Aaj ka Panchang आज का पंचांग शुक्रवार, 30 दिसम्बर 2022
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शुक्रवार 30 दिसम्बर 2022
ॐ श्री महालक्ष्म्यै च विद्महे विष्णु पत्न्यै च धीमहि तन्नो लक्ष्मी प्रचोदयात् ॐ॥
🌌 दिन (वार) – शुक्रवार के दिन दक्षिणावर्ती शंख से भगवान विष्णु पर जल चढ़ाकर उन्हें पीले चन्दन अथवा केसर का तिलक करें। इस उपाय में मां लक्ष्मी जल्दी प्रसन्न हो जाती हैं।
शुक्रवार के दिन नियम पूर्वक धन लाभ के लिए लक्ष्मी माँ को अत्यंत प्रिय “श्री सूक्त”, “महालक्ष्मी अष्टकम” एवं समस्त संकटो को दूर करने के लिए “माँ दुर्गा के 32 चमत्कारी नमो का पाठ” अवश्य ही करें ।
शुक्रवार के दिन माँ लक्ष्मी को हलवे या खीर का भोग लगाना चाहिए ।
शुक्रवार के दिन शुक्र ग्रह की आराधना करने से जीवन में समस्त सुख, ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है बड़ा भवन, विदेश यात्रा के योग बनते है।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ अयन- दक्षिणायन
🌦️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – पौष मास
🌗 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – अष्टमी 23:42 PM बजे तक उपरान्त नवमी तिथि है।
✏️ तिथि स्वामी – अष्टमी (आठम) के देवता हैं रुद्र। इस तिथि को भगवान सदाशिव या रुद्रदेव की पूजा करने से प्रचुर ज्ञान तथा अत्यधिक कांति की प्राप्ति होती है। इससे बंधन से मुक्त भी मिलती है। यह द्वंदवमयी तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – उत्तराभाद्रपद 16:49 PM तक उपरान्त रेवती नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराभाद्रपद नक्षत्र के स्वामी शनिदेव हैं और राशि मीन है, जिसके स्वामी देवताओं के गुरु बृहस्पति देव हैं।
🔊 योग – वरियान 15:18 PM तक उपरान्त परिघ योग है।
⚡ प्रथम करण : बव – 06:33 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बालव – 06:28 ए एम, दिसम्बर 31 तक कौलव
🔥 गुलिक काल :- शुक्रवार सुबह 7:30 बजे से सुबह 9:00 बजे तक
⚜️ दिशाशूल – शुक्रवार को पश्चिम दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खाकर यात्रा कर सकते है।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – सुबह 10:30 बजे से 12:00 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:47:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:13:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:24 ए एम से 06:19 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:51 ए एम से 07:13 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:03 पी एम से 12:44 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:07 पी एम से 02:48 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:24 पी एम से 05:48 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 05:34 पी एम से 06:56 पी एम
⭐ सर्वार्थ सिद्धि योग : 11:24 ए एम से 07:14 ए एम, दिसम्बर 31
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:56 पी एम से 12:51 ए एम, दिसम्बर 31
🌊 अमृत सिद्धि योग : 11:24 ए एम से 07:14 ए एम, दिसम्बर 31
☀️ वरीयान योग- आज सुबह 9 बजकर 46 मिनट तक
☄️ उत्तराभाद्रपद नक्षत्र- दोपहर 11 बजकर 24 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-शुक्रवार को मीठा दही खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ द्रां द्रीं द्रौं स: शुक्राय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-लक्ष्मी मंदिर में इत्र भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-गूलर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
💮 पर्व एवं त्यौहार – सर्वार्थसिद्धि योग/अमृतयोग, दुर्गा अष्टमी, शाकंभरी देवी नवरात्रोत्सवारंभ, जाने माने वैज्ञानिक – विक्रम साराभाई पुण्य तिथि, (प्रसिद्ध सामाजिक कार्यकर्ता) हनुमप्पा सुदर्शन जन्मोत्सव, रमण महर्षि – बीसवीं सदी के महान् संत जन्मोत्सव, पंचक जारी
✍🏽 विशेष – अष्टमी को नारियल एवं नवमी को काशीफल अर्थात कोहड़ा एवं कद्दू दोनों ही त्याज्य होता है। अष्टमी तिथि बलवती अर्थात स्ट्रांग तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं अपितु अष्टमी तिथि व्याधि नाशक तिथि भी मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह अष्टमी तिथि कृष्ण पक्ष में मध्यम फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
यदि ग्रहों की दशा-दिशा ठीक नहीं रहती है तो व्यक्ति चाहे कितनी भी मेहनत या कोशिश कर ले उसे सफलता नहीं मिलती है। ऐसे में हम आपको ज्योतिष शास्त्र के अनुसार एक उपाय बताने जा रहे हैं जिसे करने से आपके घर में हमेशा सुख-समृद्धि का वास रहेगा। घर में सुख-समृद्धि के वास के लिए मां लक्ष्मी को प्रसन्न करना होगा। उन्हें प्रसन्न करने के लिए घर में ये श्रीयंत्र स्थापित करना होगा।
मां लक्ष्मी को प्रसन्न करने और परिवार पर कृपा बनाए रखने के लिए पूजा स्थल पर आपको श्रीयंत्र स्थापित करना होगा। श्रीयंत्र की स्थापना से मां लक्ष्मी प्रसन्न होकर भक्तों की सभी मनोकामना को पूरा करती हैं। ये श्रीयंत्र 9 बड़े कोण में बना होता हैं जिसके अंदर 45 छोटे-छोटे कोण के आकार बने होते हैं। ये कोण नौ चक्र व देवियों का रूप माने जाते हैं। इस यंत्र की स्थापना से धन संबंधी परेशानियों से छुटकारा मिलता है।
श्रीयंत्र इस तरह करें स्थापित नए साल पर घर में धन, वैभव व सुख-शांति चाहते हैं तो श्रीयंत्र पूजा घर में जरूर स्थापित करें। सुबह स्नान करके धुले व शुद्ध स्वच्छ वस्त्र पहन लें। इस श्रीयंत्र को पंचामृत व गंगाजल के मिश्रण से स्नान कराएं। लाल वस्त्र बिछा कर इस यंत्र को ईशान कोण में स्थापित करें। यंत्र को स्थापित करते वक्त ‘ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं नम: या ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं ‘ मंत्र का जाप करते रहें। ध्यान रहे कि स्थापित करते वक्त यंत्र का मुंह पूर्व या उत्तर दिशा में हो।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
तरबूज खाएं गर्मियों में – तरबूज को ना केवल खाने बल्कि देखने से भी ठंडक का एहसास होने लगता है। ये ठंडा ठंडा तरबूज अगर आप अपनी डाइट में शामिल करेंगे तो ये आपकी हाई बीपी की समस्या को कंट्रोल करने में मदद करेगा। तरबूज में 90 प्रतिशत पानी होता है। जो गर्मियों में शरीर में पानी की कमी नहीं होने देता। इसके साथ ही इसमें पाया जाने वाला मैग्नीशियम हाइपरटेंशन को नियंत्रित करने में मददगार है।
जामुन का करें सेवन – अगर आप हाई ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रहे हैं तो आज से जामुन का सेवन शुरू कर दें। जामुन में एंटी ऑक्सीडेंट, मैग्नीशियम और पोटेशियम के गुण पाए जाते हैं। ये सेहत के लिए बेहतरीन होता है और आपकी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को भी दूर करने में मदद करता है।
दही रोज खाएं – गर्मियों के मौसम में दही का सेवन करना लाभकारी होता है। इसमें प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता है। इसके साथ ही प्रोटीन, राइबोफ्लेविन और विटामिन बी 12 भी होता है। ये सभी हाई ब्लड प्रेशर की समस्या को कंट्रोल करने में कारगर है।
नींबू – कुछ खाने पीने की चीजें ऐसी होती हैं कि अगर उसमें एक बूंद नींबू डाल दिया जाए तो उस चीज का स्वाद दोगुना हो जाता है। ये विटामिन सी के अलावा एंटी ऑक्सीडेंट युक्त होता है। ये शरीर से फ्री रेडिकल्स को खत्म कर ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में कारगर है।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
दमे की तकलीफ :- छुहारों को धो के धुप में सुखा दें, फिर कूट के चूर्ण बना के रख लें। १ ग्राम चूर्ण में थोड़ी सोंठ मिलाकर चाट लें या तो सोंठ के साथ पानी से फाँक लें। दिन में 3 बार यह प्रयोग करने से दमे में आराम मिलता है।
उच्च रक्तचाप (hypertension):- थोड़ी अरवी ( कचालू) भोजन में खाना शुरू करो और ‘ॐ शांति …. शांति’ जपो। इससे उच्च रक्तचाप में कइयों को आराम हुआ है।
निम्न रक्तचाप (low B.P.) :- गाजर का 230 मि.ली. रस और पालक का 125 मि.ली. रस मिलाकर पीने से और आरोग्यप्रद, पुण्यदायी ॐकार का जप करने से फायदा होता है।
📗 गुरु भक्ति योग 🕯️
अगर आप आचार्य श्री गोपी राम की नीतियों का अनुसरण करेंगे तो आपको हर मोड़ पर सफलता मिलेगी और बुरी से बुरी परिस्थिति भी आपको कुछ नहीं बिगाड़ सकेगी. अगर किसी व्यक्ति के रिश्ते में सुख-शांति और प्यार खत्म हो गया है तो रिश्तों में दरार उत्पन्न हो सकती है. ऐसे में हमारे नियम अपनाकर आप रिश्तों में आई दरार को खत्म कर सकते हैं।
अपने पार्टनर की इज्जर करें किसी भी रिश्ते में इज्जत बहुत महत्वपूर्ण होती है. कहते हैं कि रिश्ता इज्जत और भरोसे पर टिका होता है. लेकिन अगर आप अपने पार्टनर या अपने साथी का सम्मान नहीं करते तो वह रिश्ता लंबे समय तक नहीं टिक पाता. क्योंकि कोई व्यक्ति अपने साथी को बार-बार दूसरों के सामने अपमानित करता है तो वह उसके आत्मसम्मान को ठेस पहुंचा रहा है. साथ ही अपना भी मान-सम्मान खो रहा है. इसलिए रिश्तों में एक-दूसरे का सम्मान करना बेहद जरूरी है।
अहंकार से रहें दूर आचार्य श्री गोपी राम की नीति के अनुसार जिन रिश्तों में अहंकार आ जाता है उनमें दरार आना स्वाभाविक है. क्योंकि प्रेम संबंधों में यदि अहंकार आ जाए तो व्यक्ति अपने साथी के अस्तित्व को कम कर देता है और उसकी अहमियत को नहीं समझता. इसकी वजह से रिश्तों में तनाव पैदा होता है और रिश्ते खराब होने लगते हैं. अपने रिश्ते में मधुरता व प्यार बनाए रखने के लिए इस बात का खास ध्यान रखें कि कभी भी अहंकार या अहम को बीच में ना आने दें।
कहते हैं कि किसी भी रिश्ते की बुनियाद भरोसे पर टिकी होती है और इसलिए पति-पत्नी हो या प्रेमी-प्रेमिका दोनों के बीच विश्वास होना बेहद जरूरी है. अगर रिश्ते में अटूट विश्वास है तो जीवन में आई हर मुश्किल का सामना आसानी से किया जाता है. वहीं यदि रिश्ते में भरोसा नहीं होता और शक जगह बना लेता है वह रिश्ता एक झटके में टूट जाता है।
●●●●●★᭄ॐ नमः श्री हरि नम: ★᭄●●●●●
⚜️ अष्टमी तिथि के देवता भगवान शिव भोलेनाथ जी माने जाते हैं। इसलिये इस अष्टमी तिथि को भगवान शिव का दर्शन एवं पूजन अवश्य करना चाहिए। आज अष्टमी तिथि में कच्चा दूध, शहद, काला तिल, बिल्वपत्र एवं पञ्चामृत शिवलिंग पर चढ़ाने से भगवान शिव की कृपा सदैव बनी रहती है। घर में कोई रोगी नहीं होता एवं सभी मनोकामनाओं की सिद्धि तत्काल होती है।
मंगलवार को छोड़कर बाकि अन्य किसी भी दिन की अष्टमी तिथि शुभ मानी गयी है। परन्तु मंगलवार की अष्टमी शुभ नहीं होती। इसलिये इस अष्टमी तिथि में भगवान शिव के पूजन से हर प्रकार की सिद्धियाँ प्राप्त होती है। इस अष्टमी तिथि को अधिकांशतः विष्णु और वैष्णवों का प्राकट्य हुआ है। इसलिये आज अष्टमी तिथि में भगवान शिव और भगवान नारायण दोनों का पूजन एक साथ करके आप अपनी सम्पूर्ण मनोकामनायें पूर्ण कर सकते हैं।
अष्टमी तिथि को जिस व्यक्ति का जन्म होता है वह व्यक्ति धर्मात्मा होता है। मनुष्यों पर दया करने वाला तथा हरेक प्रकार के गुणों से युक्त गुणवान होता है। ये कठिन से कठिन कार्य को भी अपनी निपुणता से पूरा कर लेते हैं। इस तिथि के जातक सत्य का पालन करने वाले होते हैं यानी सदा सच बोलने की चेष्टा करते हैं। इनके मुख से असत्य तभी निकलता है जबकि किसी मज़बूर को लाभ मिले।

