Today Panchang आज का पंचांग सोमवार, 17 मार्च 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
सोमवार 17 मार्च 2025
17 मार्च 2025 दिन सोमवार को चैत्र मास कृष्ण पक्ष के तृतीया तिथि है।आज ही संकष्टी श्रीगणेश का पावन व्रत है। सामान्य भाषा में गणेश चौथ के नाम से भी जाना जाता है ऐसा कहा जाता है कि आज ही भगवान श्री गणेश जी का जन्म हुआ था आज का व्रत सनातनी स्त्रियों अपने पुत्रों की दीर्घायु हेतु दिन भर अखंड उपवास कर कर सायं काल में भगवान श्री गणेश जी की पूजा करने के बाद चंद्रमा देवता (चन्द्रोदय:- के निकलने (चन्द्रोदय रात्रि 08.49 पी एम) पर उन्हें देखकर अलग देकर ही व्रत खोलते हैं। आज यायीजयोग भी है। आप सभी सनातनियों को “संकष्टी श्रीगणेश चतुर्थी के पावन व्रत” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
महा मृत्युंजय मंत्र – ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय माऽमृतात्।।
☄️ दिन (वार) – सोमवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से पुत्र का अनिष्ट होता है शिवभक्ति को भी हानि पहुँचती है अत: सोमवार को ना तो बाल और ना ही दाढ़ी कटवाएं ।
सोमवार के दिन भगवान शंकर की आराधना, अभिषेक करने से चन्द्रमा मजबूत होता है, काल सर्प दोष दूर होता है।
सोमवार का व्रत रखने से मनचाहा जीवन साथी मिलता है, वैवाहिक जीवन में लम्बा और सुखमय होता है।
जीवन में शुभ फलो की प्राप्ति के लिए हर सोमवार को शिवलिंग पर पंचामृत या मीठा कच्चा दूध एवं काले तिल चढ़ाएं, इससे भगवान महादेव की कृपा बनी रहती है परिवार से रोग दूर रहते है।
सोमवार के दिन शिव पुराण के अचूक मन्त्र “श्री शिवाये नमस्तुभ्यम’ का अधिक से अधिक जाप करने से समस्त कष्ट दूर होते है. निश्चित ही मनवाँछित लाभ मिलता है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2024 विक्रम संवत : 2081 नल, शक संवत : 1945 शोभन
🌐 संवत्सर नाम अनला
🔯 शक सम्वत : 1945 (शोभकृत् संवत्सर)
☸️ काली सम्वत् 5124
🕉️ संवत्सर (उत्तर) पिंगल
☣️ आयन – उत्तरायण
☀️ ऋतु – सौर बसंत ऋतु
🌤️ मास – चैत्र मास
🌖 पक्ष – कृष्ण पक्ष
📆 तिथि – सोमवार चैत्र माह के कृष्ण पक्ष तृतीया तिथि 07:33 PM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र चित्रा 02:47 PM तक उपरांत स्वाति
🪐 नक्षत्र स्वामी – चित्रा नक्षत्र के स्वामी मंगल ग्रह हैं और इसके अधिष्ठाता देव विश्वकर्मा हैं।चित्रा नक्षत्र के देवता त्वष्टा हैं जो एक आदित्य हैं।
⚜️ योग – ध्रुव योग 03:44 PM तक, उसके बाद व्याघात योग
⚡ प्रथम करण : विष्टि – 07:33 पी एम तक
✨ द्वितीय करण : बव – पूर्ण रात्रि तक
🔥 सोमवार का शुभ गुलिक कालः-शुभ गुलिक काल 01:42:00 P.M से 02:59:00 P.M बजे तक
⚜️ दिशाशूलः- आज के दिन पूर्व दिशा की यात्रा नहीं करना चाहिए यदि यात्रा करना ज्यादा आवश्यक हो तो घर से दर्पण देखकर या दूध पीकर जायें।
🤖 राहुकालः- आज का राहु काल 08:26:00 A.M से 09:39:00 A.M बजे तक
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 06:03:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 05:57:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:53 ए एम से 05:41 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 05:17 ए एम से 06:28 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 12:05 पी एम से 12:54 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:30 पी एम से 03:18 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:28 पी एम से 06:52 पी एम
🌃 सायाह्न सन्ध्या : 06:31 पी एम से 07:42 पी एम
💧 अमृत काल : 07:34 ए एम से 09:23 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:05 ए एम, मार्च 18 से 12:53 ए एम, मार्च 18
🚓 यात्रा शकुन – मीठा दूध पीकर यात्रा करें।
👉🏼 आज का मंत्र – ॐ सौ सौभाग्य नमः।
🤷🏻♀️ आज का उपाय – शिवजी को दुग्धाभिषेक करें।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय – पलाश के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – गणेश संकष्ट चतुर्थी व्रत चन्द्रोदय 09.20/ सेंट पैट्रिक दिवस, अभिनेता निकितिन धीर जन्म दिवस, भारतीय अंतरिक्ष यात्री कल्पना चावला जन्म दिवस, बैडमिंटन खिलाड़ी सायना नेहवाल जन्म दिवस, बांग्लादेश के पहले राष्ट्रपति शेख़ मुजीब-उर-रहमान जयन्ती, तिथि अनुसार छत्रपति शिवाजी महाराज जयन्ती, महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री पृथ्वीराज चव्हाण जन्म दिवस, भारतीय शास्त्रीय संगीत गायिका सिद्धेश्वरी देवी स्मृति दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🏘️ Vastu tips 🏚️
घर से निकलने से पहले करें ये उपाय, यात्रा होगी सरल, सुखद और सफल
कुछ ऐसे शब्द होते हैं जिन्हें घर से निकलते वक्त कभी नहीं बोलना चाहिए। इन शब्दों से यात्रा और कार्य में बाधा उत्पन्न होती है। जैसे अभद्र गाली-गलौच, रावण, पत्थर, नहीं, मारना, डूबना, छोड़कर आना, जूता, चप्पल, लकड़ी, ताला और किसी तरह के नेगेटिव शब्दों को घर के निकलते समय न बोलें।
किसी जरूरी कार्य या यात्रा के लिए घर से निकलते समय शुभ मुहूर्त जरूर देखकर ही निकलें।
घर से निकलने से पहले पूजा जरूर करें। थाली को कुमकुम, हल्दी, अबीर, अक्षत और फूल से सजाकर भगवान की आरती करें। अगरबत्ती जलाएं और घी का दीपक भी जलाएं। हाथ जोड़कर भगवान से मंगल यात्रा की कामना करें।
यात्रा के लिए घर से निकलने से पहले काले तिल को अपने ऊपर से 7 बार उतार कर उत्तर दिशा की ओर फेंक दें। इससे बुरी बला टल जाती है।
❇️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
तिल के तेल के क्या फायदे हैं?
तिल का तेल शरीर के दर्द को पूरी तरह खींच लेता है। एक मात्र यही एक ऐसा तेल है, जो जोड़ों में चिकनाहट बनाए रखता है।
आयुर्वेद के प्राचीन ग्रंथों तिल तेल के अनेक फायदे बताए हैं। कुछ हस्तलिखित पांडुलिपियों में संस्कृत के श्लोक भी तिल तेल के बारे में लिखे मिलते हैं।
पुराने समय में आयुर्वेद के सभी दर्द नाशक ओषधि तेल जैसे महानारायण, महाविष गर्भ तेल आदि तीली के तेल में बनाते थे। आजकल पैराफिन oil यानि रसायनिक तेल में एक्सट्रेक्ट डालकर दर्द दूर करने वाले तेल बनाए जा रहे हैं।
💊 आरोग्य संजीवनी 🍶
रसायन वटी के लाभ_
शारीरिक और मानसिक सशक्तिकरण – रसायन वटी शरीर की कोशिकाओं को पुनर्जीवित करती है, जिससे व्यक्ति अधिक ऊर्जावान और मानसिक रूप से मजबूत बनता है।
रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि – इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत करते हैं, जिससे सर्दी, खांसी, बुखार और अन्य संक्रामक रोगों से बचाव होता है।
पाचन तंत्र को सुधारती है – यह जठराग्नि को उत्तेजित करती है, जिससे भोजन का सही तरीके से पाचन होता है और कब्ज, गैस व एसिडिटी जैसी समस्याएं दूर होती हैं।
त्वचा और बालों के लिए फायदेमंद – यह रक्त को शुद्ध करने में सहायक होती है, जिससे त्वचा पर निखार आता है और बाल मजबूत व घने बनते हैं।
हृदय स्वास्थ्य में सुधार – इसमें मौजूद प्राकृतिक तत्व हृदय को स्वस्थ रखते हैं, रक्त संचार को बेहतर बनाते हैं और हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में मदद करते हैं।
📖 गुरु भक्ति योग 🕯️
श्री कृष्ण हमेशा पैरों को क्रॉस करके ही क्यों खड़े होते थे?
अक्सर आपने देखा होगा कि श्री कृष्ण बांसुरी बजाते समय या फिर गाय चराते समय जब भी एक जगह पर खड़े होते थे तो उनके पैर क्रॉस पोजीशन में रहते थे यानी कि श्री कृष्ण खड़े होते समय पैरों को आपस में क्रॉस कर लेते थे।
क्या आपको पता है कि श्री कृष्ण के ऐसी मुद्रा में खड़े होने के पीछे का कारण क्या है। अगर नहीं तो आइये जानते हैं इस बारे में आचार्य श्री गोपी राम से।
आखिर क्यों पैरों को क्रॉस करके खड़े होते थे श्री कृष्ण भगवान श्री कृष्ण की खड़े होने की मुद्रा टेढ़ी है। गौर करने वाली बात यह है कि श्री कृष्ण 2 अवस्था में ही ऐसी मुद्रा में कहदे होते थे। एक जब वह गाय चराने जाते थे और पेड़ के नीचे खड़े होकर बांसुरी बजाते थे और दूसरी जब वह रास रचाते थे।
ये दोनों ही अवस्था ब्रज भूमि के अंतर्गत ही आती हैं। वहीं, जब भगवान श्री कृष्ण ने ब्रज छोड़ा था और द्वारका राज्य बसाया था तब उनकी मुद्रा सिंघासन पर बैठे हुए नजर आती है। युद्ध के समय भी कृष्ण जी सीधे खड़े होकर ही युद्ध किया करते थे।
यानी कि सिर्फ ब्रज में जब तक ठाकुर जी थे तब तक उनकी मुद्रा टेढ़ी थी। अब इसके पीछे 2 कारण मिलते हैं जो प्रेम और भक्ति भाव को दर्शाते हैं। ऐसा कहा जाता है कि श्री कृष्ण की खड़े होने की यह मुद्रा आकर्षण मुद्रा कहलाती है।
श्री कृष्ण बांसुरी बजाते समय इस मुद्रा में इसलिए खड़े होते थे कि जितने भी जीव हैं उन्हें अपने प्रति आकर्षित कर अपनी शरण में ले लें और रास रचाते समय इस मुद्रा में इसलिए रहते थे कि प्रेम भाव में पड़ी गोपियों को आकर्षित कर कल्याण कर सकें।
यह तो हम सभी जानते हैं कि श्री कृष्ण की गोपियां पूर्व जन्म में वो साधु-संत रहे हैं जिन्हें गोपी रूप में श्री कृष्ण के सानिध्य की प्राप्ति हो रही थी। ऐसे में आकर्षण मुद्रा में खड़े होकर उन्हें प्रेम के साथ भक्ति भाव से जोड़ने की यह प्रक्रिया थी।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।


