Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 19 जनवरी 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 19 जनवरी 2023
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
।।आप सभी पर ईश्वर की असीम अनुकम्पा की वर्षा होती रहे।।
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए । गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं । इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
गुरुवार को चने की दाल भिगोकर उसके एक हिस्से को आटे की लोई में हल्दी के साथ रखकर गाय को खिलाएं, दूसरे हिस्से में शहद डालकर उसका सेवन करें।
🔮 शुभ विक्रम संवत्-2079, शक संवत्-1944, हिजरी सन्-1443, ईस्वी सन्-2022
🌐 संवत्सर नाम-राक्षस
✡️ शक संवत 1944 (शुभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत 5123
☣️ सायन – उत्तरायण
🌦️ ऋतु – सौर शिशिर ऋतु
🌤️ मास – माघ माह
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – द्वादशी 13:20 PM बजे तक उपरान्त त्रयोदशी तिथि है।
📝 तिथि स्वामी : द्वादशी के देवता हैं विष्णु। इस तिथि को भगवान विष्णु की पूजा करने से मनुष्य सदा विजयी होकर समस्त लोक में पूज्य हो जाता है।
💫 नक्षत्र – ज्येष्ठा 15:19 PM तक उपरान्त मूल नक्षत्र है।
🪐 नक्षत्र स्वामी : ज्येष्ठा नक्षत्र का स्वामी ग्रह बुध है तथा ज्येष्ठा नक्षत्र के देवता देवराज इंद्र हैं।
🔔 योग – ध्रुव 23:05 PM तक उपरान्त व्याघात योग है।
⚡ प्रथम करण : तैतिल – 01:18 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : गर – 11:42 पी एम तक
⚜️ दिशाशूल – गुरुवार के दिन दक्षिण दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो दही खा कर यात्रा कर सकते है।
🔥 गुलिक काल : बृहस्पतिवार का (अशुभ) गुलिक काल 09:53 ए एम से 11:13 ए एम
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 13:30 बजे से 15:00 बजे तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:40:38
🌅 सूर्यास्त – सायं 17:25:32
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:27 ए एम से 06:21 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:54 ए एम से 07:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:11 पी एम से 12:53 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:18 पी एम से 03:00 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:47 पी एम से 06:14 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:49 पी एम से 07:10 पी एम
💧 अमृत काल : 07:16 ए एम से 08:43 ए एम 06:58 ए एम, जनवरी 20 से 08:24 ए एम, जनवरी 20
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, जनवरी 20 से 12:59 ए एम, जनवरी 20
☄️ ध्रुव योग – आज रात 11 बजकर 4 मिनट तक
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏻 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-विष्णु मंदिर में केसर अर्पित करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – प्रदोष व्रत/कर्णवेध, मेवाड़ के राजपूत राजा राणा प्रताप सिंह स्मृति दिवस, देवेन्द्र नाथ टैगोर (ठाकुर)- नोबेल पुरस्कार विजेता पुण्यतिथि, महान स्वतंत्रता सेनानी, गोपाल कृष्ण गोखले पुण्यतिथि, विष्णु सखाराम खांडेकर जन्मोत्सव, NDRF अपना 17वां स्थापना दिवस, राष्ट्रीय बंदूक प्रशंसा दिवस, अंतर्राष्ट्रीय फ़िल्म समारोह दिवस (10 दिवसीय), मूल जारी
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
घर के पूर्व दिशा को रखना चाहिए हमेशा खाली वास्तु शास्त्र में आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार घर के पूर्व दिशा को हमेशा खाली रहना चाहिए। इस दिशा में दीपक जलाना शुभ होता है। पूर्व दिशा ग्रहों के राजा सूर्य देव और इंद्र देव की माना जाती है। इस दिशा को हमेशा साफ रखना चाहिए। वहीं मान्यता है कि इस दिशा में भगवान गणेश और मां लक्ष्मी की मूर्ति स्थापित कर पूजा करने से आर्थिक लाभ होता है।
घर की दक्षिण दिशा में रखना चाहिए भारी सामान घर की दक्षिण दिशा में हमेशा भारी सामान रखना चाहिए। वास्तु शास्त्र के अनुसार यह दिशा मंगल और यम की दिशा होती है। वहीं इस दिशा में बाथरूम का निर्माण नहीं कराना चाहिए। ऐसा करना अशुभ माना जाता है।
पश्चिम दिशा में किचन बनवाना होता है शुभ वास्तु शास्त्र के अनुसार घर के पश्चिम दिशा में किचन का निर्माण कराया या होना बहुत ही शुभ माना जाता है। इस दिशा में वरूण देवता का वास माना जाता है। मान्यता है कि इस दिशा में किचन होने से घर में कभी पैसो की तंगी नहीं होती है और घर का वातावरण खुशनुमा बना रहता है।
घर के इस दिशा में लगाना चाहिए पौधे घर के किस दिशा में पौधे लगाना चाहिए यह भी वास्तु शास्त्र में बताया गया है। घर का पूर्व और उत्तर-पूर्व दिशा हमेशा पौधे लगाने के लिए शुभ माना जाता है। मान्यता है कि इस दिशा में पौधे लगाने से वास्तु दोष दूर होता है और घर में सकारात्मक ऊर्जा आती है।
🔐 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
सिर में कफ जमने के लक्षण
सिर में कफ जमने पर सिर भारी रह सकता है।
रह-रह कर सिर में तेज दर्द हो सकता है।
कफ के कारण ब्रेन में सेंसशन फील हो सकता है।
सोने, उठने और काम करने के दौरान सिर दर्द महसूस करना।
सिर में कफ जम जाए तो क्या करे?
सिर में कफ जम जाने पर कुछ घरेलू उपचार आपके काम आ सकते हैं। जैसे कि पहले तो
गर्म पानी में नीलगिरी का तेल डाल कर इसका भाप लें।
चाय में नमक डाल कर पिएं। ये कफ को बाहर निकालने में मददगार है।
लौंग की चाय पिएं जो शरीर में गर्मी पैदा करके कफ पिघलाने में मदद करेगा।
सौंठ और हल्दी का काढ़ा पिएं।
इस तरह आप इन तमाम घरेलू उपचारों की मदद लेकर कफ को कम कर सकते हैं। इससे कंजेशन कम होगा और सिर दर्द की समस्या अपने आप कम होने लगेगी।
🫁 आरोग्य संजीवनी 🫀
छाती में ठंड लगने के घरेलू उपाय-
नींबू और शहद का सिरप नींबू का विटामिन सी संक्रमण से लड़ने में मदद करता है। नींबू सूजन को कम करने में भी मदद करता है। नींबू के रस का उपयोग करने के लिए आप इसे शहद के साथ मिलाकर एक सिरप बना सकते हैं। ये सिरप छाती की जकड़न से छुटकारा दिलवाने में मददगार है।
काली मिर्च और गुड़ का काढ़ा गुड़ खांसी और सीने में कंजेशन से राहत दिलाने में मददगार है। ये बलगम को पिघलाने और इसे शरीर से बाहर निकालने में मददगार है। इसके अलावा ये एंटीबैक्टीरियल भी है जो कि इंफेक्शन को कम करने में मददगार है। गुड़ का इस्तेमाल करने के लिए आप काली मिर्च को कूट कर गर्म पानी में उबाल लें। अब इसमें जीरा और गुड़ लें। अब इसका घोल बना कर पी लें।
मुलेठी की चाय पिएं मुलेठी डिमलसेंट यानी कि बलगम को पिघलाने वाला है। ये छाती में गर्मी पैदा करता है और जलन और सूजन से राहत दिलाता है। यह बलगम को पतला करके और वायुमार्ग को आराम देकर छाती में कंजेशन से निपटने में मदद करता है। मुलेठी का इस्तेमाल करने के लिए आप हर्बल टी बना सकते हैं।
🪔 गुरु भक्ति योग 🪔
हिंदू धर्म में गरुड़ पुराण को महत्वपूर्ण बताया गया है यह महापुराणों की श्रेष्ठ में आता है इसमें जीवन मृत्यु से जुड़े कई रहस्यों का वर्णन किया गया है और जन्म व मृत्यु के बाद आत्मा की यात्रा के बारे में बताया गया है गरुड़ पुराण को लेकर आम धारणा बनी हुई है कि इसे मृत्यु के बाद ही पढ़ा जाता है
आचार्य श्री गोपी राम कहते है कि जब परिवार में किसी सदस्य की मृत्यु हो जाती है तो उसके बाद 13 दिनों तक घर में गरुड़ पुराण का पाठ किया जाता है इसका एक कारण यह है कि इसमें मृत्यु और इसके बाद की यात्रा के बारे में विस्तार पूर्वक बताया गया है, तो आज हम आपको अपने इस लेख द्वारा बता रहे हैं कि सनातन धर्म में मृत्यु के पश्चात गरुड़ पुराण का पाठ करना क्यों जरूरी होता है तो आइए जानते हैं।
मृत्यु के बाद इसलिए पढ़ा जाता है गरुड़ पुराण—
सनातन धर्म में किसी परिजन की मौत होने के बाद घर में लगातार 13 दिनों तक गरुड़ पुराण का पाठ करने की विशेष पंरपरा होती है शास्त्रों के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की मौत के बाद घर में उसके परिजन गरुड़ पुराण का पाठ करते है तो मृतक की आत्मा को अच्छी गति प्राप्त होती है उसे स्वर्ग में स्थान मिलता है इसलिए मृत्यु के पश्चात लगातार 13 दिनों तक इसका पाठ किया जाता है।
लेकिन शास्त्रों में कहा गया है कि केवल मृत्यु के बाद ही गरुड़ पुराण का पाठ किया जाए यहा जरूरी नहीं है जो भी मनुष्य अपने जीवन को बेहतर बनाना चाहता है वह भी इसका पाठ कर सकता है गरुड़ पुराण में गई ज्ञान की बातें बताई गई है जो मनुष्य अपने जीवन में उतार सकता है ऐसे में वह सामान्य दिनों में भी गरुड़ पुराण का पाठ कर सकता है लेकिन इसके लिए यह जरूरी है कि आप इसका पाठ पूरी पवित्रता के साथ करें। शुद्ध मन के साथ गरुड़ पुराण का पाठ करने से लाभ मिलता है और व्यक्ति यह भी आसानी से जान सकता है कि कौन सा मार्ग धर्म का है।
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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते है।


