Today Panchang आज का पंचांग गुरुवार, 05 दिसम्बर 2024
आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला मुख्यालय हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
गुरुवार 05 दिसम्बर 2024
05 दिसम्बर 2024 दिन गुरुवार को मार्गशीर्ष मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि है। आज वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी का पावन व्रत है। आज भगवान श्रीगणेश जी की पूजा सनातनी माताओं-बहनों द्वारा अपने पुत्रों के दीर्घायु हेतु किया जाता है। आज शाम को गणपति पूजन के उपरान्त रात्रि चन्द्रमा के निकलने पर उन्हें देखकर अर्घ्य देकर ही अपना व्रत खोलती हैं। आज गुरुवार की पूर्णा तिथि है इसलिए सिद्धयोग का निर्माण भी हो रहा है। आज रवियोग है। आज यायीजययोग भी है। आप सभी सनातनियों को “वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनायें।।
मंगल श्री विष्णु मंत्र :-
मङ्गलम् भगवान विष्णुः, मङ्गलम् गरुणध्वजः।
मङ्गलम् पुण्डरी काक्षः, मङ्गलाय तनो हरिः॥
☄️ दिन (वार) गुरुवार के दिन तेल का मर्दन करने से धनहानि होती है । (मुहूर्तगणपति)
गुरुवार के दिन धोबी को वस्त्र धुलने या प्रेस करने नहीं देना चाहिए।
गुरुवार को ना तो सर धोना चाहिए, ना शरीर में साबुन लगा कर नहाना चाहिए और ना ही कपडे धोने चाहिए ऐसा करने से घर से लक्ष्मी रुष्ट होकर चली जाती है ।
गुरुवार को पीतल के बर्तन में चने की दाल, हल्दी, गुड़ डालकर केले के पेड़ पर चढ़ाकर दीपक अथवा धूप जलाएं ।
इससे बृहस्पति देव प्रसन्न होते है, दाम्पत्य जीवन सुखमय होता है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351
☣️ आयन – दक्षिणायन
☀️ ऋतु – सौर हेमंत ऋतु
🌤️ मास – मार्गशीर्ष मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – गुरुवार मार्गशीर्ष माह के शुक्ल पक्ष चतुर्थी तिथि 12:49 PM तक उपरांत पंचमी
✏️ तिथि स्वामी – चतुर्थी के देवता हैं शिवपुत्र गणेश। इस तिथि में भगवान गणेश का पूजन से सभी विघ्नों का नाश हो जाता है। यह खला तिथि हैं।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र उत्तराषाढ़ा 05:26 PM तक उपरांत श्रवण
🪐 नक्षत्र स्वामी – उत्तराषाढ़ा नक्षत्र का स्वामी सूर्य है। तथा राशि स्वामी गुरु है।
⚜️ योग – वृद्धि योग 12:27 PM तक, उसके बाद ध्रुव योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 12:49 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – 12:31 ए एम, दिसम्बर 06 तक बालव
🔥 गुलिक कालः- गुरुवार का (शुभ गुलिक) 03:33:00 से 05:08:00 तक
⚜️ दिशाशूल – बृहस्पतिवार को दक्षिण दिशा एवं अग्निकोण का दिकशूल होता है । यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से सरसो के दाने या जीरा खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल – दिन – 1:30 से 3:00 तक राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:45:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:25:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:11 ए एम से 06:05 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:38 ए एम से 07:00 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:51 ए एम से 12:33 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 01:56 पी एम से 02:38 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 05:21 पी एम से 05:49 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 05:24 पी एम से 06:46 पी एम
💧 अमृत काल : 10:59 ए एम से 12:36 पी एम 06:58 ए एम, दिसम्बर 06 से 08:33 ए एम, दिसम्बर 06
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:45 पी एम से 12:39 ए एम, दिसम्बर 06
💮 रवि योग : 07:00 ए एम से 05:26 पी एम
🚓 यात्रा शकुन-बेसन से बनी मिठाई खाकर यात्रा पर निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ ग्रां ग्रीं ग्रौं स: गुरुवै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-किसी विप्र को केसर भेंट करें।
🌳 *वनस्पति तंत्र उपाय-पीपल के वृक्ष में जल चढ़ाएं। ⚛️ पर्व एवं त्यौहार – वैनायकी श्रीगणेश चतुर्थी/ भद्रा/ भारत रत्न सम्मनित नेल्सन मंडेला स्मृति दिवस, साहित्यकार अवनीन्द्रनाथ ठाकुर स्मृति दिवस, अभिनेत्नी नादिरा जन्म दिवस, क्रांतिकारी एच. सी. दासप्पा जन्म दिवस, भारत मे होमगार्ड संगठन स्थापना दिवस, एस. सुब्रह्मण्य अय्यर, स्वतंत्रता सेनानी स्मृति दिवस, अंतर्राष्ट्रीय स्वयंसेवक दिवस, विश्व मृदा दिवस, शेख़ मोहम्मद अब्दुल्ला जन्म दिवस, गुरबचन सिंह सालारिया, (परमवीर चक्र से सम्मानित) स्मृति दिवस, भारतीय लेखक अरबिंदो घोष पुण्य तिथि ✍🏼 विशेष – चतुर्थी तिथि को मूली एवं पञ्चमी तिथि को बिल्वफल त्याज्य बताया गया है। इस चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों त्याज्य होता है। इसलिए चतुर्थी तिथि को मूली और तिल एवं पञ्चमी को बिल्वफल नहीं खाना न ही दान करना चाहिए। चतुर्थी तिथि एक खल और हानिप्रद तिथि मानी जाती है। इस चतुर्थी तिथि के स्वामी गणेश जी हैं तथा यह चतुर्थी तिथि रिक्ता नाम से विख्यात मानी जाती है। यह चतुर्थी तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभफलदायिनी मानी गयी है। 🏘️ *Vastu Tips* 🏚️ कुछ लोगों की आदत होती है कि चीज़ों को खराब होने के बाद भी वो उसे फेंकते नहीं है और इस्तेमाल करते रहते हैं। खासतौर से कुछ लोग घरों में टूटे कप, ग्लास या दूसरे बर्तनों का इस्तेमाल करते हैं। वास्तुशास्त्र के मुताबित इससे घर में वास्तु दोष पैदा होता है। टूटी फूटी चीजों को घर में रखने से नकारात्मता आती है। जिसका असर घर के हर सदस्य पर पड़ता है। वास्तु के हिसाब से हर चीज की सही दिशा होती है और उसका असर आपके जीवन पर भी पड़ता है। इसलिए इन चीजों का खास ख्याल रखना चाहिए। खासतौर से शीशा लगाते वक्त भी दिशा ध्यान रखना जरूरी हो जाता है। ये चीजें सीधे आपके जीवन को प्रभावित कर सकती हैं। देश के जाने-माने ज्योतिषी आचार्य श्री गोपी राम से जानते हैं घर में टूटे सामान या बर्तन रखने से क्या वास्तु दोष पैदा होता है साथ ही जानते हैं आठ कोण वाला मिरर घर की किस दिशा में लगाना चाहिए। घर में टूटे और दरार वाले बर्तनों को कभी भी नहीं रखना चाहिए। ऐसे बर्तनों में खाना खाने और दूसरों को खिलाने से घर में बिना वजह की परेशानियां बढ़ती हैं। साथ ही कर्ज लेने के चांसेज़ भी बढ़ जाते हैं। इसलिए कभी भी घर में टूटे या दरार वाले बर्तनों का उपयोग नहीं करना चाहिए। इसके अलावा घर में टूटा बेड या टूटी हुई खाट का इस्तेमाल भी नहीं करना चाहिए। साथ ही कर्ज और अन्य प्रकार की परेशानियों से बचने के लिये आप और क्या उपाय कर सकते हैं, ये भी बता दूं। इसके लिये आपको घर की उत्तर दिशा की तरफ अष्टकोणीय, यानी आठ कोनों वाला आईना लगाना चाहिए। घर में इस तरह का आईना लगाने से बहुत से शुभ फल मिलते हैं। ♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
यदि आप बहुत कम और सीमित मात्रा में भांग का सेवन करते हैं तो इससे आपकी इंद्रियां और संवेदनाओं की तीव्रता में बढ़ोतरी होती है| जिससे स्पष्ट सुनाई और दिखाई देना लगता है| इसका सेवन खराब मूड को भी सुधार सकता है|
भांग के पत्तों को निचोड़ कर 8 से 10 बूंदों को कान में डालने से कीड़े मरते हैं और कान की पीड़ा दूर हो जाती है|
सर में होने वाले दर्द को दूर करने के लिए भांग के पत्तों को बारीक पीसकर सूंघने से भी सिर का दर्द दूर हो जाता है|
भुनी हुई 125 मिलीग्राम भांग को 2 ग्राम काली मिर्च और 2 ग्राम मिश्री में मिलाकर सेवन करने से दमा का रोग दूर हो जाता है|
भांग के बीजों में प्रोटीन वे 20 तरह के अमीनो एसिड्स मौजूद होते हैं जो कैलोरी को जलाने वाली मांसपेशियों के विकास के लिए लाभदायक है, वर्कआउट करने के बाद भांग के बीजों को जूस में मिलाकर पीने से फायदा होता है|
💉 आरोग्य संजीवनी 🩸
मानसिक तनाव या चिंता जब कोई व्यक्ति अत्यधिक तनाव, चिंता, या डर का अनुभव करता है, तो वह हाइपरवेंटिलेशन का शिकार हो सकता है, जिसमें व्यक्ति तेज और उथली सांस लेने लगता है। यह शारीरिक लक्षण के रूप में सांस फूलने की समस्या पैदा करता है।
एनीमिया एनीमिया तब होता है जब शरीर में रक्त के लाल कणों (RBCs) की कमी होती है। यह ऑक्सीजन की आपूर्ति को प्रभावित करता है, जिससे शरीर के विभिन्न अंगों तक पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं पहुंच पाती, और व्यक्ति को सांस लेने में कठिनाई हो सकती है।
फेफड़ों में खून का थक्का जब फेफड़ों की धमनियों में खून का थक्का (ब्लड क्लॉट) बन जाता है, तो यह ऑक्सीजन की आपूर्ति को रोक देता है, जिससे अचानक सांस फूलने की समस्या होती है।
सांस लेने की अन्य विकृतियाँ: एलर्जिक रिएक्शन : किसी एलर्जेन के कारण शरीर में ऐनाफाइलैक्सिस नामक गंभीर प्रतिक्रिया हो सकती है, जिससे सांस फूलने की स्थिति उत्पन्न हो सकती है।
फुफ्फुस में पानी भरना : जब फेफड़ों और छाती की दीवार के बीच तरल पदार्थ जमा हो जाता है, तो यह सांस लेने में कठिनाई पैदा कर सकता है।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
एक बार एक शिव-भक्त अपने गांव से केदारनाथ धाम की यात्रा पर निकला। पहले यातायात की सुविधाएँ तो थी नहीं, वह पैदल ही निकल पड़ा। रास्ते में जो भी मिलता केदारनाथ का मार्ग पूछ लेता। मन में भगवान शिव का ध्यान करता रहता। चलते चलते उसको महीनो बीत गए। आखिरकार एक दिन वह केदार धाम पहुच ही गया। केदारनाथ में मंदिर के द्वार 6 महीने खुलते है और 6 महीने बंद रहते है। वह उस समय पर पहुचा जब मन्दिर के द्वार बंद हो रहे थे। पंडित जी को उसने बताया वह बहुत दूर से महीनो की यात्रा करके आया है। पंडित जी से प्रार्थना की – कृपा कर के दरवाजे खोलकर प्रभु के दर्शन करवा दीजिये । लेकिन वहां का तो नियम है एक बार बंद तो बंद। नियम तो नियम होता है। वह बहुत रोया। बार-बार भगवन शिव को याद किया कि प्रभु बस एक बार दर्शन करा दो। वह प्रार्थना कर रहा था सभी से, लेकिन किसी ने भी नही सुनी।
पंडित जी बोले अब यहाँ 6 महीने बाद आना, 6 महीने बाद यहा के दरवाजे खुलेंगे। यहाँ 6 महीने बर्फ और ढंड पड़ती है। और सभी जन वहा से चले गये। वह वही पर रोता रहा। रोते-रोते रात होने लगी चारो तरफ अँधेरा हो गया। लेकिन उसे विस्वास था अपने शिव पर कि वो जरुर कृपा करेगे। उसे बहुत भुख और प्यास भी लग रही थी। उसने किसी की आने की आहट सुनी। देखा एक सन्यासी बाबा उसकी ओर आ रहा है। वह सन्यासी बाबा उस के पास आया और पास में बैठ गया। पूछा – बेटा कहाँ से आये हो ? उस ने सारा हाल सुना दिया और बोला मेरा आना यहाँ पर व्यर्थ हो गया बाबा जी। बाबा जी ने उसे समझाया और खाना भी दिया। और फिर बहुत देर तक बाबा उससे बाते करते रहे। बाबा जी को उस पर दया आ गयी। वह बोले, बेटा मुझे लगता है, सुबह मन्दिर जरुर खुलेगा। तुम दर्शन जरुर करोगे।
बातों-बातों में इस भक्त को ना जाने कब नींद आ गयी। सूर्य के मद्धिम प्रकाश के साथ भक्त की आँख खुली। उसने इधर उधर बाबा को देखा, किन्तु वह कहीं नहीं थे । इससे पहले कि वह कुछ समझ पाता उसने देखा पंडित जी आ रहे है अपनी पूरी मंडली के साथ। उस ने पंडित को प्रणाम किया और बोला कल आप ने तो कहा था मन्दिर 6 महीने बाद खुलेगा ? और इस बीच कोई नहीं आएगा यहाँ, लेकिन आप तो सुबह ही आ गये। पंडित जी ने उसे गौर से देखा, पहचानने की कोशिश की और पुछा – तुम वही हो जो मंदिर का द्वार बंद होने पर आये थे ? जो मुझे मिले थे। 6 महीने होते ही वापस आ गए ! उस आदमी ने आश्चर्य से कहा – नही, मैं कहीं नहीं गया। कल ही तो आप मिले थे, रात में मैं यहीं सो गया था। मैं कहीं नहीं गया। पंडित जी के आश्चर्य का ठिकाना नहीं था।
उन्होंने कहा – लेकिन मैं तो 6 महीने पहले मंदिर बन्द करके गया था और आज 6 महीने बाद आया हूँ। तुम छः महीने तक यहाँ पर जिन्दा कैसे रह सकते हो ? पंडित जी और सारी मंडली हैरान थी। इतनी सर्दी में एक अकेला व्यक्ति कैसे छः महीने तक जिन्दा रह सकता है। तब उस भक्त ने उनको सन्यासी बाबा के मिलने और उसके साथ की गयी सारी बाते बता दी। कि एक सन्यासी आया था – लम्बा था, बढ़ी-बढ़ी जटाये, एक हाथ में त्रिशुल और एक हाथ में डमरू लिए, मृग-शाला पहने हुआ था। पंडित जी और सब लोग उसके चरणों में गिर गये। बोले, हमने तो जिंदगी लगा दी किन्तु प्रभु के दर्शन ना पा सके, सच्चे भक्त तो तुम हो। तुमने तो साक्षात भगवान शिव के दर्शन किये है। उन्होंने ही अपनी योग-माया से तुम्हारे 6 महीने को एक रात में परिवर्तित कर दिया। काल-खंड को छोटा कर दिया। यह सब तुम्हारे पवित्र मन, तुम्हारी श्रद्वा और विश्वास के कारण ही हुआ है।
आपकी भक्ति को प्रणाम✨🙏
हर- हर महादेव, जय महाकाल 🤍_💚💜🚩🔱🙏
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⚜️ चतुर्थी तिथि में तिल का दान और भक्षण दोनों भी त्याज्य है। आज गणपति, गजानन, विघ्नहर्ता श्री गणेशजी की पूजा का विशेष महत्त्व है। आज गणपति की पूजा के उपरान्त मोदक, बेशन के लड्डू एवं विशेष रूप से दूर्वादल का भोग लगाना चाहिये इससे मनोकामना की सिद्धि तत्काल होती है।
शास्त्रानुसार जिस व्यक्ति का जन्म चतुर्थी तिथि को होता है वह व्यक्ति बहुत ही भाग्यशाली होता है। चतुर्थी तिथि में जन्म लेने वाला व्यक्ति बुद्धिमान एवं अच्छे संस्कारों वाला होता है। ऐसे लोग अपने मित्रों के प्रति प्रेम भाव रखते हैं तथा इनकी सन्तानें अच्छी होती है। इन्हें धन की कमी का सामना नहीं करना पड़ता है और ये सांसारिक सुखों का पूर्ण उपभोग करते हैं।

