धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग शनिवार, 28 जून 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
शनिवार 28 जून 2025
शनि देव जी का तांत्रिक मंत्र – ऊँ प्रां प्रीं प्रौं सः शनैश्चराय नमः।।
☄️ दिन (वार) -शनिवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से आयु का नाश होता है । अत: शनिवार को बाल और दाढ़ी दोनों को ही नहीं कटवाना चाहिए।
शनिवार के दिन प्रात: पीपल के पेड़ में दूध मिश्रित मीठे जल का अर्ध्य देने और सांय पीपल के नीचे तेल का दीपक जलाने से कुंडली की समस्त ग्रह बाधाओं का निवारण होता है ।
शनिवार के दिन पीपल के नीचे हनुमान चालीसा पड़ने और गायत्री मन्त्र की àएक माला का जाप करने से किसी भी तरह का भय नहीं रहता है, समस्त बिग़डे कार्य भी बनने लगते है ।
शिवपुराण के अनुसार शनि देव पिप्लाद ऋषि का स्मरण करने वाले, उनके भक्तो को कभी भी पीड़ा नहीं देते है इसलिए जिन के ऊपर शनि की दशा चल रही हो उन्हें अवश्य ही ना केवल शनिवार को वरन नित्य पिप्लाद ऋषि का स्मरण करना चाहिए।
शनिवार के दिन पिप्पलाद श्लोक का या पिप्पलाद ऋषि जी के केवल इन तीन नामों (पिप्पलाद, गाधि, कौशिक) को जपने से शनि देव की कृपा मिलती है, शनि की पीड़ा निश्चय ही शान्त हो जाती है ।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
👸🏻 शिवराज शक 352
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर वर्षा ऋतु
☀️ मास – आषाढ़ मास
🌘 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – शनिवार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष तृतीया तिथि 09:54 AM तक उपरांत चतुर्थी
✏️ तिथि स्वामी – तृतीया तिथि की स्वामी माँ गौरी और कुबेर जी है ।तृतीया: किसी भी पक्ष की तीसरी तारीख को तृतीया तिथि या तीज कहते है।
💫 नक्षत्र – नक्षत्र पुष्य 06:35 AM तक उपरांत आश्लेषा
🪐 नक्षत्र स्वामी – पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि ग्रह है। देव गुरु बृ्हस्पति को पुष्य नक्षत्र का अधिष्ठाता देवता माना गया है।
⚜️ योग – हर्षण योग 07:15 PM तक, उसके बाद वज्र योग
प्रथम करण : गर – 09:53 ए एम तक
द्वितीय करण : वणिज – 09:28 पी एम तक विष्टि
🔥 गुलिक काल : – शनिवार को शुभ गुलिक प्रातः 6: 53 से 8:19 बजे तक ।
⚜️ दिशाशूल – शनिवार को पूर्व दिशा का दिकशूल होता है ।यात्रा, कार्यों में सफलता के लिए घर से अदरक खाकर, घी खाकर जाएँ ।
🤖 राहुकाल -सुबह – 9:44 से 11:09 तक।राहु काल में कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिए |
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:13:00
🌄 सूर्यास्तः- सायं 06:47:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:05 ए एम से 04:46 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:25 ए एम से 05:26 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:56 ए एम से 12:52 पी एम
🔯 विजय मुहूर्त : 02:44 पी एम से 03:40 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 07:22 पी एम से 07:42 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 07:23 पी एम से 08:23 पी एम
💧 अमृत काल : 04:58 ए एम, जून 29 से 06:34 ए एम, जून 29
🗣️ निशिता मुहूर्त : 12:04 ए एम, जून 29 से 12:45 ए एम, जून 29
❄️ रवि योग : 06:35 ए एम से 05:26 ए एम, जून 29
🚓 यात्रा शकुन-शर्करा मिश्रित दही खाकर घर से निकलें।
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ प्रां प्रीं प्रौं स: शनयै नम:।
🤷🏻‍♀️ आज का उपाय-श्री जगन्नाथ मंदिर में सवाकिलो चावल चढ़ाएं।
🪵 वनस्पति तंत्र उपाय-शमी के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – रवि योग/ विनायक चतुर्थी व्रत/ सर्वार्थसिद्धि योग/श्री जगन्नाथ रथयात्रा (पुरी)/ राष्ट्रीय लॉजिस्टिक्स दिवस, राष्ट्रीय बीमा जागरूकता दिवस, अंतर्राष्ट्रीय पीकेयू दिवस, राष्ट्रीय नग्नता दिवस, राष्ट्रीय पॉल बन्यन दिवस, राष्ट्रीय रसद दिवस, वरिष्ठ राजनीतिज्ञ प्रहलाद सिंह पटेल जन्म दिवस, भारत के पूर्व प्रधानमंत्री विधुर श्री पी.वी. नरसिम्हा राव जन्म दिवस, (‘महावीर चक्र’ से सम्मानित) कैप्टन नीकेझाकू स्मृति दिवस, ग़रीब दिवस
✍🏼 तिथि विशेष – तृतीया तिथि में नमक का दान तथा भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। तृतीया तिथि एक सबला अर्थात बल प्रदान करने वाली तिथि मानी जाती है। इतना ही नहीं यह तृतीया तिथि आरोग्यकारी रोग निवारण करने वाली तिथि भी मानी जाती है। इस तृतीया तिथि की स्वामिनी माता गौरी और इसके देवता कुबेर देवता हैं। यह तृतीया तिथि जया नाम से विख्यात मानी जाती है। यह तृतीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ फलदायिनी मानी जाती है।
🌷 Vastu tips_ 🌹
घर में हो सकता है कलह
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर की छत पर कोई भी फालतू सामान या कबाड़ नहीं रखना चाहिए। ऐसा करने से परिवार के सदस्यों के मन और मस्तिष्क पर नकारात्मक असर पड़ता है और पितृ दोष भी लगता है। पूरे घर का माहौल खराब हो जाता है। साथ ही यह आपके घर में कलह का कारण भी बन सकता है। तो आपके घर में यदि बिना उपयोग का फालतू सामान बहुत समय से पड़ा है तो उसे घर के बाहर करिए।
लेकिन अगर आपके घर में ऐसा कोई सामान है जो उपयोगी तो है परंतु अभी उसका कोई काम नहीं है तो ऐसी चीजों को ऐसे ही कहीं भी न पटके, उन्हें व्यवस्थित ढंग से एक जगह पर रख दें।
♻️ जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
🧘‍♂️ आयुर्वेद के अनुसार – बैठकर पानी पीना सही
आयुर्वेद में कहा गया है कि पानी हमेशा बैठकर पीना चाहिए, क्योंकि:
✅ पाचन तंत्र सही रहता है – बैठकर पानी पीने से पानी धीरे-धीरे शरीर में जाता है, जिससे डाइजेशन बेहतर होता है।
✅ जोड़ों पर असर नहीं पड़ता – खड़े होकर पानी पीने से घुटनों और जोड़ो में दर्द की समस्या हो सकती है।
✅ किडनी पर प्रेशर नहीं आता – बैठने पर पानी सीधे किडनी तक आराम से पहुंचता है, जिससे किडनी फिल्टरिंग सही होती है।
✅ एनर्जी बैलेंस – बैठकर पानी पीने से शरीर की ऊर्जा सही बनी रहती है।
<<पानी पीने के क्या-क्या फायदे हैं? व पानी कितना और कब पियें? 🚶‍♂️ खड़े होकर पानी पीने के नुकसान ❌ पानी तेजी से नीचे उतरता है, जिससे पाचन खराब हो सकता है। ❌ खड़े होकर पानी पीने से जोड़ों में दर्द और आर्थराइटिस जैसी समस्या बढ़ने का खतरा होता है। ❌ पानी तेजी से गुर्दे में पहुंचता है, जिससे गुर्दों पर दबाव बढ़ सकता है। 💉 आरोग्य संजीवनी 🩸 स्वास्थ्य के कुछ घरेलू नुस्खे: लू लगने से चक्कर आते हों तो सूखे धनिये का चूर्ण और मिश्री का शरबत पिलाएं। यदि नाक से खून बहता हो तो हरे धनिए का रस दो बूंद नाक में डालने से नकसीर में लाभ होता है। बवासीर की बीमारी हो तो पिसे हुए काले तिल और मक्खन, 10-10 ग्राम सुबह खाने से बवासीर कुछ ही दिनों में ठीक हो जाती है। फोड़े-फुंसी होते हों तो पालक, गाजर, ककड़ी का रस और नारियल पानी लें। होली के बाद 15-20 दिन तक बिना नमक का भोजन करना चाहिए, जिससे इम्युनिटी बढ़ती है और साल भर स्वास्थ्य में लाभ रहता है। 📖 गुरु भक्ति योग
🕯️
गुरु महान साधक होते हैं। वे हमेशा सतर्क रहते थे और अपने शिष्यों को भी सतर्क रहने की शिक्षा देते थे। उनका अनुशासन बहुत कठोर था। यदि कोई संयोगवश उसका पालन नहीं करता था, तो वे बहुत क्रोधित हो जाते थे। आत्मानंद के सबसे बड़े शिष्य। वे भी एक महान साधक थे। उन्होंने अपने गुरु और साधना से कई अद्भुत शक्तियाँ प्राप्त की थीं।
एक बार आत्मानंद यात्रा पर थे। वे जंगल के बीच में चले गए। तब सभी गाँव वालों ने उनसे वहाँ न जाने का आग्रह किया, कहा, “एक मंदिर के पास “महाकाल” नामक एक बड़ा साँप है। इसकी शक्ति बहुत अधिक है। यहाँ तक कि जंगल के हाथी भी इससे डरते हैं और वहाँ नहीं जाते। साँप इस बात का ध्यान रखता है कि कोई जानवर पास न आए। यदि आप वहाँ गए, तो वह आपका शिकार अवश्य ले जाएगा।” लेकिन क्या आत्मानंद ने उनकी बात सुनी? वे हठपूर्वक उस मार्ग पर चल पड़े।
जैसे ही आत्मानंद मंदिर के पास पहुँचे, साँप “महाकाल” ने इसकी गंध महसूस की होगी। साँप, जो कुंडली मारे बैठा था, जाग गया। आत्मानन्द सीधे वहाँ गये। उन्होंने घास बिछाई और उस पर कमल के आसन पर बैठ गये। वे ध्यान में लीन थे। फुंफकारता हुआ आया साँप उन्हें आराम से बैठा देखकर विष उगलने लगा। उसने धुएँ के रूप में आत्मानन्द को घेर लिया। तब आत्मानन्द ने अपनी साँस रोककर अपने योगबल से अपने माथे से अग्नि छोड़ी। वह साँप की ओर झपटा। साँप उस अग्नि की ज्वाला से भयभीत था। उसका विष आत्मानन्द तक बिल्कुल नहीं पहुँचा। परन्तु उससे निकलती हुई अग्नि साँप को भी जला रही थी। तब साँप ने आत्मानन्द के सामने आत्मसमर्पण कर दिया और उनके चरणों में लेट गया। आत्मानन्द ने उसे क्षमा कर दिया और वहाँ से चले गये।
आत्मानन्द को जंगल से बाहर आते देख वहाँ उपस्थित शिष्य बहुत प्रसन्न हुए और उनकी उपलब्धि पर गर्वित हुए। अगले दिन शिष्यों ने इस उपलब्धि का जश्न मनाने के लिए एक बड़े भोज का आयोजन किया। भोजन के बाद उन्होंने वहाँ विशेष रूप से तैयार की गई मदिरा पी। आत्मानन्द नशे में धुत हो गये, पागल हो गये और बेहोश हो गये। उसी शाम को गुरु वहाँ पहुँचे। शिष्य आत्मानन्द के इस अवतार को देखकर चौंक गये, सोच रहे थे कि गुरु क्या कहेंगे। लेकिन गुरु ने कुछ नहीं कहा। गुरु को देखकर भी आत्मानन्द ने उनकी ओर मुड़कर नहीं देखा, बल्कि उनकी ओर पैर फैलाकर लेट गया। तब गुरु ने शिष्यों से पूछा, “क्या आत्मानन्द को अब भी मुझ पर कोई आदर है?” “नहीं गुरु,” शिष्यों ने कहा। “अब आत्मानन्द, “महाकाल” नाग को जाने दो, क्या वह एक छोटे से कीड़े को भी वश में कर सकता है?” उन्होंने पूछा। “यह संभव नहीं है गुरु,” सभी शिष्यों ने कहा। तब गुरु ने कहा, “यह देखो, अनाहु। जिस आत्मानंद को मुझ पर अपार श्रद्धा और आदर था, वह अब मेरे सामने पैर फैलाकर गिर पड़ा है।
जिस आत्मानंद में योगाभ्यास द्वारा एक महान सर्प को तोड़ने की शक्ति थी, वह अब शक्तिहीन होकर बैठा है। इसका कारण यह शराब है। वर्षों में उसने जो उपलब्धियाँ और शक्ति अर्जित की थी, वह शराब की क्षणिक इच्छा ने नष्ट कर दी है। क्षण भर की संतुष्टि देने वाले आकर्षण जीवन भर की उपलब्धियों को नष्ट कर देते हैं, सावधान रहो।” हमने जीवन में ऐसे महान लोगों को देखा है जिन्होंने चार दशकों तक कड़ी मेहनत की और अपनी उपलब्धियों के शिखर पर पहुंचे, लेकिन कुछ तुच्छ इच्छाओं के कारण अपना दिमाग खो बैठे और रसातल में गिर गए। नेतृत्व और खलनायकी में बहुत अंतर नहीं है। एक तुच्छ आकर्षण उस परिवर्तन को लाता है। इसलिए, जब मन जीभ के स्वाद और शरीर के स्वास्थ्य के साथ, क्षणिक सुख और स्थायी संतुष्टि के साथ, व्यक्तिगत लाभ और सामाजिक कल्याण के साथ असंगत हो, तो स्थायी पर ध्यान केंद्रित करना बुद्धिमानी है।
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⚜️ तृतीया तिथि केवल बुधवार की हो तो अशुभ मानी जाती है। अन्यथा इस तृतीया तिथि को सभी शुभ कार्यों में लिया जा सकता है। आज तृतीया तिथि को माता गौरी की पूजा करके व्यक्ति अपनी मनोवाँछित कामनाओं की पूर्ति कर सकता है। आज तृतीया तिथि में एक स्त्री माता गौरी की पूजा करके अचल सुहाग की कामना करे तो उसका पति सभी संकटों से मुक्त हो जाता है। आज तृतीया तिथि को भगवान कुबेर जी की विशिष्ट पूजा करनी चाहिये। देवताओं के कोषाध्यक्ष की पूजा आज तृतीया तिथि को करके मनुष्य अतुलनीय धन प्राप्त कर सकता है।।

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