धार्मिक

प्रत्येक घर में तुलसीदल व श्रीरामायण होना जरूरी है : जगतगुरु स्वामी रामानंदाचार्य जी

ग्राम बीकलपुर में श्रीराम चरित्र मानस सम्मेलन का आयोजन

रिपोर्टर : राजकुमार रघुवंशी


सिलवानी। कैलाशवासी आचार्य श्री डॉ रामाधार उपाध्याय जी की प्रेणा स्त्रोत से श्रीराम कथा से पूर्व ग्राम मे निकाली गई भव्य शोभा यात्रा। सैंकड़ो की संख्या में शामिल हुए श्रद्वालु।
पंच दिवसीय श्रीराम चरित मानस सम्मेलन कथा से पूर्व नगर में ग्रामवासियों व समिति द्वारा विशाल कलश यात्रा निकाली गई। कलश यात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्वालु शामिल हुए। कलश यात्रा मे सबसे आगें महिलाए व बालिकाएं सिर पर कलश रखे हुए शामिल हुई।
श्रीराम कथा के प्रथम दिन जगतगुरु स्वामी जगत गुरु रामानंदाचार्य स्वामी रामदिनेशचार्य जी ने कथा में पहुचें श्रद्वालुओं को अपनी मंगलमयी वाणी का रसास्वादन कराते हुए बताया उन्होन बताया कि प्रत्येक सनातन परिवार में तुलसी दल व रमायण ग्रंथ होना चाहिए। लेकिन यदि किसी घर में यह दोनो ही नही है तो वह घर सनातन का नही हो सकता है। प्रत्येक घर में तुलसीदल व रामायण होना आवष्यक। जगत गुरु रामानंदाचार्य जी ने बताया कि आत्म शक्ति के समर्पण से ही आयोजन सफल होता है। यदि कार्य में आत्म शक्ति का अभाव हो जाता है तो सफलता संभव नही हो पाती है। किसी भी कार्य को करने के लिए आत्म शक्ति होना आवष्यक है। चरित्र का निर्माण कैसे हो यह रामायण से सीख लेनी चाहिए । हनुमान जी जैसा चरित्र किसी का नही हो सकता और ना ही एैसा साधक हो सकता है। जिस व्यक्ति के मन में संतो की सेवा करने की ललक होती है वह ही संतो की सेवा कर पाता है एैसे लोगो पर संतो का हमेशा ही आशीर्वाद होता है। संतो की, गाय की, ब़ड़ो
की सेवा करने का जीवन में संकल्प ले तभी जीवन का कल्याण हो सकता है। उन्होने सीख दी कि जब भी महापुरुषो का, अपनो से बड़ो का, माता पिता का चरण स्पर्श करने का अवसर मिले तो उस अवसर को जाया नही करना चाहिए। एैसे अवसर का लाभ उठाना चाहिए । यह अवसर सौभाग्य से ही मिलता है। कार्यक्रम को वेदाचार्य पंडित रामक्रपालु शर्मा ने भी कथा का श्रवण कराया। कथा श्रवण करने बड़ी संख्या में श्रद्वालु पहुचें।

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