नदी की बाढ मे झोंपड़ी सहित खाद्य सामग्री गृहस्थी का सामान हुआ तबाह सामान तबाह

ब्यूरो चीफ : भगवत सिंह लोधी
जबेरा । दमोह जिले के जनपद पंचायत जबेरा के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत बीजाडोंगरी के गांव बराखार ब्यारमा नदी तट पर निवास करते लेखन रैकवार पिता हिम्मा रैकवार भगतराम पिता देवा रैकवार, मोटू पिता गिरन रैकवार, वेवा अबधरानी रैकवार पति, स्वर्गीय श्री छैकोडी लाल रैकवार अपनी निजी कृषि भूमि पर खेती करते ओर वहीं पर 12 माह निवास करते हैं लोगों के पास कहीं निजी मकान नहीं है रहने के लिए वह अपने कृषि भूमि पर झोपड़ी बनाकर रह रहे है दिनांक 11 सितंबर 2024 को ब्यारमा नदी में आई बाढ से पीड़ित परिवारों की झोपड़ियों में बाढ का पानी भर जाने खाद्य सामग्री ओढ ने बिछाने के कपड़े बह गए बकरियों ओर पशुओं के साथ एक टीले पर दिन रात बैठे रहे ओर आवाज लगाते रहें कि सरकार हमें घर बनाने जमीन दे हमारी समस्त सामग्री झोपड़ी बाढ मे डूब गयी है लेकिन पीडितो की आवाज राजस्व विभाग ओर पुलिस विभाग तक सूचना पहुचाई गयी लेकिन किसी ने लोगों तक पहुचने का प्रयास नहीं किया कर्मचारी भगवान विश्वकर्मा के आने ओर झोपड़ी निर्माण करने की सलाह देते नजर आये दिनांक 12 सितंबर 2024 को ब्यारमा नदी के बाढ का पानी कम हुआ तब बराखार मौजा पटवारी हल्का नं, 22/15 घटना स्थल पर पहुंचे ओर उक्त घटना स्थल का अवलोकन कर लोगों से संबाद किया झोपड़िया देखी फोटो ग्राफी की तथा पंचनामा तैयार किया गया जिसमें ग्राम कोतवाल मुलूवा कोटवार, कल्याण सीगं लोधी, घनश्याम प्रसाद रैकवार भगतराम रैकवार गिरन रैकवार लेखन रैकवार मोटू रैकवार सझली बहू बडी बहू सुनीता रैकवार परिवार के समस्त सदस्य उपस्थित थे पीड़ित परिवारों का ब्यारमा नदी के किनारे कृषि भूमि है उसके अलावा कहीं मकान बनाने के लिए भूमि नहीं है इस लिए सभी लोगों ने आवास बनाने के लिए पटवारी से जगह मांगी है कि सरकारी जमीन स्थाई झोपड़ी व मकान बनाने के लिए भूमि उपलब्ध कराने की कृपा करें नहीं तो हमारा जीना मरना अपनी कृषि भूमि पर है ग्राम पंचायत द्वारा हम लोगो को प्रधानमंत्री आवास नहीं मिले हैं हम लोगो की दयनीय स्थिति ठीक नहीं है फिर भी अपनी कृषि भूमि पर अनाज ओर सब्जी एवं फल अमरूद कटहल बेच कर परिवारों का जीवन यापन कर रहे हैं।



