शिवरात्रि व्रत से व्यक्ति जन्म मरण के बंधन से मुक्त हो जाता है : ब्रह्मचारी जी महाराज
सिलवानी । शुक्रवार को बम्होरी बर्धा में श्री शिवपुराण कथा के विराम दिवस पर शिवरात्रि व्रत की महिमा का वर्णन करते हुए व्यास पीठ से ब्रम्हचारी जी महाराज ने यह प्रवचन सुनाते हुए कहा कि मानव को अपने कल्याण प्राप्ति हेतु चार मार्गों का वर्णन किया।
पहला मार्ग के अनुसार शिवार्चन अर्थात सम्पूर्ण जीवों की शिव भाव से पूजन की जाए। द्वितीय मार्ग के अनुसार रुद्रजाप अर्थात शिव मंत्र के जाप को करना चाहिए। तीसरी मुक्ति की राह है कि मानव शिवालय में दिनरात निर्जल व्रत करे व अंतिम मोक्ष मार्ग है कि मनुष्य का शरीर काशी में छूटे।
शिवरात्रि व्रत चार प्रहर विधिवत किया जाना चाहिए, अगर किसी शिव मंदिर में व्रत पूजन सम्भव न हो तो घर पर मृदा से शिवलिंग बनाकर षोडशोपचार पूजन की जाए, पहले प्रहर की पूजन अक्षत, कमल पुष्प, कनेर पुष्प से करना चाहिए, नारियल से अर्घ्य दिया जावे। दूसरे प्रहर में मंत्रो को दूनी संख्या में उच्चारण करते हुए बिल्व पत्र व समर्पण करना चाहिए, अर्घ्य विजोरा नींबू से दिया जावे। तीसरे प्रहर की पूजन में जौ, गेंहू व अकौआ पुष्प व अनार से अर्घ्य समर्पित करना चाहिए।
अंतिम व चौथे प्रहर की शिवरात्रि में शिव पूजन में सप्त धान्य के साथ शंखपुष्पी पुष्प व केला से अर्घ्य अर्पित करना चाहिए।
ब्रह्मचारी जी ने शिवपूजन एवं पंचाक्षरी मंत्र के जाप की महिमा व जाप बिधि का भी विस्तार से वर्णन किया गया।
कथा विराम के अवसर पर भंडारे का भी आयोजन था जिसमें बड़ी संख्या में श्रोता गण सम्मलित हुए ।




