ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग बुधवार, 16 अगस्त 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
जय श्री हरि
🧾 आज का पंचांग 🧾
बुधवार 16 अगस्त 2023

16 अगस्त 2023 दिन बुधवार को अधिक श्रावण मास के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। आज बहुत ही सुन्दर संयोग बन रहा है। क्योंकि आज बुधवार की अमावस्या हो रही है अर्थात आज इस अमावस्या के साथ ही अधिक मास या मलमास की समाप्ति हो रही है। आज स्नान-दानादी की पुरुषोत्तमी अमावस्या है। शभवार की अमावस्या होने से सुभिक्ष का योग बन रहा है अर्थात प्रजा जन के सुख का योग बनेगा। आप सभी सनातनी बंधुओं को बुधवार के अमावस्या की बहुत-बहुत हार्दिक शुभकामनायें एवं अनन्त-अनन्त बधाइयाँ।।
ॐ एकदन्ताय विद्महे वक्रतुंडाय धीमहि तन्नो बुदि्ध प्रचोदयात ।।
☄️ दिन (वार) – बुधवार के दिन तेल का मर्दन करने से अर्थात तेल लगाने से माता लक्ष्मी प्रसन्न होती है धन लाभ मिलता है।
बुधवार का दिन विघ्नहर्ता गणेश का दिन हैं। बुधवार के दिन गणेश जी के परिवार के सदस्यों का नाम लेने से जीवन में शुभता आती है।
बुधवार के दिन गणेश जी को रोली का तिलक लगाकर, दूर्वा अर्पित करके लड्डुओं का भोग लगाकर उनकी की पूजा अर्चना करने से सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
⛈️ मास – अधिक श्रावण मास
🌚 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – श्रावण मास कृष्ण पक्ष अमावस्या तिथि 03:08 PM तक उपरांत प्रतिपदा
✏️ तिथि स्वामी – अमावस्या के स्वामी पितर होते हैं। अमावस्या तिथि के देवता हैं अर्यमा जो पितरों के प्रमुख हैं।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र आश्लेषा 04:57 PM तक उपरांत मघा
🪐 नक्षत्र स्वामी : अश्लेषा नक्षत्र का स्वामी बुध है।नक्षत्र के देवता नागों के राजा शेषनाग को माना गया है।
📣 योग : वरीयान योग 06:30 PM तक, उसके बाद परिघ योग
प्रथम करण : नाग – 03:07 पी एम तक
द्वितीय करण : किंस्तुघ्न – 04:21 ए एम, अगस्त 17 तक
🔥 गुलिक काल : – बुधवार को शुभ गुलिक 10:30 से 12 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – बुधवार को उत्तर दिशा में दिशा शूल होता है ।इस दिन कार्यों में सफलता के लिए घर से सुखा / हरा धनिया या तिल खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : – बुधवार को राहुकाल दिन 12:00 से 1:30 तक । राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:19:15
🌅 सूर्यास्त – सायं 19:05:13
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:24 ए एम से 05:07 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:46 ए एम से 05:51 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : कोई नहीं
✡️ विजय मुहूर्त : 02:37 पी एम से 03:29 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:00 पी एम से 07:22 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 07:00 पी एम से 08:05 पी एम
💧 अमृत काल : 03:09 पी एम से 04:57 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, अगस्त 17 से 12:47 ए एम, अगस्त 17
🚓 यात्रा शकुन-हरे फ़ल खाकर अथवा दूध पीकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ब्रां ब्रीं ब्रौं स: बुधाय नम:।
🤷🏻‍♂️ आज का उपाय-किसी बटुक को कांस्य पात्र में हरे फ़ल रखकर दान करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-अपामार्ग के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – देवकार्ये अमावस्या/पुरुषोत्तम / मल/ अधिक श्रावण मास समाप्ति/ पारसी फरवर्दिन मासारंभ/ अमावस्या समाप्ति दोपहर 03.07, पारसी नव वर्ष 1393 (शहंशाही ) प्रारंभ, भारतरत्न से सन्मानित अटल बिहारी वाजपेयी स्मृति दिवस, अरविंद केजरीवाल जन्मोत्सव, भगवान विष्णु के दसवें अवतार कल्कि देव की जयंती, राष्ट्रीय एयरबोर्न दिवस , राष्ट्रीय वित्त दलाल दिवस, राष्ट्रीय रोलर कोस्टर दिवस, विश्व ब्रैटवर्स्ट दिवस, राष्ट्रीय चुटकुला दिवस, स्वतंत्रता सेनानी, कवयित्री, कहानीकार सुभद्रा कुमारी चौहान जयन्ती, अभीनेता सैफ़ अली ख़ान जन्मोत्सव, रामकृष्ण परमहंस देव पुण्य तिथि, डोमिनिकन गणराज्य बहाली दिवस, पांडिचेरी विलय दिवस (भारत)
✍🏼 विशेष – अमावस्या को मैथुन एवं प्रतिपदा को कद्दू और कूष्माण्ड के फल का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य होता है। शास्त्रों में अमावस्या तिथि को सम्भोग वर्जित तिथि बताया गया है। अमावस्या तिथि एक पीड़ाकारक और अशुभ तिथि मानी जाती है। अमावस्या तिथि पितृगणों को समर्पित तिथि है अर्थात इसके स्वामी पितृगण हैं। यह केवल कृष्ण पक्ष में ही होती है तथा अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu Tips 🏚️
वास्तु शास्त्र में आज आचार्य श्री गोपी राम से जानिए आग्नेय कोण में लकड़ी का फर्नीचर रखने से होने वाले फायदे के बारे में। लकड़ी का फर्नीचर रखने के लिए आग्नेय कोण, यानि दक्षिण-पूर्व दिशा का चुनाव करना बेहतर होता है। इस दिशा में लकड़ी का फर्नीचर रखने से आपके घर के सदस्यों का विकास निरंतर होता रहता है। इससे आपके व्यापार में भी बढ़ोतरी होती है। साथ ही घर की बड़ी कन्या को इससे बहुत अधिक फायदा मिलता है। उनका स्वास्थ्य बेहतर रहता है।
अगर वो कोई बिजनेस करती है, तो उसमें उसे अप्रतिम लाभ देखने को मिलते हैं। आपको ये भी बता दें कि अगर आप इस दिशा में हरा रंग किया हुआ लकड़ी का फर्नीचर रखते हैं या फर्नीचर पर कोई हरे रंग की चीज रखते हैं, तो ये आपके लिए और भी फायदेमंद होगा। वैसे आप आग्नेय कोण के अलावा पूर्व दिशा में भी लकड़ी का फर्नीचर रख सकते हैं, बशर्ते वो अधिक भारी न हो।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
आइब्रो बढ़ाने के लिए कौन सा तेल लगाएं-कैस्ट्रोल ऑयल रोजाना अरंडी के तेल या कैस्ट्रोल ऑयल आइब्रो में लगाने से बालों के रोमों को पोषण मिलता है और इन्हें मजबूती मिलती है। साथ ही इन्हें लगाने से भौहें घनी हो जाती हैं। तो, भौंहों के विकास के लिए अरंडी के तेल का उपयोग करने के लिए, रुई में कैस्ट्रोल ऑयल लगाएं और इसे अपनी भौंहों पर थोड़ी मात्रा में लगाएं। फिर अपनी भौहों पर ब्रश करें और रात भर लगा रहने दें। रेगुलर ऐसा करने से आप इसका फर्क देखेंगे।
नारियल का तेल आइब्रो पर लगाने से इनकी ग्रोथ बेहतर होती है। आपको करना ये है कि नारियल तेल लें और इसे रोजाना रात में अपने आइब्रो पर लगाएं। थोड़ी देर हल्के हाथ से मसाज करें ताकि ब्लड सर्कुलेशन तेज हो और बालों की ग्रोथ बढ़े। इसके अलावा इसमें मेगा-3 फैटी एसिड और बायोटिन भी होते हैं जिससे आइब्रो की ग्रोथ तेजी से बढ़ती है।
🍃 आरोग्य संजीवनी 🌸
खांसी के लिए बोगनवेलिया बदलते मौसम के कारण अक्सर लोग सर्दी-खांसी से परेशान रहते हैं। ऐसे में आप 1 गिलास पानी में दालचीनी के टुकड़े के साथ बोगनवेलिया को उबालें और फिर इसे छानकर शहद मिलाकर पिएं। आपको खांसी में आराम मिलेगा।
शरीर डिटॉक्स करे बोगनवेलिया के फूलों से बनी चाय को पीने से आपके शरीर से विषैले पदार्थ दूर होते हैं और शरीर डिटॉक्स होता है। इसके साथ ही शरीर के हार्मोंस भी कंट्रोल में रहते हैं।
इम्यूनिटी के लिए बोगनवेलिया के सेवन से आपके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता यानी इम्यूनिटी बढ़ती है और आप बीमारियों से बचे रहते हैं। इसके सेवन से आपको पेट संबंधी समस्याएं भी कम होंगी।
जोड़ों के दर्द के लिए बोगनवेलिया आजकल लोगों में जोड़ों में दर्द की समस्या काफी देखने को मिलती है, जिसे दूर करने में बोगनवेलिया फायदेमंद साबित होगा। बोगनवेलिया में एंटी इंफ्लेमेटरी गुण पाए जाते हैं, जिससे आप जोड़ों के दर्द के समस्या से बच सकते हैं।
📚 गुरु भक्ति योग 🕯️
कल का शेष
राजा पृथु ने सौ अश्वमेघ यज्ञ किए। स्वयं भगवान विष्णु उन यज्ञों में आए, साथ ही सब देवता भी आए। पृथु के इस उत्कर्ष को देखकर इंद्र को ईर्ष्या हुई। उनको सन्देह हुआ कि कही राजा पृथु इंद्रपुरी न प्राप्त कर ले। उन्होंने सौवे यज्ञ का घोडा चुरा लिया।
जब इंद्र घोडा लेकर आकाश मार्ग से भाग रहे थे तो अत्रि ऋषि ने उन्हें देख लिया। उन्होंने राजा को बताया और इंद्र को पकड़ने के लिए कहा। राजा ने अपने पुत्र को आदेश दिया। पृथु कुमार ने भागते हुए इंद्र का पीछा किया। इंद्र ने वेश बदल रखा था।
पृथु के पुत्र ने जब देखा कि भागने वाला जटाजूट एवं भस्म लगाए हुए है तो उसे धार्मिक व्यक्ति समझकर बाण चलाना उपयुक्त न समझा। वह लौट आया, तब अत्रि मुनि ने उसे पुनः पकड़ने के लिए भेजा। फिर से पीछा करते पृथु कुमार को देखकर इंद्र घोड़े को वही छोड़कर अंतर्धान हो गए।
पृथु कुमार अश्व को लेकर यज्ञशाला में आए। सभी ने उनके पराक्रम की स्तुति की। अश्व को पशुशाला में बांध दिया गया। इंद्र ने छिपकर पुनः अश्व को चुरा लिया। अत्रि ऋषि ने यह देखा तो पृथु कुमार को बताया। पृथु कुमार ने इंद्र को बाण का लक्ष्य बनाया तो इंद्र ने अश्व को छोड़ दिया और भाग गए।
इंद्र के इस षड्यन्त्र का पता पृथु को चला तो उन्हें बहुत क्रोध आया। ऋषियों ने राजा को शांत किया और कहा-“आप व्रती है, यज्ञपशु के अतिरिक्त आप किसी का भी वध नहीं कर सकते। लेकिन हम मन्त्र द्वारा इंद्र को ही हवनकुंड में भस्म किए देते है।”
यह कहकर ऋत्विजों ने मन्त्र से इंद्र का आह्वान किया। वे आहुति डालना ही चाहते थे कि वहां ब्रह्मा प्रकट हुए। उन्होंने सबको रोक दिया। उन्होंने पृथु से कहा-“तुम और इंद्र दोनों ही परमात्मा के अंश हो। तुम तो मोक्ष के अभिलाषी हो। इन यज्ञों की क्या आवश्यकता है ? तुम्हारा यह सौवा यज्ञ सम्पूर्ण नहीं हुआ है, चिंता मत करो। यज्ञ को रोक दो। इंद्र के पाखण्ड से जो अधर्म उत्पन्न हो रहा है, उसका नाश करो।”
भगवान विष्णु स्वयं इंद्र को साथ लेकर पृथु की यज्ञशाला में प्रकट हुए। उन्होंने पृथु से कहा-“मैं तुम पर प्रसन्न हूं। यज्ञ में विघ्न डालने वाले इंद्र को तुम क्षमा कर दो। राजा का धर्म प्रजा की रक्षा करना है। तुम तत्वज्ञानी हो। भगवत प्रेमी शत्रु को भी समभाव से देखते हो। तुम मेरे परमभक्त हो। तुम्हारी जो इच्छा हो, वह मांग लो।”
राजा पृथु भगवान विष्णु के वचनों से प्रसन्न थे। इंद्र लज्जित होकर राजा पृथु के चरणों में गिर पड़े। पृथु ने उन्हें उठाकर गले से लगा लिया।
राजा पृथु ने भगवान विष्णु से कहा-“भगवन ! सांसारिक भोगो का वरदान मुझे नहीं चाहिए। यदि आप देना ही चाहते है तो मुझे सहस्त्र कान दीजिये, जिससे आपका कीर्तन, कथा एवं गुणगान हजारों कानों से श्रवण करता रहूं। इसके अतिरिक्त मुझे कुछ नहीं चाहिए।”
भगवान् विष्णु ने कहा-“राजन ! तुम्हारी अविचल भक्ति से मैं अभिभूत हूं। तुम धर्म से प्रजा का पालन करो।” यह कहकर भगवान विष्णु अन्तर्धान हो गए।
राजा पृथु की अवस्था जब ढलने लगी तो उन्होंने अपने पुत्र को राज्य का भार सौंपकर पत्नी अर्चि के साथ वानप्रस्थ आश्रम में प्रवेश किया। वे भगवान विष्णु की कठोर तपस्या करने लगे। अंत में तप के प्रभाव से भगवान में चित्त स्थिर करके उन्होंने देह त्याग कर दिया।
उनकी पतिव्रता पत्नी महारानी अर्चि पति के साथ ही अग्नि में भस्म हो गई। दोनों परम-धाम प्राप्त हुआ।
इति समाप्ति
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⚜️ अमावस्या को दूध का दान श्रेष्ठ माना जाता है। किसी कुआँ, तलाब, नदी अथवा बहते जल में दो-चार बूंद दूध डालने से कार्यों में आनेवाली परेशानियाँ दूर होती है। जौ दूध में धोकर नदी में प्रवाहित करने से सौभाग्य की वृद्धि होती है। इस तिथि को पीपल में जल देना परिक्रमा करना मिश्री दूध में मिलाकर अर्घ्य देना अत्यन्त शुभ फलदायी माना जाता है।
ऐसा करने से शनिदेव का प्रकोप कम होता है तथा भगवान नारायण एवं माँ लक्ष्मी कि पूर्ण कृपा प्राप्त होती है। अमावस्या को तुलसी और बिल्वपत्र नहीं तोड़ना चाहिये। आज घर की सफाई करना और कबाड़ बेचना शुभ माना जाता है। अमावस्या को भूलकर भी सम्भोग (स्त्री सहवास) नहीं करना चाहिये। घर के मन्दिर एवं आसपास के नजदीकी मन्दिर में तथा तुलसी के जड़ में सायंकाल में घी का दीपक जलाना चाहिये इससे लक्ष्मी माता प्रशन्न होती हैं।

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