ज्योतिष

Aaj ka Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 26 अक्टूबर 2023

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 26 अक्टूबर 2023

26 अक्टूबर 2023 दिन गुरुवार को अश्विन मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी उपरान्त त्रयोदशी तिथि है। आज प्रदोष व्रत है। आज पद्मनाभ द्वादशी भी है। आज द्वादशी में दूध दान करके फिर कार्तिक मास में दाल का त्याग करने का व्रत आरंभ हो जाता है। आप सभी सनातनियों को “पद्मनाभ द्वादशी एवं प्रदोष व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) – गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
यदि गुरुवार को स्त्रियां हल्दी वाला उबटन शरीर में लगाएं तो उनके दांपत्य जीवन में प्यार बढ़ता है।और कुंवारी लड़कियां / लड़के यह करें तो उन्हें योग्य, मनचाहा जीवन साथी मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2023 विक्रम संवत : 2080 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ अयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि :- द्वादशी 9.44 AM तक तत्पश्चात त्रियोदशी
✏️ तिथि का स्वामी – द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री विष्णु जी और त्रियोदशी तिथि के स्वामी कामदेव जी है ।
💫 नक्षत्र – पूर्व भाद्रपद 11.27 AM तक तत्पश्चात उत्तर भाद्रपद
🪐 नक्षत्र के देवता, ग्रह स्वामी – पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के देवता अजैकपाद तथा स्वामी देवगुरू बृहस्पति हैं ।
📣 योग :- ध्रुव 8.50 AM तक तत्पश्चात व्याघात
प्रथम करण :- बालव 09.44 AM तक
द्वितीय करण :- कौलव 20.19 PM तक तत्पश्चात तैतिल
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:23:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:37:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:46 ए एम से 05:37 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:12 ए एम से 06:28 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:42 ए एम से 12:27 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 01:57 पी एम से 02:42 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:41 पी एम से 06:07 पी एम
🏙️ सायाह्न सन्ध्या : 05:41 पी एम से 06:58 पी एम
💧 अमृत काल : 05:01 ए एम, अक्टूबर 27 से 06:29 ए एम, अक्टूबर 27
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:40 पी एम से 12:31 ए एम, अक्टूबर 27
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏽 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-शिवजी का हरिद्रामिश्रित जल से अभिषेक करें।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – प्रदोष व्रत/अन्नप्राशन, राष्ट्रीय कद्दू दिवस, राष्ट्रीय चिकन फ्राइड स्टेक दिवस, अभिनेत्री रवीना टंडन, आसिन जन्म दिवस, राष्ट्रीय माइक्रोनीडलिंग दिवस, राष्ट्रीय खच्चर दिवस, राष्ट्रीय मिंसमीट दिवस, राष्ट्रीय कद्दू दिवस, प्रसिद्ध कन्नड़ कवि दत्तात्रेय रामचन्द्र बेंद्रे स्मृति दिवस, गणेशशंकर विद्यार्थी जयंती, पंचक जारी
✍🏼 विशेष – द्वादशी तिथि को मसूर की दाल एवं मसूर से निर्मित कोई भी व्यंजन नहीं खाना न ही दान देना चाहिये। यह इस द्वादशी तिथि में त्याज्य बताया गया है। द्वादशी तिथि के स्वामी भगवान श्री हरि नारायण हैं। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का श्रद्धा-भाव से पूजन करना चाहिये। साथ ही भगवान नारायण के नाम एवं स्तोत्रों जैसे विष्णुसहस्रनाम आदि के पाठ एवं जप से धन, यश एवं प्रतिष्ठा की प्राप्ति होती है।
🗽 वास्तु टिप्स 🏝️
घर के मंदिर में घी का एक दीपक हर रोज जलाएं और शंख की ध्वनि तीन बार सुबह और शाम के समय करने से घर की नकारात्मक ऊर्जा घर से बाहर निकल जाती है और ईश्वर का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
अपने सिर को धूप से बचाना चाहिए | जो सिर पर धूप सहते हैं उनकी स्मरणशक्ति, नेत्रज्योति और कानों की सुनने की शक्ति क्षीण होने लगती है | ४२ साल के बाद बुढापा शुरू होता है, असंयमी और असावधानीवालों का दिमाग कमजोर हो जाता है | गर्मियों में नंगे सिर धूप में घूमने से पित्त बढ़ जाता है, आँखें जलती हैं | अत: सिर को धूप से बचाओं, अपने को दुःखों से बचाओ, मन को अहंकार से बचाओ और जीवात्मा को जन्म-मरण से बचा के परमात्मा से प्रेम करना सिखा दो !
☘️ स्वास्थ्य संजीवनी 🌿
होली के बाद के 20 – 25 दिन नीम के 20 – 25 कोमल पत्ते व 1 – 2 काली मिर्च खा लो या नीम के फूलों का रस 1 – 2 काली मिर्च का चूर्ण डालकर पी लो | इससे शरीर में ठंडक रहेगी और गर्मी झेलने की शक्ति आयेगी, पित्त-शमन होगा और व्यक्ति वर्षभर निरोग रहेगा |
📖 गुरु भक्ति योग_
🕯️
प्रदोष तिथि को भगवान भोलेनाथ जी का ब्रत रखा जाता है। मान्यता है कि जो जातक प्रदोष का व्रत रख कर संध्या के समय शंकर जी की आराधना करते हैं उन्हें योग्य जीवन साथी मिलता है, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बना रहता है ।
प्रदोष ब्रत रखने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है, साथ ही जातक के सभी संकट दूर हो जाते हैं ।
प्रदोष व्रत के दिन भगवान भोलेनाथ जी की पूजा जाती है । मान्यता है कि इस दिन भगवान शिव के साथ-साथ माता पार्वती का पूजन करने से जीवन में सुख – सौभाग्य की वर्षा होती है।
जो जातक प्रदोष का व्रत रख कर संध्या के समय शंकर जी की आराधना करते हैं उन्हें योग्य जीवन साथी मिलता है, दाम्पत्य जीवन में प्रेम और सहयोग बना रहता है ।
प्रदोष व्रत में सूर्यास्त से लगभग 45 मिनट पहले और सूर्यास्त के 45 मिनट बाद तक पूजा करने का विशेष महत्त्व है ।
प्रदोष ब्रत रखने से सुख-समृद्धि और सौभाग्य में वृद्धि होती है, साथ ही जातक के सभी संकट दूर हो जाते हैं ।
इस दिन सम्पूर्ण शिव परिवार का पूजन करने से भगवान शिव अपने भक्त पर बहुत प्रसन्न होते है । प्रदोष व्रत को महिलाएं अखंड सौभाग्य की प्राप्ति के लिए रखती हैं।
प्रदोष को प्रदोष कहने के शास्त्रों में एक मिलती है। माना जाता है कि एक बार चंद्र देव को क्षय रोग हो गया, जिसके कारण उन्हें बहुत कष्ट हो रहा था।
अपने रोग के निवारण के लिए चंद्र देव जी भगवान शिव के पास गए, प्रभु ने चंद्र देव के क्षय रोग का निवारण त्रयो करके उन्हें त्रियोदशी के दिन ही पुन:जीवन प्रदान किया था तभी से इस दिन को प्रदोष कहा जाने लगा है ।
प्रदोष व्रत में फलाहार किया जाता है इस व्रत में अन्न, चावल, लाल मिर्च, सादा नमक का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
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⚜️ आज द्वादशी तिथि के दिन तुलसी नहीं तोड़ना चाहिये। आज द्वादशी तिथि के दिन भगवान नारायण का पूजन और जप आदि करने से मनुष्य का कोई भी बिगड़ा काम भी बन जाता है। यह द्वादशी तिथि यशोबली अर्थात यश एवं प्रतिष्ठा प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि सर्वसिद्धिकारी अर्थात अनेकों प्रकार के सिद्धियों को देनेवाली तिथि भी मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वादशी तिथि शुक्ल पक्ष में शुभ तथा कृष्ण पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
द्वादशी तिथि में जन्म लेनेवाले व्यक्ति का स्वभाव अस्थिर होता है। इनका मन किसी भी विषय में केन्द्रित नहीं हो पाता है। इस व्यक्ति का मन हर पल चंचल बना रहता है। इस तिथि के जातक का शरीर पतला व कमज़ोर होता है। स्वास्थ्य की दृष्टि से इनकी स्थिति अच्छी नहीं होती है। ये यात्रा के शौकीन होते हैं और सैर सपाटे का आनन्द लेते रहते हैं।

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