Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 01मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 01 मार्च 2025
01 मार्च 2025 आज से कल्याणेश्वराजनकपुर (मिथिला) की परिक्रमा प्रारंभ हो जाती है। आप सभी सनातनियों को “फुलेरा दूज” एवं “स्वामी श्रीरामकृष्णपरमहंस जी के जन्म जयन्ती” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🌐 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 संवत्सर क्रोधी
📖 संवत्सर (उत्तर) कालयुक्त
🧾 विक्रम संवत 2081 विक्रम संवत
🔮 गुजराती संवत 2080 विक्रम संवत
☸️ शक संवत 1946 शक संवत
☪️ कलि संवत 5125 कलि संवत
🕉️ शिवराज शक 351_
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – फाल्गुन मास
🌖 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📆 तिथि – शनिवार फाल्गुन माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 12:09 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पूर्वभाद्रपदा 11:22 AM तक उपरांत उत्तरभाद्रपदा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पूर्वभाद्रपदा नक्षत्र के स्वामी देवगुरु बृहस्पति हैं। पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र के देवता हैं, अज एकपाद यानी एक पैर वाला अजन्मा।
⚜️ योग – साध्य योग 04:24 PM तक, उसके बाद शुभ योग
⚡ प्रथम करण : बालव – 01:43 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : कौलव – 12:09 ए एम, मार्च 02 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:15:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:45:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 05:07 ए एम से 05:56 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:32 ए एम से 06:46 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:10 पी एम से 12:57 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:29 पी एम से 03:16 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:18 पी एम से 06:43 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:21 पी एम से 07:35 पी एम
💧 अमृत काल : 04:40 ए एम, मार्च 02 से 06:06 ए एम, मार्च 02
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:08 ए एम, मार्च 02 से 12:58 ए एम, मार्च 02
🌸 त्रिपुष्कर योग : 06:46 ए एम से 11:22 ए एम
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
💁🏻 आज का उपाय-शनि मंदिर में सुरमा (काजल) चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं
⚛️ पर्व एवं त्यौहार : त्रिपुष्कर योग/ रामकृष्ण परमहंस जयंती/ पंचक जारी/ शून्य भेदभाव दिवस/ विश्व नागरिक सुरक्षा दिवस/ विश्व समुद्री घास दिवस/ साहित्यकार करतार सिंह दुग्गल जन्म दिवस, स्वतंत्रता सेनानी जयरामदास दौलतराम शहीद दिवस, प्रसिद्ध हास्य लेखक तारक मेहता पुण्य तिथि, प्रसिद्ध कवि सोहन लाल द्विवेदी स्मृति दिवस, भारतीय राजनीतिज्ञ वसन्तदादा पाटिल पुण्य तिथि, मशहूर उद्योगपति राम प्रसाद गोएंका जन्म दिवस, लेखक रमेश उपाध्याय जन्म दिवस, लोकप्रिय नेता नीतीश कुमार जयन्ती, अभिनेता सलिल अंकोला जन्म दिवस, भारतीय महिला भारोत्तोलक खिलाड़ी कुंजारानी देवी जन्म दिवस, राष्ट्रीय पोषण माह (1 से 31 मार्च)
✍🏼 तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।।
🗼 Vastu tips 🗽
ईशान कोण घर की उत्तर-पूर्व दिशा होती है, वास्तु शास्त्र में इसे घर की सबसे पवित्र और शुभ दिशा के रूप में देखा जाता है। यह दिशा चार प्रमुख दिशाओं उत्तर, दक्षिण, पूर्व, पश्चिम के बीच पूर्व और उत्तर के मिलन बिंदु पर स्थित होती है। इस दिशा को हिंदू धर्म में विशेष स्थान प्राप्त है, क्योंकि इसे ईश्वर की दिशा के रूप में देखा जाता है। यह दिशा घर के सभी निवासियों के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य, समृद्धि और रिश्तों को प्रभावित करती है।
ईशान कोण को ‘आध्यात्मिक द्वार’ भी कहा जाता है, क्योंकि यह ऊर्जा के प्रवाह को नियंत्रित करता है और घर में शांति और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है। इसकी विशेषताओं की वजह से इस दिशा का उपयोग ध्यान, पूजा, और पढ़ाई जैसे कार्यों के लिए किया जाता है।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
दुखों का कारण
ईर्ष्या :- ईर्ष्या दुखों का कारण है। ईर्ष्या के कारण इच्छाएं उत्पन्न होती हैं।
इच्छाएं :- मुख्यत: दुखों का कारण इच्छाएं है। यदि हम असीमित इच्छाएं रखते है, और जब उनकी पूर्ति नही होती है तो यह दुख का कारण बनती हैं।
क्रोध :- इच्छाओं की पूर्ति न होना क्रोध कारण बनता है।
मोह :– किसी व्यक्ति या वस्तु से अत्याधिक लगाव भी दुखो का कारण बनता है। उस की प्राप्ति के बाद उसके अलगाव का भय दुखों का कारण होता है।
🩸 आरोग्य संजीवनी 💊
टूटी हड्डी जल्द जोड़ने के लिए : बबूल की फलियों का चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से सेवन करने से टूटी हड्डी जल्द ही जुड़ जाती है। यह उपाय बहुत की प्रभावी और कारगर है।
दांत का दर्द : बबूल की फली के छिलके और बादाम के छिलके की राख में नमक मिलाकर मंजन करने से दांत का दर्द दूर हो जाता है।
पेशाब का अधिक मात्रा में आना : बबूल की कच्ची फली को छाया में सुखाकर उसे घी में तलकर पाउडर बना लें। इस पाउडर की 3-3 ग्राम मात्रा रोजाना सेवन करने से पेशाब का ज्यादा आना बंद होता है।
शारीरिक शक्ति और कमज़ोरी मिटाएँ : बबूल की फलियों को छाया में सुखा लें और इसमें बराबर की मात्रा मे मिश्री मिलाकर पीस लेते हैं। इसे एक चम्मच की मात्रा में सुबह-शाम नियमित रूप से पानी के साथ सेवन से करने से शारीरिक शक्ति में इज़ाफ़ा होता है और सभी कमज़ोरी वाले रोग दूर हो जाते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
कैसे रावण की गलती से बैद्यनाथ धाम में स्थापित हुए भगवान शिव? पुराणों में रावण और भगवान शिव से जुड़ी कई रोचक कथाएँ मिलती हैं। इनमें से एक कथा बैद्यनाथ धाम ज्योतिर्लिंग की स्थापना से जुड़ी है। यह कथा हमें सिखाती है कि अहंकार और अधीरता किस तरह मनुष्य को महान उपलब्धियों से भी वंचित कर सकती है। आइए जानते हैं इस कथा को विस्तार से।
रावण की घोर तपस्या और वरदान
लंका के राजा रावण भगवान शिव के अनन्य भक्त थे। उन्होंने कठोर तपस्या कर शिवजी को प्रसन्न कर लिया। रावण ने भगवान शिव से वरदान स्वरूप उन्हें लंका ले जाने की इच्छा जताई। शिवजी ने उसकी भक्ति से प्रसन्न होकर कहा,
“मैं तुम्हारे साथ चलूंगा, लेकिन एक शिवलिंग के रूप में। ध्यान रखना, यदि तुमने इसे कहीं भी भूमि पर रख दिया, तो मैं वहीं स्थापित हो जाऊंगा।”
रावण को अपनी शक्ति पर अत्यधिक गर्व था। वह शिवलिंग को लेकर गर्व से लंका की ओर प्रस्थान कर गया।
भगवान विष्णु ने कैसे रोका रावण को? जब देवताओं को यह ज्ञात हुआ कि रावण भगवान शिव को लंका ले जा रहा है, तो वे घबरा गए। वे भगवान विष्णु के पास पहुँचे और इस समस्या का समाधान करने की प्रार्थना की। भगवान विष्णु ने एक बालक का रूप धारण किया और रास्ते में रावण के सामने आ गए।
उसी समय भगवान विष्णु ने अपनी माया से रावण के पेट में गंगा का जल प्रवाहित कर दिया, जिससे उसे तीव्र मूत्र विसर्जन की आवश्यकता महसूस हुई। रावण असमंजस में पड़ गया क्योंकि उसे शिवलिंग को नीचे नहीं रखना था। तभी उसने उस बालक (भगवान विष्णु) को बुलाया और कहा,
“मैं लघुशंका करने जा रहा हूँ, कृपया कुछ समय के लिए इस शिवलिंग को पकड़ लो।”
बालक बने विष्णु जी ने कहा, “ठीक है, लेकिन यदि यह बहुत भारी हुआ तो मैं इसे नीचे रख दूँगा।”
रावण मूत्र विसर्जन करने चला गया, लेकिन उसकी स्थिति बिगड़ गई और वह काफी देर तक वहीं रुका रहा। इस बीच, बालक बने विष्णु जी ने शिवलिंग को भूमि पर रख दिया।
शिवलिंग की स्थापना और रावण का क्रोध जब रावण वापस आया और देखा कि शिवलिंग भूमि पर स्थापित हो चुका है, तो वह अत्यंत क्रोधित हुआ। उसने पूरी शक्ति से शिवलिंग को उठाने की कोशिश की, लेकिन असफल रहा। उसके प्रयासों से शिवलिंग थोड़ा झुक गया। आज भी बैद्यनाथ धाम में स्थित यह ज्योतिर्लिंग थोड़ा झुका हुआ दिखाई देता है।
रावण को अपनी गलती का एहसास हुआ, लेकिन अब कुछ नहीं हो सकता था। उसने वहीं भगवान शिव की आराधना की।
रावण के मूत्र से बना तालाब? ऐसा कहा जाता है कि रावण जब मूत्र विसर्जन कर रहा था, तो वहाँ एक तालाब बन गया। बैद्यनाथ धाम में आज भी दो प्रमुख तालाब हैं। एक में लोग स्नान करते हैं, जबकि दूसरे तालाब को कोई छूता भी नहीं। मान्यता है कि यह तालाब रावण के मूत्र से बना था, इसलिए इसे अपवित्र माना जाता है।
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।



