ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 19 सितम्बर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 19 सितम्बर 2023

19 सितम्बर 2023 दिन मंगलवार को ही भादपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज से देशभर में (विशेष रूप से महाराष्ट्रा में) श्रीगणेशोत्सव प्रारम्भ हो जाएगा जो चतुर्दशी पर्यन्त चलेगा। इस चतुर्थी को कपर्दीश्वर चतुर्थी भी कहा जाता है। आज के दिन उड़ीसा में सरस्वती पूजन किया जाता है। बंगाल में आज की चतुर्थी को सौभाग्य चतुर्थी के रूप में मनाया जाता है। आप सभी सनातनियों को विघ्नहर्ता, गणपति, गजानन श्री गणेशोत्सव श्रीगणेश चतुर्थी व्रत की हार्दिक शुभकामनायें।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – भाद्रपद मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि : भाद्रपद शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 01:43 PM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि का स्वामी – चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणपति जी और पंचमी तिथि के स्वामी नाग देवता जी है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र स्वाति 01:48 PM तक उपरांत विशाखा
🪐 नक्षत्र स्वामी : राशि के स्वामी ग्रह शुक्र है। तथा स्वाति नक्षत्र के देवता पवन देव हैं।
📢 योग : वैधृति योग 03:57 AM तक, उसके बाद विष्कुम्भ योग
प्रथम करण : विष्टि – 01:43 पी एम तक
द्वितीय करण : बव – 02:03 ए एम, सितम्बर 20 तक
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का (अशुभ गुलिक) काल 12:21 पी एम से 01:58 पी एम
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा का दिकशूल होता है।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से गुड़ खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल : मंगलवार का राहुकाल 03:35 पी एम से 05:11 पी एम राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदय – प्रातः 06:27:21 AM
🌅 सूर्यास्त – सायं 18:36:11 PM
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:34 ए एम से 05:21 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 04:57 ए एम से 06:08 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:50 ए एम से 12:39 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:17 पी एम से 03:06 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:22 पी एम से 06:45 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:22 पी एम से 07:33 पी एम
💧 अमृत काल : 05:45 ए एम, सितम्बर 20 से 07:25 ए एम, सितम्बर 20
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:51 पी एम से 12:39 ए एम, सितम्बर 20
❄️ रवि योग : 06:08 ए एम से 01:48 पी एम
🚓 यात्रा शकुन- दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-गणेश मंदिर में मोदक चढ़ाएं। गणेश जी के पार्थिव विग्रह की स्थापना करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्री गणेश स्थापना/ऋषि पंचमी/भद्रा, गणेश चतुर्थी, सिख गुरु राम दास स्मृति दिवस, अंतरराष्ट्रीय पुरुष दिवस, राष्ट्रीय बिल्ली डीएनए दिवस, राष्ट्रीय शोक दिवस, सेंट किट्स एंड नेविस स्वतंत्रता दिवस, भारतीय क्रिकेटर आकाश चोपड़ा जन्मोत्सव, शास्त्रीय संगीत’ के विद्वान विष्णुनारायण भातखंडे पुण्य तिथि, अंतरराष्ट्रीय बधिरता सप्ताह (19 से 25 सितंबर)
✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है।
🔅 गणेश स्थापना का शुभ मुहूर्त 🔅
गणेश स्थापना पर्व में मध्याह्न के समय मौजूद (मध्यान्हव्यापिनी) चतुर्थी ली जाती है।
इस दिन रविवार या मंगलवार हो तो यह महाचतुर्थी हो जाती है।
अधिकतर विद्वानों के अनुसार गणेश स्थापना 19 सितंबर 2023 को उदियातिथि के अनुसार करना चाहिए।
19 सितंबर को गणेश स्थापना और पूजन के लिए मध्याह्न मुहूर्त : सुबह 11:01:23 से दोपहर 01:28:15 तक का है।
पंचांग के अनुसार 19 सितंबर 2023 मंगलवार के दिन स्‍वाति नक्षत्र 19 सितंबर की सुबह से लेकर दोपहर 01 बजकर 48 तक रहेगा।
इसके बाद विशाखा नक्षत्र शुरू होगा जो रात तक रहेगा। इन दोनों नक्षत्रों को बेहद शुभ माना जाता है।
दरअसल, स्वाति नक्षत्र होने से ध्वजा और इसके बाद विशाखा नक्षत्र होने से श्रीवत्स नाम के 2 शुभ योग बनेंगे।
इसके साथ ही इस दिन वैधृति योग भी रहेगा। अत: निश्चिंत होकर आप 19 सितंबर को हमारे बताए मुहूर्त के अनुसार गणेशजी की स्थापना करके पर्व को मनाएं।
⏺️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
क्या कोई ऐसा मंत्र है, जिसको सिद्ध कर अपनी मनोकामना पूरी कर सकते हैं, अगर हां तो उसे कैसे और कितनी बार जाप करें?
ब्रह्मांड में जितने भी मंत्र हैं वो महादेव द्वारा कील किये हुए हैं, आप समझ सकते हैं कि कोई भी मंत्र इतनी आसानी से सिद्ध करना मुमकिन नहीं हैं।
पहले योग्य गुरु धारण कीजिये, बाद में उनके आदेश अनुसार जो मंत्र उनके द्वारा दीया जाए वो मंत्र ही काम करेगा।
बाद में मंत्र सिद्धि के लिए अगर गुरु की आज्ञा हुई तो आप वो मंत्र ले सकते हैं। जब गुरु आपको मंत्र देते हैं तब वो मंत्र का उत्कीलन करके देते हैं। आप गुरु की आज्ञा ले कर किसी मंत्र को सूर्य या चंद्र ग्रहण के पुण्यकाल में विधी अनुसार हवन करके जाप करेंगे तो वो पुण्यकाल मंत्र सिद्धि के लिए उत्तम हैं लेकिन भूलना मत गुरुजी की आज्ञा होनी चाहिए।
🍃 आरोग्य संजीवनी ☘️
सुन्दरता वृद्धि में सहायक
एक ग्रन्थ में बताया है कि जो लोग बहुत आराम से एक-एक घूंट करके पानी पीने की आदत बना लेते हैं, उनके चेहरे पर निखार आता चला जाता है। सुन्दरता में वृद्धि होती है।
चमकदार त्वचा और जवां बने रहने हेतु पानी पीने के पहले 3 से 4 बार बहुत गहरी श्वांस लेकर धीरे-धीरे छोड़ना चाहिए, फिर पानी पिएं।
जल को सदैव सम्मान के साथ, अच्छे विचारों से, पवित्र भाव से पीना चाहिए।
मासिक धर्म की समस्या से निजात-
जिन स्त्रियों, महिलाओं, नवयौवनाओं को अक्सर माहवारी से सम्बंधित परेशानी या विकार हों, उन्हें सुबह उठते ही बिना कुल्ला किये खाली पेट 2 से 3 गिलास पानी जरूर पीना चाहिए।
आयुर्वेद के अनुसार अकेला सादा पानी भी प्रतिरक्षा तन्त्र को बहुत मजबूत कर देता है। पानी पीने से शरीर के 100 से अधिक विकार मूत्र विसर्जन केद्वारा बाहर निकल जाते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
अलख निरंजन ‘ का शाब्दिक अर्थ क्या है? सन्यासी इसका उच्चारण क्यों करते रहते हैं?
अलख संस्कृत भाषा के शब्द अलक्ष्य (न लक्ष्यते लक्षकर्म्मणि) का तद्भव रूप है। जो लक्ष्य न हो पाए वह अलक्ष्य है। जिसे पारिभाषित नहीं किया जा सकता है; जिसका भेद करना सम्भव नहीं है; जिसे जाना न जा सके; जो दृश्य नहीं है; जो ज्ञात नहीं है; जो प्रत्यक्ष न हो; जो अगोचर हो; जो चिह्नित न किया जा सके; जो किसी भी प्रकार की प्रवृत्तियों से युक्त न हो। परब्रह्म ईश्वर के लिए यही कुछ कहा जाता है।
1. जो दिखाई न पड़े । जो नजर न आए । अदृश्य । अप्रत्यक्ष । उ॰—बुधि, अनुमान, प्रमान, स्त्रुति किऐं नीठि ठहराय । सूछम कटि परब्रह्म की, अलख, लखी नहि जाय ।-बिहारी र॰, दो॰ 648 ।
2. अगोचर । इंद्रियातीत । उ॰—जे उपमा पटतर लै दीजै ते सब उनहिं न लायक । जौ पै अलख रह्मौ चाहत तौ बादि भए ब्रजनायक ।-सूर॰, 2 ।4648 ।
3. ईश्वर का एक विशेषण । उ॰—प्रलख अरूप अबरन सो करता । वह सबसों सब वहि सों बरता ।-जायसी (शब्द॰) । मुहा॰—अलख जगाना=(1) पुकारकर परमात्मा का स्मरण करना या कराना । (2) परमात्माके नाम पर भिक्षा माँगना । यौ॰—अलखधारी अलखनामी । अलखनिरंजन ।अलखपुरुष= ईश्वर । अलखमंव=निर्गुण संत संप्रदाय में ईश्वर मंत्र । निरञ्जन (निर्गतमञ्जनं कज्जलं तदिव समलमज्ञानं वायस्मात्) वह है जो बिना अञ्जन का हो; दोषरहित हो; अज्ञान से रहित हो; जो किसी भी प्रकार की माया से प्रभावित न हो; निर्मल हो; किसी प्रकार के आवेग, वासना, लालसा, राग, क्रोध, अनुराग, आदि गुणों से युक्त न हो; निष्कलङ्क हो; निर्गुण हो; उसे निरञ्जन कहा जाता है। महादेव, शिव, अथवा ईश्वर के लिए इस विशेषण का प्रयोग किया जाता है। 1. अंजन रहित । बिना काजल का । जैसे, निरंजन नेत्र । 2. कल्मषशून्य़ । दोषरहित । 3. माया से निर्लिप्त (ईश्वर का एक विशेषण) । 4. सादा । बिना अंजन आदि का । _1. परमात्मा ।
2. महादेव ।
अतः अलख निरञ्जन का आह्वान उस निर्गुण, निराकार, अपरभाषित ईश्वर के लिए है; यह अलख निरञ्जन का उद्घोष गोरक्षनाथ (अथवा गोरखनाथ) ने आरम्भ किया मानते हैं। कहते हैं कि इसी उद्घोष के साथ गोरखनाथ ने भर्तृहरि को दीक्षा के लिए प्रेरित किया।
तो कुछ इसे भगवान दत्तात्रेय का जयघोष कहते हैं।
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल कादान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति कीपूजा के उपरान्त मोदक,बेशन के लड्डू एवं विशेष रूपसे दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
ज्योतिष शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता हैवह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्तिबुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेमभाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करनापड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।

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