग्य का वाहक है। इससे घर में खुशियां आती हैं।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
घने बालों के लिए लगाएं ब्राह्मी तेल बालों के लिए ब्राह्मी का तेल जड़ों को अच्छी तरह से पोषण देने में मदद करता है और जड़ों को मोटा करके बालों के विकास को तेज करता है। इसके अलावा ब्राह्मी स्कैल्प को ठंडा रखने में भी मदद करती है और बालों को घना करती है।
दोमुंहे बालों के लिए फायदेमंद स्प्लिट एंड्स यानी दोमुंहे बालों के लिए ब्राह्मी का तेल काफी कारगर तरीके से काम करता है। साथ ही ये रूखे और बेजान बालो में नमी लाता है और इसके टैक्चर को सही करता है। इससे दोमुंहे बालों की समस्या कम होती है।
डैंड्रफ की समस्या में कारगर डैंड्रफ की समस्या में ब्राह्मी का तेल काफी फायदेमंद है। दरअसल, डैंड्रफ कई बार फंगल संक्रमण के कारण होते हैं और ऐसे में ये डैंड्रफ को कम करता है और स्कैल्प को साफ करता है। ये सीबम के स्तर को संतुलित करता है और डैंड्रफ को रोक सकते हैं।
🫗 आरोग्य संजीवनी 🍶
खुद को रखें हाइड्रेटेड चाहे कोई भी मॉम हो आपको अपने आप को हाइड्रेटेड रखना चाहिए। हालांकि, ठंड के मौसम में लोग ज़्यादा पानी नहीं पी पाते हैं। फिर भी आप कोशिश करें कि ज़्यादा से ज़्यादा पानी पियें। इस मौसम में गर्म पानी पीना ज़्यादा बेहतर विकल्प है। हाइड्रेटेड रखने से बंद नाक के इलाज के लिए से सबसे बेहतर उपाय माना जाता है। साथ ही ग्रीन टी भी बंद नाक और गले की खराश को दूर करने में मदद करती है।
अजवाइन का काढ़ा पियें सर्दी के मौसम में अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत करने के लिए काढ़ा ज़रूर पियें। काढ़ा पीने से सिर्फ आपका ज़ुकाम ही कम नहीं होगा बल्कि आप काफी स्वस्थ महसूस करेंगे। काढ़ा बनाने के लिए आप 2 कप पानी में 1 बड़े चम्मच अजवाइन मिलाएं। जैसे ही उबाल आये उसमे लहसुन की 2 कलियों को मैश कर मिला दें। अब कुछ देर पानी को उबलने दें। जब जब पानी बेहद कम मात्रा में रह जाए तो गैस बंद कर दें। इस काढ़े का सेवन आप सप्ताह में 3 से 4 दिन करें। ऐसा करने से आपकी इम्युनिटी मजबूत होगी और आपको सर्दी खांसी से मुक्ति मिलेगी।
नाक पर गर्म सेक करें इसके अलाव आप बंद नाक से छुटकारा पाने के लिए अपने नाक को गर्म कपड़े से सेंके। सिकाई की वजह से नासिका मार्ग खुल जाती है और सर्दी की समस्या से छुटकारा मिलता है।
🌹 गुरु भक्ति योग 🕯️
शादी जीवन का एक महत्वपूर्ण फैसला है जो जल्दबाजी में नहीं लिया जा सकता नहीं तो दो जिंदगियां बर्बाद हो जाती है. वैवाहिक जीवन की सफलता पति-पत्नी दोनों पर निर्भर करती है. शादीशुदा जीवन में थोड़ी नोंकझोंक चलती है लेकिन अगर ये बड़ा रूप ले ले तो तलाक तक नौबत आ जाती है. विवाह से पूर्व जीवनसाथी का चुनाव बहुत मायने रखता है. हमने उस स्त्री का जिक्र किया है जो शादी के बाद पति और परिवार का जीवन खुशियों से भर देती है. ऐसी लड़की से शादी होना सौभाग्य की बात है, इनके घर में होने से धरती पर ही जीवन स्वर्ग सा लगता है. आइए जानते हैं।
मर्यादित विवाहोपरांत जिन स्त्री के लिए पति ही उसका सबकुछ होता है, वह पराए पुरुष के बारे में सोचती न हो ऐसी पत्नी पतिव्रता कहलाती है. ऐसी स्त्रियां वैवाहिक जीवन के लिए बहुत भाग्यशाली मानी जाती हैं. शादी के बाद ये पति का हर सुख-दुख में साथ देती है. आचार्य श्री गोपी राम कहते हैं कि जीवनसाथी के व्यवहार से उसके सच्चे और अच्छे होने का पता लगाया जा सकता है. शादी से पहले लाइफ पार्टनर के बाहरी नहीं आंतरिक गुणों और संस्कारों पर गौर करें. गुणवान स्त्री मुश्किल वक्त में भी अपने पति का साथ नहीं छोड़ती है. ये बात विवाह के लिए पुरुषों का चयन करने पर भी लागू होती है।
धर्म का पालन धर्म कर्म से जुड़ी स्त्री सही गलत के अंतर को भली भांति समझ पाती है. इससे न सिर्फ वह परिवार को बल्कि समाज को भी सही राह दिखाने में मदद करती है. आध्यात्म में विश्वास रखने वाली महिलाओं के घर में सुख-शांति भंग नहीं होती. धार्मिक कार्यों में स्त्री की रुचि हो तो शादी के बाद ये गुण बच्चों में भी आते हैं. इससे कई पीढ़ियों का उद्धार हो जाता है. धर्म व्यक्ति को अनिष्ट करने से रोकता है।
संतोष करने वाली जिन स्त्रियों में लालच का भाव नहीं होता वह दांतत्य जीवन को खुशहाल बना देती हैं. ऐसी लड़कियों परिस्थिति के अनुरूप होकर कार्य करती हैं. धैर्य से ही संतोष की भावना जाग्रत होती है. जो स्त्री शादी के बाद अपने परिवार की आर्थिक और पारिवारिक स्थिति में संतुलन बनाए रखकर अपनी खाव्हिशों को पूरा करती है वो पति और ससुराल वालों के लिए बहुत अच्छी मानी जाती हैं।
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⚜️ शास्त्रों के अनुसार यमराज जी मृत्यु के देवता कहे गए हैं। यह भगवान सूर्य और उनकी पत्नी संज्ञा के पुत्र है, यमुना अर्थात (यमी) इनकी जुड़वां बहन और मनु इनके भाई कहे गए है। यमराज की पत्नी का नाम देवी धुमोरना तथा इनके पुत्र का नाम कतिला है।
यमराज जी का वाहन महिष / भैंसे को माना गया हैं। वे समस्त जीवों के शुभ अशुभ कर्मों का निर्णय करते हैं।
इस दिन इनकी पूजा करने, इनसे अपने पापो के लिए क्षमा माँगने से जीवन की समस्त बाधाएं दूर होती हैं, निश्चित ही सभी रोगों से छुटकारा मिलता है, नरक के दर्शन नहीं होते है अकाल मृत्यु के योग भी समाप्त हो जाते है।
इस तिथि को धर्मिणी भी कहा गया है। समान्यता यह तिथि धर्म और धन प्रदान करने वाली मानी गयी है । दशमी तिथि में नया वाहन खरीदना शुभ माना गया है। इस तिथि को सरकार से संबंधी कार्यों का आरम्भ किया जा सकता है।

