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29 अप्रैल 2023 : कब है सीता नवमी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व

Astologar Gopi Ram : आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
🔮 29 अप्रैल 2023 : कब है सीता नवमी? जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व
🥏 HEADLINES
🔷 जानकी या सीता नवमी 2023
🔷 शनिवार, 29 अप्रैल 2023
🔷 नवमी तिथि शुरू – 28 अप्रैल 2023 अपराह्न 04:01 बजे
🔷 नवमी तिथि समाप्त – 29 अप्रैल 2023 को शाम 06:22 बजे
🌐 हिन्दू धर्म में माता सीता को पतित-पावना और पतिव्रता स्त्री का सर्वोच्च उदाहरण माना गया है। वहीं, इसके अलावा माता सीता मां लक्ष्मी का भी अवतार मानी जाती हैं। माता सीता के जन्मोत्सव को हर साल सीता नवमी के रूप में मनाया जाता है। ऐसे में ज्योतिष एक्सपर्ट आचार्य श्री नीरज कुमार से आइये जानते हैं कि सीता नवमी इस बार कब पड़ रही है और साथ ही जानेंगे शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महत्व के बारे में।
👸🏻 सीता नवमी 2023 कब है
वैशाख शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि का शुभारंभ 28 अप्रैल, दिन शुक्रवार को शाम 4 बजकर 1 मिनट से हो रहा है।
वहीं, इसका समापन 29 अप्रैल, दिन शनिवार को शाम 6 बजकर 22 मिनट से हो रहा है।
ऐसे में उदया तिथि के अनुसार, इस साल सीता नवमी 29 अप्रैल को मनाई जाएगी।
⚛️ सीता नवमी 2023 शुभ मुहूर्त
▪️ 29 अप्रैल को सीता नवमी के दिन पूजा का शुभ मुहूर्तसुबह 10 बजकर 19 मिनट से शुरू होगा।
▪️ वहीं, सीता नवमी के दिन पूजा का मुहूर्तदोपहर 12 बजकर 56 मिनट पर समाप्त होगा।
▪️ यानी कि सीता नवमी के दिन पूजा अवधि कुल 2 घंटे 37 मिनट की होगी।
👰🏻 सीता नवमी 2023 पूजा विधि
👉🏽 सीता नवमी की पूजा अष्टमी से शुरू हो जाती है।
👉🏽 अष्टमी के दिन सुबह उठकर गंगाजल (गंगाजल के उपाय) से भूमि पर छिड़काव किया जाता है।
👉🏽 फिर एक मंडप लगाया जाता है। मंडप को पूर्ण रूप से सजाया जाता है।
👉🏽 मंडप के पीच में एक चौकी पर लाल कपड़ा रख दिया जाता है।
👉🏽 नवमी की पूजा तक मंडप वाली जगह पर बिना शुद्धि के जाना मना होता है।
👉🏽 सीता नवमी के दिन प्रातः उठकर स्नान किया जाता है।
👉🏽 फिर स्वच्छ वस्त्र धारण कर माता सीता की प्रतिमा को मंडप में लाया जाता है।
👉🏽 मूर्ति के स्थान पर आप तस्वीर भी मंडप में ला सकते हैं।
👉🏽 मात सीता को मंडप के बीचों बीच चौकी पर स्थापित किया जाता है।
👉🏽 फिर मां का ध्यान करते हुए व्रत का संकल्प लिया जाता है।
👉🏽 मां सीता का अभिषेक कर उनका श्रृंगार किया जाता है।
👉🏽 माता सीता को पुष्प, फल, फूल, अक्षत और सुहाग का सामान अर्पित करते हैं।
👉🏽 फिर मां सीता को भोग लगाया जाता है और माता सीता के मंत्रों का जाप किया जाता है।
👉🏽 अंत में आरती करने के बाद माता सीता का प्रसाद परिवार में बांटा जाता है।
👉🏽 व्रत पूरा होने के बाद दशमी के दिन मंडप को पवित्र नदी में विसर्जित किया जाता है।
🤷🏻‍♀️ सीता नवमी का महत्व
सीता नवमी का व्रत सुहागिनों और अविवाहिताओं दोनों के द्वारा रखा जाता है। मान्यता है कि सीता नवमी का व्रत रखने से शादीशुदा महिलाओं का वैवाहिक जीवन (सुखी वैवाहिक जीवन के उपाय) मधुर हो जाता है और उनके वैवाहिक जीवन के कष्ट भी दूर होते हैं। साथ ही, कुंवारी कन्याओं द्वारा व्रत रखने और माता सीता की पूजा करने से मनवांछित वर की प्राप्ति होती है और जीवन सुख-समृद्धिमय बीतता है।
तो ये थी सीता नवमी से जुड़ी समस्त जानकारी। अगर हमारी स्टोरीज से जुड़े आपके कुछ सवाल हैं, तो वो आप हमें आर्टिकल के नीचे दिए कमेंट बॉक्स में बताएं। हम आप तक सही जानकारी पहुंचाने का प्रयास करते रहेंगे। अगर आपको ये स्टोरी अच्छी लगी है, तो इसे शेयर जरूर करें। ऐसी ही अन्य स्टोरी पढ़ने के लिए जुड़ी रहें हरजिंदगी से।
🫅🏻 सीता नवमी व्रत के लाभ
ऐसा माना जाता है कि विवाहित महिलाओं को लंबी और सुखी वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है और सीता जयंती की कामना या पूजा करने से उन्हें मातृत्व की प्राप्ति होती है। चूंकि माता सीता को भूमिजा के नाम से जाना जाता है, इसलिए इस दिन व्रत करने से लोगों को प्रचुर मात्रा में धन और ऐश्वर्य की प्राप्ति होती है। देवी सीता को पवित्रता, त्याग, समर्पण, साहस और धैर्य के प्रतीक के रूप में पूजा जाता है। ऐसा माना जाता है कि जो महिलाएं सीता नवमी का व्रत रखती हैं, उन्हें देवी के दिव्य आशीर्वाद और आनंदमय वैवाहिक जीवन की प्राप्ति होती है।
🙏🏻 विधि
इस दिन भक्त जल्दी उठते हैं और पूरे दिन उपवास का संकल्प लेते हुए स्नान करते हैं। भगवान राम और देवी सीता की मूर्तियों को फिर गंगा जल में स्नान कराया जाता है और मंदिर या पूजा स्थल पर रखा जाता है। फिर मूर्तियों के सामने दीपक जलाए जाते हैं और मूर्तियों को भोग लगाया जाता है। आरती की जाती है और मूर्तियों की पूजा की जाती है। माना जाता है कि देवी सीता परिवार के लिए भाग्य और सौभाग्य लाती हैं।
🗣️ कथा
मंगलवार के दिन पुष्य नक्षत्र में माता सीता का जन्म हुआ था। देवी सीता का विवाह भगवान राम से हुआ था। भगवान राम का जन्म भी चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि को हुआ था। हिंदू कैलेंडर में सीता जयंती रामनवमी के एक महीने बाद आती है। देवी सीता मिथिला के राजा जनक की गोद ली हुई बेटी थीं। इसलिए इस दिन को जानकी नवमी के नाम से भी जाना जाता है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, जब राजा जनक यज्ञ करने के लिए भूमि की जुताई कर रहे थे, तो उन्हें सोने के ताबूत में एक बच्ची मिली। एक जोती हुई भूमि को ‘सीता’ कहा जाता था इसलिए राजा जनक ने उस कन्या का नाम सीता रखा।

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