सावन के प्रथम सोमवार पर कांवड़ यात्रा: मढ़भटुआ धाम में भगवान जागेश्वर महादेव का जलाभिषेक

रिपोर्टर : कृष्णकांत सोनी
सिलवानी । रायसेन जिले के बोरास घाट से नर्मदा जल लेकर आए लगभग 50 कांवडिय़ों ने सावन के प्रथम सोमवार को मढ़भटुआ धाम में भगवान जागेश्वर महादेव का जलाभिषेक किया। यह कांवड़ यात्रा पिछले चार वर्षों से ग्राम सियरमऊ के शिव भक्तों द्वारा आयोजित की जा रही है।
इस साल भी 20 जुलाई, शनिवार की अलसुबह 50 कांवडिय़ों का जत्था जल भरने रायसेन जिले के बोरास घाट मां नर्मदा के तट पर पहुंचा। 21 जुलाई को मां नर्मदा की पूजा-अर्चना कर सभी भक्तों ने अपनी कांवड़ भरी। ‘जय भोले, जय शिव शंकर, हर हर महादेव, जय बाबा भूतनाथ’ के जयकारे लगाते हुए भक्तों ने पैदल यात्रा शुरू की। इस दौरान कावडियों का जगह जगह स्वागत सत्कार किया गया।
22 जुलाई, सोमवार को सावन माह के प्रथम सोमवार को कांवडिय़ों का यह जत्था सुल्तानगंज तहसील के सिद्ध धाम मढ़भटुआ मंदिर पहुंचा। वहां पहुंचकर सुप्रसिद्ध स्वयंभू प्रगट भगवान जागेश्वर महादेव का अभिषेक किया गया। इस यात्रा में ग्राम सियरमऊ सहित आसपास के क्षेत्र के महादेव भक्त भी शामिल रहे।
कांवड़ यात्रा के दौरान भक्तों ने अद्भुत उत्साह और श्रद्धा का प्रदर्शन किया। यात्रा का मार्ग भक्तों के जयकारों और भजनों से गूंज उठा। कांवड़ यात्रा के दौरान भक्तों में विशेष उत्साह देखा गया। वे पूरे रास्ते भोले की भक्ति में मग्न हो नाचते गाते चलते रहे।
यात्रा के दौरान भक्तों ने एक दूसरे का साथ देते हुए यात्रा पूरी की और सभी ने मिलकर भगवान जागेश्वर महादेव के चरणों में नर्मदा जल अर्पित किया। यात्रा के समापन पर सभी भक्तों ने भगवान से सुख-समृद्धि और स्वास्थ्य की कामना की।
यात्रा के दौरान कावडियों ने बताया कि यह यात्रा उनकी आस्था और विश्वास का प्रतीक है। हर साल सावन के महीने में भगवान शिव की पूजा के लिए यह यात्रा आयोजित की जाती है। इससे न केवल धार्मिक आस्था मजबूत होती है, बल्कि लोगों में एकजुटता भी बढ़ती है।
इस अद्वितीय और धार्मिक यात्रा ने न केवल भक्तों के मन में भक्ति की भावना को जागृत किया बल्कि समाज में एकता और सद्भाव का संदेश भी फैलाया। कांवड़ यात्रा की सफलता और भक्तों की श्रद्धा ने ग्राम सियरमऊ और मढ़भटुआ धाम को एक बार फिर से भक्तिमय बना दिया।


