शासकीय शालाएं उनकी शालाएं हैं जिनकी कोई आवाज नहीं : अनंत गंगोला

सिलवानी । शिक्षक के पास छात्र केवल किताबें लेकर नहीं आते वह अपने साथ झिझक, संकोच, डर, प्यार भी लाते हैं। शिक्षक अपने विद्यार्थी से प्यार के साथ उनका सम्मान भी करना सीखें, शिक्षक वही है जो सीखना बंद नहीं करता, वही सीखा हुआ अपने छात्रों को सिखाता रहता है। आज समाज में पढ़े लिखे तो हैं लेकिन पढ़ते लिखते हुए लोगों की बहुत कमी है। हमे अपने विचारों में मौलिकता लानी होगी, आज हम विचारों तक पर दूसरों पर निर्भर हैं, यह निर्भरता त्याग कर ही अलग मार्ग बनाकर समाज को नयापन दे पाएंगे।
उक्ताशय के विचार शुक्रवार को सरस्वती विद्या मंदिर सिलवानी में शिक्षाविद अनंत गंगोला ने अपने व्यक्त किए, वह शिक्षा संवाद कार्यक्रम में सिलवानी एवम अन्य विकास खंड के शिक्षकों के बीच उपस्थित थे।
इस अवसर पर बरेली के शिक्षक महेश शर्मा के बाल कविता संग्रह का विमोचन भी अनंत गंगोला ने किया।
प्रस्तुत बाल कविता संग्रह में अनेक कविताएं बच्चों एवम शिक्षकों के लिए पठन पाठन में सहयोगी हैं।
कार्यकम की अध्यक्षता प्रजासेवक जैन पूर्व विकासखंड शिक्षा अधिकारी ने की। संचालन योगेंद्र सिंह रघुवंशी एवम आभार सुरेंद्र सिंह रघुवंशी ने किया।कार्यक्रम में प्रश्नमंच द्वारा शिक्षकों की अनेक जिज्ञासाओं का समाधान गंगोला जी द्वारा हुआ।



