खड़ी फसल में लगी आग, देखते ही देखते जल हुई राख, मझौली के मोहनिया गांव का मामला

ब्यूरो चीफ : मनीष श्रीवास
जबलपुर। जबलपुर जिले में जैसे जैसे गेहूं की फसलों कटने का समय नजदीक आ रहा हैं वहीं दूसरी तरफ अन्य फसल को बोने के लिए खेत में हार्वेस्टर से कटाई के बाद शेष बची पलाई (नरवाई) को किसानों के द्वारा जलाने से जहां गेहूं की फसल तो जल कर राख हो जाती हैं। दूसरी ओर वायु मण्डल प्रदूषण के साथ साथ जीव जंतुओं को भी इस आग में जान गवानी पड़ती हैं।
पलाई जलाना पड़ा महंगा – रविवार की दोपहर को अचानक मोहनिया गाँव के खेतों में सूख कर लगीं हुई गेहूं की फसल लगभग 30 से 40 एकड़ देखते ही देखते जलकर राख हो गई। विगत चार माह से अधिक किसानों की मेहनत और पूंजी दोनों ही खत्म हो गई। क्या इस प्रकार से पलाई नरवाई जलाने का नियम विरुद्ध कार्य को किए जाने पर जिला एवं राज्य शासन प्रशासन को आग लगाने वालों पर उचित कार्यवाही के साथ साथ मामला दर्ज करना चाहिए। ताकि इस प्रकार की घटनाओं से बचा जा सकें। पूर्व में जिला प्रशासन ने पलाई जलाने वालों पर एफआईआर दर्ज करने के निर्देश जारी किए गए थे। लेकिन आदेश केवल आदेश तक ही रह गया। और इस प्रकार की घटनाओं से किसान क्या कर सकता है। शायद इस प्रकार की गेंहू की आग वाली घटनाओं का अभी और भी इंतजार करेगा । बड़ा ही प्रश्न चिन्ह वाला मामला है खेती कृषि करने वाले किसान साथियों का। अभी नहीं तो कभी नहीं, जल कर क्या राख बटोर पाओगे।



