धार्मिक

Today Panchang आज का पंचांग मंगलवार, 23 सितम्बर 2025

आचार्य श्री गोपी राम (ज्योतिषाचार्य) जिला हिसार हरियाणा मो. 9812224501
✦••• जय श्री हरि •••✦
🧾 आज का पंचाग 🧾
मंगलवार 23 सितम्बर 2025
23 सितम्बर 2025 दिन मंगलवार को आश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि द्वितीय तिथि है। आज आश्विन मास के शारदीय नवरात्र का द्वितीय दिवस है। आज माता ब्रह्मचारिणी देवी के दर्शन एवं पूजन का बहुत पुण्य होता है। आज माता की प्रसन्नता हेतु केश संस्कार हेतु रश्मि पाट्ट प्रदान करें। आज उत्तरश्रृंग में चंद्रमा का दर्शन हो जाए तो यह शुभिक्ष का सूचक होता है। आप सभीसेनानियों को ” शारदीय नवरात्र के द्वितीय माता ब्रह्मचारिणी देवी के उपासना” की हार्दिक शुभकामनाएं।।
हनुमान जी का मंत्र : हं हनुमते रुद्रात्मकाय हुं फट् ।
🌌 दिन (वार) – मंगलवार के दिन क्षौरकर्म अर्थात बाल, दाढ़ी काटने या कटाने से उम्र कम होती है। अत: इस दिन बाल और दाढ़ी नहीं कटवाना चाहिए ।
मंगलवार को हनुमान जी की पूजा और व्रत करने से हनुमान जी प्रसन्न होते है। मंगलवार के दिन हनुमान चालीसा एवं सुन्दर काण्ड का पाठ करना चाहिए।
मंगलवार को यथासंभव मंदिर में हनुमान जी के दर्शन करके उन्हें लाल गुलाब, इत्र अर्पित करके बूंदी / लाल पेड़े या गुड़ चने का प्रशाद चढ़ाएं । हनुमान जी की पूजा से भूत-प्रेत, नज़र की बाधा से बचाव होता है, शत्रु परास्त होते है।
🔮 शुभ हिन्दू नववर्ष 2025 विक्रम संवत : 2082 कालयक्त विक्रम : 1947 नल
🌐 कालयुक्त संवत्सर विक्रम संवत 2082,
✡️ शक संवत 1947 (विश्वावसु संवत्सर), चैत्र
👸🏻 शिवराज शक 352
☮️ गुजराती सम्वत : 2081 नल
☸️ काली सम्वत् 5126
🕉️ संवत्सर (उत्तर) क्रोधी
☣️ आयन – दक्षिणायन
☂️ ऋतु – सौर शरद ऋतु
⛈️ मास – आश्विन मास
🌔 पक्ष – शुक्ल पक्ष
📅 तिथि – मंगलवार आश्विन माह के शुक्ल पक्ष द्वितीया तिथि 04:51 AM तक उपरांत तृतीया
✏️ तिथि स्वामी – द्वितीया तिथि के देवता हैं ब्रह्मा। इस तिथि में ब्रह्मा की पूजा करने से मनुष्य विद्याओं में पारंगत होता है।
💫 नक्षत्र : नक्षत्र हस्त 01:40 PM तक उपरांत चित्रा
🪐 नक्षत्र स्वामी – हस्त नक्षत्र का स्वामी चंद्रमा है, जबकि इस नक्षत्र से संबंधित कन्या राशि का स्वामी बुध है।
⚜️ योग – ब्रह्म योग 08:22 PM तक, उसके बाद इन्द्र योग
प्रथम करण : बालव – 03:51 पी एम तक
द्वितीय करण : कौलव – 04:51 ए एम, सितम्बर 24 तक तैतिल
🔥 गुलिक काल : मंगलवार का गुलिक दोपहर 12:06 से 01:26 बजे तक।
🤖 राहुकाल (अशुभ) – दोपहर 15:19 बजे से 16:41 बजे तक। राहु काल में शुभ कार्य करना वर्जित माना गया है।
⚜️ दिशाशूल – मंगलवार को उत्तर दिशा की यात्रा नहीं करनी चाहिये, यदि अत्यावश्यक हो तो कोई गुड़ खाकर यात्रा कर सकते है।
🌞 सूर्योदयः- प्रातः 05:59:00
🌅 सूर्यास्तः- सायं 06:01:00
👸🏻 ब्रह्म मुहूर्त : 04:35 ए एम से 05:22 ए एम
🌇 प्रातः सन्ध्या : 04:59 ए एम से 06:10 ए एम
🌟 अभिजित मुहूर्त : 11:49 ए एम से 12:37 पी एम
✡️ विजय मुहूर्त : 02:14 पी एम से 03:03 पी एम
🐃 गोधूलि मुहूर्त : 06:16 पी एम से 06:40 पी एम
🎆 सायाह्न सन्ध्या : 06:16 पी एम से 07:28 पी एम
💧 अमृत काल : 07:06 ए एम से 08:51 ए एम
🗣️ निशिता मुहूर्त : 11:50 पी एम से 12:37 ए एम, सितम्बर 24
🌸 द्विपुष्कर योग : 01:40 पी एम से 04:51 ए एम, सितम्बर 24
👉🏼 आज का मंत्र-ॐ अं अंगारकाय नम:।
💁🏻‍♀️ आज का उपाय-हनुमान मन्दिर में शहद चढ़ाएं।
🌳 वनस्पति तंत्र उपाय- खैर के वृक्ष में जल चढ़ाएं।
🚓 यात्रा शकुन-दलिया का सेवन कर यात्रा पर निकलें।
⚛️ पर्व एवं त्यौहार – द्विपुष्कर योग/ चन्द्रदर्शन/ रोश हाशन्ना(ज्यू- यहूदी)/ विश्व बधिर दिवस, हैफा दिवस, स्वतंत्रता सेनानी यूसुफ़ मेहरअली जन्म दिवस, चिकित्साशास्त्री सत्यनारायण पुण्य तिथि, राष्ट्रवादी क्रांतिकारी प्रीतिलता वादेदार स्मृति दिवस, स्वतंत्रता सेनानी भगत सिंह शहीद दिवस, स्वतंत्रता सेनानी राजगुरु और सुखदेव थाप शहीद दिवस, राष्ट्रीय ग्रेट अमेरिकन पॉट पाई दिवस, राष्ट्रीय स्नैक स्टिक दिवस, बेचैन पैर सिंड्रोम जागरूकता दिवस, महानायक अमर शहीद राव तुलाराम शहीद दिवस, फ़िल्म अभिनेता प्रेम चोपड़ा जन्म दिवस, सुप्रसिद्ध कवि रामधारी सिंह ‘दिनकर जन्म दिवस, महान् देशभक्त श्रीनिवास शास्त्री जन्म दिवस, हरियाणा वीर शहीदी दिवस (Martyrs’ Day of Haryana), अंतर्राष्ट्रीय सांकेतिक भाषा दिवस (International Day of Sign Languages)
✍🏼 तिथि विशेष – द्वितीया तिथि को कटेरी फल का तथा तृतीया तिथि को नमक का दान और भक्षण दोनों ही त्याज्य बताया गया है। द्वितीया तिथि सुमंगला और कार्य सिद्धिकारी तिथि मानी जाती है। इस द्वितीया तिथि के स्वामी भगवान ब्रह्माजी को बताया गया है। यह द्वितीया तिथि भद्रा नाम से विख्यात मानी जाती है। यह द्वितीया तिथि शुक्ल पक्ष में अशुभ तथा कृष्ण पक्ष में शुभ फलदायिनी होती है।।
🗼 Vastu tips 🗽
घर में नकारात्मकता होने पर मिलते हैं ऐसे संकेत
आपके जीवन में नकारात्मकता तभी आती है जब आपके घर में किसी तरह का वास्तु दोष होता है, या फिर आपकी दिनचर्या अव्यवस्थित होती है और आपको गलत रास्तों पर चलते हैं। इन दोनों ही स्थितियों में आपको घर में प्रवेश करते ही कुछ नकारात्मक चीजों का अहसास हो सकता है। इनके बारे में नीचे बताया गया है।
अगर घर में प्रवेश करते ही आपको किसी तरह की दुर्गंध का अनुभव होता है, और ऐसा आपको एक बार नहीं बार-बार होता है, तो समझ जाइए किसी तरह की नकारात्मक शक्ति आपके घर में है। घर में वास्तु दोष होने पर भी इस तरह का संकेत आपको मिल सकता है।
घर में प्रवेश करते ही अगर आपको डर महसूस होता है, तो ये भी अच्छा संकेत नहीं माना जाता। इसकी वजह भी घर में मौजूद नकारात्मकता हो सकती है। ऐसी स्थिति में आपको तुरंत किसी वास्तु विशेषज्ञ को संपर्क करना चाहिए।
जिन लोगों के घर में नकारात्मकता होती है उनके घर में बार-बार चमकादड़ आ सकते हैं। इसलिए इस बात को गलती से भी अनदेखा न करें।
घर के अंदर आते ही अगर आपको अहसास हो कि, कोई अनजाना व्यक्ति आपको पुकार रहा है तो इसका अर्थ भी यही लगाया जाता है कि, घर में किसी तरह की नकारात्मकता फैली हुई है।
🔰 जीवनोपयोगी कुंजियां ⚜️
खून को पतला करने वाले 7 फूड्स
1. ओमेगा-3 से भरपूर फूड्स
फ्लैक्स सीड्स (अलसी), अखरोट, चिया सीड्स, सूरजमुखी के बीज
फैटी फिश (सामन, रोहू, सिंघाड़ा)
👉 ब्लड फ्लो बेहतर करते हैं और क्लॉट बनने का रिस्क घटाते हैं।
2. लहसुन
क्लॉटिंग को रोकता है, कोलेस्ट्रॉल घटाता है और नसों को साफ रखता है।
👉 सुबह खाली पेट 2–3 लहसुन की कलियां गुनगुने पानी के साथ खाएं।
3. अदरक
इसमें होते हैं सैलिसायलेट्स जो ब्लड थिनिंग में मदद करते हैं।
👉 अदरक का पानी उबालकर पिएं या सलाद में मिलाएं।
4. हल्दी
इसमें पाया जाता है करक्यूमिन, जो एंटी-इंफ्लेमेटरी है।
👉 हल्दी वाला दूध (फैट-फ्री) या हल्दी पानी में काली मिर्च डालकर पिएं।
5. विटामिन E युक्त फूड्स
बादाम, पालक और सूरजमुखी के बीज
👉 खून के फ्लो को हेल्दी बनाए रखते हैं।
6. डार्क चॉकलेट
फ्लेवोनोइड्स ब्लड सर्कुलेशन सुधारते हैं और हार्ट को प्रोटेक्ट करते हैं।
👉 75% कोको वाली शुगर-फ्री डार्क चॉकलेट खाएं।
7. हेल्दी वेट और एक्टिव लाइफस्टाइल
वजन हेल्दी रहेगा तो ब्लड स्मूथ फ्लो करेगा।
रोजाना 8–10 गिलास पानी, एक्सरसाइज और योगा जरूर करें।
🌿 आरोग्य संजीवनी ☘️
🌿 पारंपरिक चिकित्सा और आयुर्वेद का दृष्टिकोण:
आयुर्वेद में, दर्द (शूल) और सूजन (शोथ) को कम करने के लिए ठंडी तासीर (शीत वीर्य) वाली जड़ी-बूटियों का लेप (लेप) लगाने की प्रथा बहुत आम है। पत्तागोभी की तासीर ठंडी होती है, जो इसे सूजन और जलन पैदा करने वाले बढ़े हुए पित्त दोष को शांत करने के लिए एक उत्तम औषधि बनाती है। यह लेप प्रभावित जगह पर रक्त के प्रवाह को नियंत्रित करता है और वात दोष के कारण होने वाले दर्द में भी राहत देता है।
🔬 आधुनिक विज्ञान क्या कहता है?
यह सिर्फ एक दादी-नानी का नुस्खा नहीं है, इसके पीछे ठोस वैज्ञानिक कारण हैं:
*_एंटी-इंफ्लेमेटरी गुणों का खजाना: पत्तागोभी, विशेष रूप से लाल पत्तागोभी, एंथोसायनिन (Anthocyanins) और सल्फोराफेन (Sulforaphane) जैसे शक्तिशाली एंटी-इंफ्लेमेटरी (सूजन-रोधी) यौगिकों से भरपूर होती है। जब आप पत्तों को लपेटते हैं, तो माना जाता है कि ये यौगिक त्वचा के माध्यम से अवशोषित होकर सूजन को कम करते हैं।
प्राकृतिक कूल कंप्रेस: पत्तागोभी के पत्तों में पानी की मात्रा बहुत अधिक होती है। जब इन्हें दर्द वाले जोड़ पर लपेटा जाता है, तो वे एक प्राकृतिक ‘कूल कंप्रेस’ की तरह काम करते हैं, जो सूजन को कम करता है और दर्द के संकेतों को शांत करके राहत पहुंचाता है।
अध्ययन क्या कहते हैं: कुछ छोटे अध्ययनों में घुटने के गठिया (Osteoarthritis) के दर्द में पत्तागोभी की पट्टी को दर्द निवारक जेल जितना ही प्रभावी पाया गया है।
🌷 *गुरु भक्ति योग* 🌹
काल भैरव अष्टक
श्री कालभैरव अष्टक भगवान काल भैरव को समर्पित है। आद्य शंकराचार्य जी द्वारा रचित यह दिव्य स्तोत्र भगवान कालभैरव के विकराल और भयंकर स्वरूप की स्तुति करता है। भगवान काल भैरव का रूप उग्र और प्रचंड है लेकिन वे बहुत ही भोले और सरल स्वभाव के हैं, वे अपने भक्तो से प्रेम करते हैं एवं अपने भक्तों की रक्षा के लिए वे सदैव तत्पर रहते हैं।।
श्री काल भैरव अष्टकम हिंदी अर्थ सहित ।।
ॐ देवराजसेव्यमानपावनाङ्घ्रिपङ्कजंव्यालयज्ञसूत्रमिन्दुशेखरं कृपाकरमनारदादियोगिवृन्दवन्दितं दिगंबरंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥ १॥
जिनके पवित्र चरर्णों की सेवा देवराज इंद्र भगवान सदा करते हैं, जिन्होंने शिरोभूषण के रुप में चंद्र और सांप (सर्प) को धारण किया है, जो दिगंबर जी के वेश में हैं और नारद भगवान आदि योगिगों का समूह जिनकी पूजा, वंदना करते हैं, उन काशी के नाथ कालभैरव जी को मैं भजता हूं।
भानुकोटिभास्वरं भवाब्धितारकं परंनीलकण्ठमीप्सितार्थदायकं त्रिलोचनम ।कालकालमंबुजाक्षमक्षशूलमक्षरंकाशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे॥२॥
जो करोड़ों सूर्यों के समान प्रकाश देने वाले हैं, परमेश्वर भवसागर से जो तारने वाले हैं, जिनका कंठ नीला है और सांसारिक समृद्धियां प्रदान करते हैं और जिनके नेत्र तीन हैं। जो काल के भी काल हैं और जिनका त्रिशूल तीन लोकों को धारण करता है और जो अविनाशी हैं उस काशी के स्वामी कालभैरव को मैं भजता हूं।
शूलटङ्कपाशदण्डपाणिमादिकारणंश्यामकायमादिदेवमक्षरं निरामयम ।भीमविक्रमं प्रभुं विचित्रताण्डवप्रियंकाशिका पुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥३॥
जो अपने दोनों हाथों में त्रिशूल, फन्दा, कुल्हाड़ी और दंड लिया करते हैं, जो सृष्टि के सृजन के कारण हैं और सांवले रंग के हैं और आदिदेव सांसारिक रोगों से परे हैं, जिन्हें विचित्र तांडव पसंद है उस काशी के नाथ कालभैरव को मैं भजता हूं।
भुक्तिमुक्तिदायकं प्रशस्तचारुविग्रहंभक्तवत्सलं स्थितं समस्तलोकविग्रहम ।विनिक्वणन्मनोज्ञहेमकिङ्किणीलसत्कटिंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥४॥
जो मुक्ति प्रदान करते हैं, शुभ, आनंद दायक रुप धारण करते हैं, जो भक्तों से सदा प्रेम करते हैं और तीने लोकों में स्थित हैं। जो अपनी कमर पर घंटियां धारण करते हैं उन काशी के भगवान कालभैरव को मैं भजता हूं।
धर्मसेतुपालकं त्वधर्ममार्गनाशकंकर्मपाशमोचकं सुशर्मदायकं विभुम ।स्वर्णवर्णशेषपाशशोभिताङ्गमण्डलंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥ ५॥
जो धर्म की रक्षा करते हैं और अधर्म के मार्गों का नाश करते हैं, कर्मों के जाल से मुक्त करते हैं। जो स्वर्ण रंग के सांप से सुशोभित हैं उस काशी के नाथ कालभैरव को मैं भजता हूं। रत्नपादुकाप्रभाभिरामपादयुग्मकंनित्यमद्वितीयमिष्टदैवतं निरञ्जनम ।मृत्युदर्पनाशनं कराळदंष्ट्रमोक्षणंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥६॥
जिनके दोनों पैर रत्न जड़ित हैं, जो इष्ट देवता और परम पवित्र हैं। जो अपने दांतों से मौत का भय दूर करते हैं उन काशी के नाथ कालभैरव को मैं भजता हूं। अट्टहासभिन्नपद्मजाण्डकोशसन्ततिंदृष्टिपातनष्टपापजालमुग्रशासनम ।अष्टसिद्धिदायकं कपालमालिकन्धरंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥७॥जिनकी हंसी की ध्वनि से कमल से उत्पन्न ब्रह्मा की सभी कृतियों की गति रुक जाती है, जिसकी दृष्टि पड़ने से पापों का नाश हो जाता है, जो अष्ट सिद्धियां प्रदान करते हैं और मुंड़ों की माला धारण करते हैं उस काशी के नाथ कालभैरव को मैं भजता हूं।
भूतसङ्घनायकं विशालकीर्तिदायकंकाशिवासलोकपुण्यपापशोधकं विभुम ।नीतिमार्गकोविदं पुरातनं जगत्पतिंकाशिकापुराधिनाथ कालभैरवं भजे ॥८॥जो भूत, प्रेतों के स्वामी हैं और विशाल कीर्ति प्रदान करने वाले हैं, जो सत्य और नीति का रास्ता दिखाते हैं, जो जगतपति हैं उस काशी के नाथ कालभैरव को मैं भजता हूं।कालभैरवाष्टकं पठन्ति ये मनोहरंज्ञानमुक्तिसाधनं विचित्रपुण्यवर्धनम ।शोकमोहदैन्यलोभकोपतापनाशनंते प्रयान्ति कालभैरवाङ्घ्रिसन्निधिं नरा ध्रुवम ॥९॥जो काल भैरव अष्टकम का पाठ करते हैं, वो ज्ञान और मुक्ति को प्राप्त करते हैं। पुण्य पाते हैं और मृत्यु के पश्चात शोक, मोह, लोभ, ताप, क्रोध आदि का नाश करने वाले भगवान काल भैरव के चरणों को प्राप्त करते हैं इसमे बिलकुल भी संदेह नहीं है।।
॥इति कालभैरवाष्टकम् संपूर्णम् ॥
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⚜️ प्रजापति व्रत दूज को ही किया जाता है तथा किसी भी नये कार्य की शुरुआत से पहले एवं ज्ञान प्राप्ति हेतु ब्रह्माजी का पूजन अवश्य करना चाहिये। वैसे तो मुहूर्त चिंतामणि आदि ग्रन्थों के अनुसार द्वितीया तिथि अत्यन्त शुभ फलदायिनी तिथि मानी जाती है। परन्तु श्रावण और भाद्रपद मास में इस द्वितीया तिथि का प्रभाव शून्य हो जाता है। इसलिये श्रावण और भाद्रपद मास कि द्वितीया तिथि को कोई भी शुभ कार्य नहीं करना चाहिये।

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