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शिक्षक ने ऐसी अखल जगाई की अब ग्रामीण क्षेत्र मे रक्तदान के प्रति लोगो की सोच ही बदल गई

रिपोर्टर : कुलदीप चौरसिया
जैसीनगर । रक्तदान जीवनदान इस स्लोगन को आत्मसात कर सरकारी शिक्षक ने ऐसी अखल जगाई की अब ग्रामीण क्षेत्र मे रक्तदान के प्रति लोगो की सोच ही बदल गई इतना ही नही यह टीचर स्वयं रक्तदान कर लोगों की जान बचा रहे है….
सागर जिले के जैसीनगर तहसील अंतर्गत शासकीय प्राथमिक शाला ओरिया में पदस्थ शिक्षक सौमित्र पांडे जिनके जुनून से आज ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान के प्रति जागरूकता आई है और लोग बढ़-चढ़कर रक्तदान करने लगे हैं और अब तो महिलाएं भी रक्तदान करने आगे आ रही हैं। सौमित्र पांडे जिला चिकित्सालय के सहयोग से ग्रामीण अंचलों में रक्तदान शिविर का आयोजन करते हैं और आज जैसीनगर में सातवां रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया।
पैशे से सरकारी शिक्षक सौमित्र पांडे बताते हैं कि साल 2019 में उनकी कजिन सिस्टर को डेंगू हुआ था। बुंदेलखंड मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया और रक्त की अति आवश्यकता थी लेकिन रक्त नहीं मिला फिर उन्हें भोपाल ले गए और ब्लड डोनेट होने के बाद वह रिकवर हो पाई, और इस घटना के बाद मैंने तय किया कि लोगों को रक्तदान के प्रति जागरूक करना है, और 2020 में इस कार्य को प्रारंभ किया और शहरी क्षेत्र में रक्तदाता सीमित होते हैं वह अकेले कितनी बार रक्तदान करे और मैं ग्रामीण क्षेत्र में पदस्थ था और ग्रामीण क्षेत्र में ही लोगों मे जागरूकता लाने के लिए मैंने जीवन एक अवसर समिति के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में रक्तदान शिविर का आयोजन करना शुरू किया, शुरू शुरू में काफी परेशानी गई, लोगों में जागरूकता नहीं थी लेकिन धीरे धीरे लोग जागरूक हुए और अब तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी रक्तदान करने के लिए आगे आने लगी है।
वही सौमित्र पांडे की समिति में आज कई युवा जुड़े हुए हैं जो कभी भी लोगों को ब्लड की जरूरत होती है तो वह आगे आकर ब्लड डोनेट करते हैं और आज वह इस तरह से सैकड़ो लोगों की जान बचा चुके हैं वहीं सौमित्र पांडे भी लगभग 15 बार और उनकी टीम के सदस्य भी कई बार रक्तदान कर लोगों की जान बचा चुके हैं।
इसके साथ ही सागोनी पुरैना गांव के विक्रम ठाकुर जिन्होंने आज 34 बार रक्तदान किया, तेंदूडाबर गांव के नरेंद्र ठाकुर ने नवमी बार, जैसी नगर के गोपाल नामदेव 27 बार, लक्ष्मण पटेल 12 बार वी रक्तदान कर चुके है उन्होंने कहा कि रक्तदान करने से किसी भी प्रकार की कमजोरी नहीं आती है। अगर हमारे रक्त से किसी की जान बचाई जा सकती है तो इससे बड़ा पुण्य का कार्य हो नहीं सकता । साथ ही उन्होंने सौमित्र पांडे के इस नेक कार्य की काफी सराहना की है।

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