Aaj ka Panchang आज का पंचांग सोमवार, 02 अक्टूबर 2023
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 02 अक्टूबर 2023
02 अक्टूबर 2023 दिन सोमवार को अश्विन मास के कृष्ण पक्ष कि तृतीया तिथि है। आज संकष्टि श्रीगणेश चतुर्थी व्रत है। आज चंद्रोदय रात्री 07:48 बजे होगा उसके उपरान्त ही चन्द्रमा को अर्घ्य दिया जाएगा। आज गाँधी जी एवं शास्त्री जी की जन्म जयंती है। आज तीसरे दिन का श्राद्ध किया जाएगा। जो पितर लोग अब इस संसार में नहीं हैं, और जिनकी वर्ष भर के किसी भी तृतीया तिथि में मृत्यु हुई हो उन सभी का आज ही श्राद्ध किया जाएगा। आप सभी सनातनियों को “गाँधी जी एवं शास्त्री जी के जन्म जयन्ती तथा तृतीया श्राद्ध” की हार्दिक शुभकामनायें।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
🌤️ मास – आश्विन मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – आश्विन मास कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 07:36 AM तक उपरांत चतुर्थी तिथि 06:12 AM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि के स्वामी :- तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर देव जी और चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश जी है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र भरणी 06:24 PM तक उपरांत कृत्तिका
🪐 नक्षत्र स्वामी : नक्षत्र का स्वामी शुक्र ग्रह होता है। नक्षत्र के देवता यम होते हैं।
📣 योग – हर्षण योग 10:28 AM तक, उसके बाद वज्र योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 07:36 ए एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 06:48 पी एम तक बालव – 06:11 ए एम, अक्टूबर 03 तक
🔥 गुलिक काल : – सोमवार का शुभ (गुलिक काल) दोपहर 1:30 से 3 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – सोमवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से दर्पण देखकर, दूध पीकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह -7:30 से 9:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:06:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:54:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:37 ए एम से 05:26 ए एम
🌆 प्रातः सन्ध्या : 05:02 ए एम से 06:14 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:47 ए एम से 12:34 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:09 पी एम से 02:56 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:06 पी एम से 06:31 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 06:06 पी एम से 07:19 पी एम
💧 अमृत काल : 01:49 पी एम से 03:21 पी एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:46 पी एम से 12:35 ए एम, अक्टूबर 03
🚓 यात्रा शकुन- मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ सौं सोमाय नम:।
🤷🏻♀️ आज का उपाय-किसी विप्र को चांदी भेंट करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय- पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – श्री गणेश संकष्टी चतुर्थी व्रत (चंद्रोदय रात्रि 8:26 मि.)/चतुर्थी श्राद्ध/ भरणी श्राद्ध, राष्ट्रपिता मोहनदास करमचंद गांधी जयंती, अंतरराष्ट्रीय अहिंसा दिवस, गांधी जयंती, लालबहादुर शास्त्री जन्म दिवस, गिनी स्वतंत्रता दिवस, स्वतंत्रता सेनानी प्रजापति मिश्र जयन्ती, अभिनेत्री आशा पारेख जन्म दिवस, वन्य जीव सप्ताह (2 से 8 अक्टूबर)
✍🏼 विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी जाती है
🪷 Vastu tips 🌸
ये वास्तुदोष हो सकते हैं वजह— आचार्य श्री गोपी राम के अनुसार बेडरुम में बिस्तर के सामने कई भी आईना नहीं लगाना चाहिए इसे अच्छा नहीं माना जाता हैं। ये वास्तुदोष होने की एक बड़ी वजह हैं। अगर आपके घर में भी ऐसा है तो इसे तुरंत बदल दें। ऐसे घरों में पति पत्नी के बीच हमेशा झगड़े होते रहते हैं साथ ही सुख शांति भी चली जाती हैं। अगर आप आईने को हटा नहीं सकते हैं तो ऐसे में आप एक मोटे कपड़े से इसे ढक जरूर दें।
इसके अलावा अगर घर की रसोई में एक ही दिशा में गैस स्टोव और पानी का स्तोत्र है तो यह भी मुख्य कारण हो सकता हैं वास्तुदोष का, ऐसे में इसे तुरंत ही हटा देना बेहतर होगा। आप चाहे तो रसोई में गैस दक्षिण दिशा में रख सकते हैं इसे शुभ माना गया हैं। वास्तु अनुसार जिन घरों में खिड़की दरवाजों से आवाज़ आती है या फिर कहीं से कोई दरवाजा टूटा हुआ है तो इसे भी अच्छा नहीं माना जाता हैं। इनसे नकारात्मक शक्ति पैदा होती हैं जो वास्तुदोष का कारण बनती हैं इसलिए इन्हें जितनी जल्दी हो सके ठीक करवा लेना बेहतर होगा
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
थकान मिटाने हेतु ध्यान-भजन करने बैठे और थकान लगे तो क्या करे ? पलथी मार के बैठो और शरीर को चक्की कि नाई गोल घुमाओ | अनाज पीसने कि हाथ्वाली चक्की घूमती है न गोल, ऐसे थोड़ी देर घुमाओ, फिर उसकी विपरीत दिशा में भी घुमाओ | फिर अपने-आप घूमेगा थोड़ी देर |इससे थकान मिटेगी, ताजगी आयेगी |
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
पेट साफ करने के लिए सब से बेहतर चीज क्या है?
करेला थोड़ा ले लीजिए, खीरा ले लीजिए, टमाटर ले लीजिए, और तीनों का जूस बना लीजिए और सुबह खाली पेट पी लीजिए, उसमें नींबू डाल सकते हैं।
थोड़े ही देर में आपका पेट पूरी तरह साफ हो जाएगा, और दो-चार दिन पीजिए पूरी तरह पेट साफ हो जाएगा।
आप चाहे तो चुकंदर गाजर खीरा लौकी का भी आप जूस पी सकते हैं, पालक नींबू, लौकी चख कर ही डाले, कद्दू अदरक डालकर जूस बनाकर पी सकते हैं, इसमें कल नींबू चाट मसाला वगैरा डालकर भी पी सकते हैं, सफेद पेठे का जूस भी पी सकते हैं , यह सब पेट साफ करने के लिए ही है।
और एक साधारण सा और उपाय है एनिमा अगर मिल जाए तो उससे बहुत आसानी से पेट साफ हो जाता है ।
एनिमा ले लीजिए जब भी कभी ऐसा हो तो एनिमा से बहुत आसानी से पेट साफ हो जाता है।
अपने लाइफ में फल सलाद सब्जियां भरपूर मात्रा में शामिल कीजिए धीरे-धीरे धीरे-धीरे हमारा पेट पूरी तरह साफ रहेगा।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
भारत पर ब्राह्मणों ने कब शासन किया जो शूद्र उनसे नफरत करने लगे?
ये सत्य है कि कुछ स्वार्थी और दरबारी ब्राह्मणों ने अपने स्वार्थ के लिए ब्राह्मणों के नाम को कलंकीत किया है । लेकिन उनकी गलती के लिए सम्पूर्ण ब्राह्मण समाज की नींदा करना सर्वथा अनुचित है । अच्छे और बुरे लोग किस समाज में नहीं थे ? हर बात के लिए ब्राह्मणों को दोष देना ठीक नहीं है । ब्राह्मणों में केवल दोष निकालना उचित नहीं होगा, उनके गुणों और उनके द्वारा किये गए अच्छे कार्यों को भी देखना होगा । जब-जब भी इस राष्ट्र पर संकट आया तो ब्राह्मणों ने आगे आकर समाज को रास्ता दिखाया । आवश्यकता पड़ने पर ये देश के लिए बलिदान देने से भी पीछे नहीं हटे । ब्राह्मणों को दलितों के शत्रु के रूप में दिखाना इस देश को तोड़ने वाली शक्तियों का ही प्रपंच है । निःसंदेह अंबेडकर जी बहुत महान बने, लेकिन उन्हें महान बनाने में उनके ब्राह्मण गुरु अंबेडकर का भी योगदान कम नहीं था ।
स्वतंत्रता से पहले 800 सालों तक इस देश पर तथाकथित “समतावादी” विदेशियों का शासन रहा था । इस कालखंड में कितने दलितों को इन लोगों ने राजा, मंत्री, सुबेदार, मनसबदार आदि बनाया था ? इनके शासन में शूद्रों की दुर्दशा ही हुई थी । भारतीय कारीगरों और कामगारों के प्रति उनका बहुत ही सौतेला और अन्यायपूर्ण व्यवहार रहा था । वो भारतीयों की तरह सब के प्रति करूणा और दया के सिद्धांत पर नहीं चलते थे । ये कहना कि ब्राह्मणों ने अन्य जाति के लोगों को आगे बढ़ने नहीं दिया केवल एक बहाना मात्र है । मुट्ठी भर लोग अन्य लाखों करोड़ों की आबादी को कैसे आगे बढ़ने से रोक सकते थे ? कब तक वो उन्हें भ्रमित कर सकते थे ? ऐसे अनेक उदाहरण हैं जहाँ शूद्र जाति के लोगों ने भी ऊँचाई को प्राप्त किया था । जो आगे बढ़ने के लिए सतत प्रयत्न करेगा उसे कोई रोक नहीं सकता है चाहे परिस्थितियाँ कितनी भी विपरीत हों ।
ब्राह्मण “ब्रम्ह” अर्थात् “ईश्वर” के उपासक को कहा गया है । ब्राह्मण का जीवन त्याग और तपस्या का था । सांसारिक भोग-विलास के साधनों को त्याग कर सत्य और धर्म के मार्ग पर चलना इतना आसान नहीं है । ब्राह्मणों ने समाज में सम्मान ऐसे ही नहीं पा लिया । ये सम्मान पाने के लिए उन्हें बहुत कुछ खोना भी पड़ा था । ब्राह्मणों का जीवन सादगी भरा होता था । प्रभु भक्ति, पुजा, ध्यान, अध्ययन, अध्यापन आदि करते हुए ही उनका जीवन व्यतीत होता था । उनकी जीविका का मुख्य साधन भिक्षा और दक्षिणा थी । राजाओं और धनीकों की तरह वो बड़े- बड़े महलों या भवनों में नहीं रहते थे, घोड़े और हाथियों पर भी नहीं चलते थे न ही कीमती वस्त्र और आभूषण ही धारण करते थे । दूसरों की तरह ब्राह्मण मांस और मदिरा का भी सेवन नहीं करते थे । ब्राह्मण अगर धन संग्रह करने वाले होते तो सुदामा को कभी श्रीकृष्ण के पास कुछ मांगने के लिए नहीं जाना पड़ता न ही द्रोण को अपने पुत्र के दुध के लिए द्रुपद के यहाँ अपमानित होना पड़ता।
इस राष्ट्र के निर्माण में सभी का योगदान है । ब्राह्मणों के योगदान को भी ये राष्ट्र और ये विश्व कभी भुला नहीं सकता है । ब्राह्मणों ने मानव मात्र के कल्याण की बात कही थी । आज जो इस देश में “वसुंधैव कुटुंबकम्”, “सर्वे भवंतु सुखिनः”, “असतो मा सद्गमय”, “सत्यमेव जयते” और “मनुर्भव जनयः” जैसी बातें कही जाती हैं जो कि भारतीय दर्शन और संस्कृति की पहचान बन चुकी है, वो ब्राह्मण ऋषियों द्वारा ही कही गई थी । चाहे दर्शन शाश्त्र हो, विज्ञान हो, गणित हो, अर्थ शास्त्र हो या खगोल शास्त्र, हर क्षेत्र में उनका योगदान अतुलनीय है । आयुर्वेद और योग शास्त्र की खोज ब्राह्मणों ने ही की है । ये वेद, उपनिषद आदि ब्राह्मणों की ही कृति है । वशिष्ठ, विश्वामित्र, गौतम, भारद्वाज, अगस्त, कपिल, कणाद, पतंजलि और पाणिनि से लेकर चाणक्य और आर्यभट्ट जैसी महान विभूति ब्राह्मण ही थे । आधुनिक भारत को भी सर्वप्रथम स्वतंत्रता की राह बाल गंगाधर तिलक, गोपाल कृष्ण गोखले और सुरेंद्रनाथ बनर्जी जैसे लोगों ने ही दिखाया था । ब्राह्मणों ने समाज को बहुत कुछ दिया था । उन्हें पारजीवी कहना गलत होगा ।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।
तृतीया तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति मानसिक रूप से अस्थिर होता है अर्थात उनकी बुद्धि भ्रमित होती है। इस तिथि का जातक आलसी और मेहनत से जी चुराने वाला होता है। ये दूसरे व्यक्ति से जल्दी घुलते मिलते नहीं हैं बल्कि लोगों के प्रति इनके मन में द्वेष की भावना भी रहती है। इनके जीवन में धन की कमी रहती है, इन्हें धन कमाने के लिए काफी मेहनत और परिश्रम करना पड़ता है।


