मध्य प्रदेश

खंडहर में तब्दील होता जा रहा कन्या शाला भवन, कई साल से कर रहा मरम्मत का इंतजार, जोखिम में बच्चों की जान

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
मड़ियादौ । दमोह जिला मुख्यालय से लगभग 60 किलोमीटर दूर हटा विकास खंड के प्राथमिक कन्या शाला मड़ियादौ में स्कूल भवन की दशा किसी अनहोनी का इंतजार कर रही है। स्कूल भवन के निर्माण को लगभग 100 वर्ष से ज्यादा पूरे होने को हैं और इसकी स्थिति दिनों दिन खराब होती नजर जा रही है। बरसात के समय में स्कूल के कमरों में पानी का रिसाव होता है, जगह.जगह पानी टपकता है, बच्चे ठीक से पढ़ाई नहीं कर पाते, लेकिन जवाबदार जिला प्रशासन और विभाग के अधिकारी इस मामले पर आंख बंद कर अनहोनी के इंतजार में हैं। भवन की दुर्दशा की जानकारी होने के बाबजूद भी जिला प्रशासन या शिक्षा विभाग इस पर कोई ठोस पहल करते दिखाई नहीं दे रहा है।
अब यह प्राथमिक कन्या शाला भवन अपनी जर्जर हालत की ओर बढ़ रहा है, जिसे मरम्मत की सख़्त ज़रूरत है। लगभग 10 वर्ष पूर्व इस शाला के आगे के बने हुए कच्चे खपरेल वाले कमरों को तोड़कर नया बनवाया गया था, तब से लेकर अब तक इस स्कूल भवन की छत में सुधार कार्य कराया जाता रहा है। स्कूल खंडहर जैसा होने के कारण स्कूल परिसर में बंदरों और पक्षियों का डेरा लगा रहता है। स्कूल छत की मरम्मत नहीं होने के कारण बार-बार सीमेन्ट प्लास्टर का गिरना और फिर उसी के नीचे इतने सारे बच्चों का स्कूल संचालित होना कहीं न कहीं किसी बड़ी दुर्घटना को न्योता देता प्रतीत हो रहा है।
अंग्रेजी शासन काल का है कन्या शाला भवन
मड़ियादौ बस्ती के बुजुर्गों से प्राप्त जानकारी अनुसार प्राथमिक कन्या शाला भवन अंग्रेजों के शासन काल का है, यह लगभग 130 साल पुराना भवन है। इसी विद्यालय में पढकर अनेकों छात्राएं कई बढ़े पदों पर कार्य करके रिटायरमेंट भी ले चुकी हैं। वर्तमान में विद्यालय में कक्षा पहली से पांचवीं तक लगभग 105 छात्राएं पढाई कर रही है और प्रधानाध्यापक के साथ अन्य शिक्षक भी पदस्थ हैं। छात्राओं के अध्ययन हेतु अलग अलग कमरों साथ अतिरिक्त कक्ष भी बनाये गये थे। लेकिन अतिरिक्त कक्ष पूर्णतः जर्जर हो चुके है और गिरने की स्थिति में है, इस कारण कक्ष के गेट पर ताला डाल कर रखा गया है ताकि कोई भी छात्रा कमरे में प्रवेश न कर सके।
बनी हुई है आकस्मिक अनहोनी की आशंका
इस संबंध में जानकारी देते हुए स्कूल के प्रधानाध्यापक ने बताया कि वह इसी सत्र से इस स्कूल में पदस्थ हैं और स्कूल की मरम्मत और अधूरी व्यवस्था को पूर्ण कराने के लिए उच्चाधिकारियों को मौखिक रूप से जानकारी दे चुके हैं। उन्होने बताया कि पूर्व में पदस्थ प्रधानाध्यापिका द्वारा भी पूर्व में अनेकोंवार विकासखंड शिक्षा अधिकारी और जिला शिक्षा अधिकारी को इस बात की जानकारी लिखित में दे चुकी हैं, लेकिन समय बीत जाने के बाद भी इस मामले पर स्थायी समाधान नहीं किया गया है, जिससे आकस्मिक अनहोनी की आशंका बनी रहती है।
इस संबंध में एमएल अहिरवार, बीआरसी हटा का कहना है कि कन्या शाला स्कूल से जर्जर भवन सुधार हेतु प्रधानाध्यापक का प्रस्ताव प्राप्त हुआ था, जिसका स्टीेमेट बनाकर जिला पंचायत कार्यालय भेज दिया गया था। जैसे ही स्वीकृति प्राप्त होती है, कार्य प्रारंभ कर दिया जावेगा।

Related Articles

Back to top button